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टीबी को समूल नष्ट करने की कवायद

Wed, 29 Jan 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 11:39 PM IST
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Bijnor News: exercise to eliminate TB altogether
टीबी को समूल नष्ट करने की कवायद
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बिजनौर। टीबी पर वार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार हो गया है। टीबी रोग को जड़ से खत्म करने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम दो सामाजिक संगठनों ने टीबी को समूल नष्ट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कंधे से कंधा मिलाकर चलना स्वीकारा है। इन संगठनों ने 18 साल से कम उम्र के 26 बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल का बीड़ा उठाया है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 25 अगस्त 2019 को प्रदेश में टीबी रोग से पीड़ित बच्चों को गोद लेने की परंपरा शुरू की थी। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल 18 साल से कम आयु के टीबी रोग से पीड़ित बच्चों को गोद लेकर अथवा किसी को गोद देकर उनके पोषण और समय पर दवा देने की व्यवस्था के लिए सघन अभियान की शुरुआत की है। जिले के सामाजिक संगठनों ने भी इसमें रुचि ली है। अधिकारियों के जागरूक करने पर इसी के तहत 26 बच्चों को दो सामाजिक संगठनों ने गोद लिया है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत के अनुसार 13 रोटरी क्लब आर्यंस और 13 रोटरी क्लब इंडस्ट्रीयल एरिया ने गोद लिए हैं। 18 साल से कम के बच्चे का पोषण और खाने पीने की व्यवस्था करने तथा उनका ध्यान रखने के लिए गोद लेने की प्रक्रिया होती है। बताया कि टीबी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इनकी बीमारी बढ़ने की मुख्य वजह कुपोषित होना है। गरीबी और तंगहाली के चलते ऐसे लोग अपने बच्चों की पूरी तरह से देखभाल नहीं कर पाते। इसी कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए पोषण भत्ता देती है। हालांकि इन बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक खाना मिल जाए तो वे जरूर सेहतमंद हो जाएंगे।
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कोई भी ले सकता है टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद
जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत के अनुसार टीबी से पीड़ित बच्चों को कोई भी गोद ले सकता है। इसके अंतर्गत कोई भी सक्षम व्यक्ति, संस्था, कॉरपोरेट हाउस, लायंस, रोटरी क्लब जैसी संस्थाएं टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद ले सकती हैं। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्यपाल के निर्देश पर 18 साल से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए जिला क्षय रोग अधिकारी संपर्क करना होगा। वहां से बच्चे का नाम मिलने के बाद उसके माता-पिता या अभिभावक की सहमति लेनी होगी। साथ ही बच्चे का नाम सार्वजनिक न करने की शर्त का भी पालन करना होगा। गोद लेने के बाद इस बात की निगरानी की जा सकेगी कि बच्चे को अस्पताल से वक्त पर दवा और पौष्टिक आहार भत्ता मिल रहा है अथवा नहीं। गोद लेने वाला शख्स भी बच्चे को पौष्टिक आहार और खाना उपलब्ध करा सकता है।
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