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सजा की एक ऐसी कहानी: डीएम ने सुनाई दो घंटे की सजा, बिता दिए 41 साल

Tue, 26 Oct 2021 08:10 AM IST
कपिल kapil रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर
रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 26 Oct 2021 08:10 AM IST
सार

बिजनौर में तत्कालीन डीएम ने छोटेलाल भटनागर को सिर्फ दो घंटे की सजा सुनाई थी लेकिन उन्होंने पुस्तकालय में 41 बिता दिए। 41 सालों से आज भी छोटेलाल भटनागर किताबों के बीच उस सजा को पुरस्कार समझकर काट रहे हैं।

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Bijnor News: The then DM sentenced him to two hours but Chhotelal Bhatnagar spent 41 years in the library
छोटे लाल भटनागर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कभी आपने सोचा है, दो घंटे की सजा मिली हो और खुशी-खुशी उसे 41 साल काटा जाए। जी हां सजा भी ऐसी नहीं, बल्कि किताबों के बीच रहने की। यह रोचक कहानी है जिला पुस्तकालय में रहने वाले छोटेलाल भटनागर की। कलक्ट्रेट में रिकॉर्ड लिफ्टर रहे, तत्कालीन डीएम से नोकझोंक हुई तो सजा के तौर पर शाम को पांच से सात बजे तक पुस्तकालय में अतिरिक्त ड्यूटी लगा दी गई। उसके बाद न जाने कितने डीएम आए और चले गए, लेकिन 41 सालों से आज भी छोटेलाल भटनागर किताबों के बीच उस सजा को पुरस्कार समझकर काट रहे हैं। आइये छोटेलाल से ही जानते हैं कि आखिर कैसे शाम के दो घंटे की सजा में उन्होंने 41 साल काट दिए। 

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बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी बी निवासी छोटेलाल भटनागर (75) कलक्ट्रेट बिजनौर में रिकॉर्ड लिफ्टर के पद पर तैनात थे। सन 1980 में तत्कालीन डीएम एम रामचंद्रम से किसी बात को लेकर नोकझोंक हो गई। डीएम साहब ने छोटेलाल को सजा के तौर पर कलक्ट्रेट का काम निपटने के बाद शाम को पांच से सात बजे तक जिला पुस्तकालय में बैठने और वहां किताबों का हिसाब किताब रखने की सजा दे दी। छोटेलाल भटनागर कहते हैं कि शुरू में लगा कि गलत हो गया, लेकिन धीरे-धीरे किताबों से ऐसी दोस्ती हुई कि यह सजा पुरस्कार लगने लगी। उन्होंने बताया कि मैं रोज कलक्ट्रेट का काम निपटाता और शाम को पुस्तकालय आकर किताबों के बीच बैठता। कुछ किताबें पढ़ता, तो कुछ अनुभवों को कागजों पर उतारता। 
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सन 2006 में कलक्ट्रेट से सेवानिवृत्त हो गया तो पूरा समय पुस्तकालय को समर्पित कर दिया। छोटेलाल ने बताया कि आज 75 साल की उम्र हो गई, लेकिन आज भी सुबह नौ बजे पुस्तकालय आकर बैठ जाता हूं और शाम तक यहीं रहता हूं।

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