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एक साल की बच्ची को नाले में फेंक गई मां, पुलिसकर्मी ने बाहर निकाला
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नगीना में नाले में पड़ी छोटी बच्ची को उठाता निकालता पुलिस कर्मी।
- फोटो : BIJNOR
एक साल की बच्ची को नाले में फेंक गई मां, पुलिसकर्मी ने बाहर निकाला
नगीना। कहते हैं कि मां की ममता का कोई मोल नहीं होता, लेकिन गरीबी मां की ममता पर भी भारी पड़ जाती है। सड़क पर रहकर और भिक्षा मांग कर तीन छोटे-छोटे बच्चों का लालन-पालन करने वाली महिला अपनी दुधमुंही बच्ची को नाले में रखकर चली गई। बाद में पुलिसकर्मी ने बच्ची को नाले से निकाल कर एक समाजसेवी को सौंप दिया। बाद में बच्ची को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।
एक करीब 40 वर्षीय महिला भिक्षा मांग कर तीन छोटे-छोटे बच्चों का पालन करती है। दिन छिपने के बाद महिला अपने बच्चों के साथ स्टेशन रोड पर स्थित एक कांप्लेक्स में दुकान के सामने डेरा डाल लेती है और सुबह को बच्चों व सामान की पोटली के साथ चली जाती है। कड़कड़ाती ठंड हो या भीषण गर्मी या मूसलाधार बारिश, महिला का रात काटने का ठिकाना कांप्लेक्स की दुकान के बाहर ही रहता है। यहीं पर यह महिला अपने बच्चों को खिलाती पिलाती है।
बुधवार की सुबह हिंदू इंटर कॉलेज के पास के कूड़ा करकट से भरे सूखे नाले से लोगों ने बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो भीड़ जमा हो गई। नाले में एक साल की बच्ची को देखकर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मियों ने बच्ची को नाले से निकाल कर समाजसेवी सुभाष होटल वाले को सौंप दिया। सुभाष ने बच्ची को पहचान लिया क्योंकि महिला रात में बच्चों के साथ होटल के पास की दुकानों में ही रहती है। बाद में बच्ची को महिला के सुपुर्द कर दिया गया। महिला व उसके बड़े बच्चों का कहना है कि सुबह वे बच्ची को नाले के पास बैठा कर भिक्षा मांगने चले गए थे। बच्ची नाले में गिर गई होगी।
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नगीना। कहते हैं कि मां की ममता का कोई मोल नहीं होता, लेकिन गरीबी मां की ममता पर भी भारी पड़ जाती है। सड़क पर रहकर और भिक्षा मांग कर तीन छोटे-छोटे बच्चों का लालन-पालन करने वाली महिला अपनी दुधमुंही बच्ची को नाले में रखकर चली गई। बाद में पुलिसकर्मी ने बच्ची को नाले से निकाल कर एक समाजसेवी को सौंप दिया। बाद में बच्ची को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।
एक करीब 40 वर्षीय महिला भिक्षा मांग कर तीन छोटे-छोटे बच्चों का पालन करती है। दिन छिपने के बाद महिला अपने बच्चों के साथ स्टेशन रोड पर स्थित एक कांप्लेक्स में दुकान के सामने डेरा डाल लेती है और सुबह को बच्चों व सामान की पोटली के साथ चली जाती है। कड़कड़ाती ठंड हो या भीषण गर्मी या मूसलाधार बारिश, महिला का रात काटने का ठिकाना कांप्लेक्स की दुकान के बाहर ही रहता है। यहीं पर यह महिला अपने बच्चों को खिलाती पिलाती है।
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बुधवार की सुबह हिंदू इंटर कॉलेज के पास के कूड़ा करकट से भरे सूखे नाले से लोगों ने बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो भीड़ जमा हो गई। नाले में एक साल की बच्ची को देखकर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मियों ने बच्ची को नाले से निकाल कर समाजसेवी सुभाष होटल वाले को सौंप दिया। सुभाष ने बच्ची को पहचान लिया क्योंकि महिला रात में बच्चों के साथ होटल के पास की दुकानों में ही रहती है। बाद में बच्ची को महिला के सुपुर्द कर दिया गया। महिला व उसके बड़े बच्चों का कहना है कि सुबह वे बच्ची को नाले के पास बैठा कर भिक्षा मांगने चले गए थे। बच्ची नाले में गिर गई होगी।
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