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UP: यूपी की एक ऐसी लोकसभा सीट, जहां से उभरा मायावती और रामविलास पासवान का चेहरा, दिलचस्प है पूरा इतिहास

Wed, 06 Mar 2024 01:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 06 Mar 2024 01:45 PM IST
सार

Bijnor News : बिजनौर लोकसभा सीट शुरू से ही बाहरी नेताओं के लिए काफी उपजाऊ साबित हुई है। यहां से मायावती से लेकर मीराकुमार और रामविलास पासवान अपनी राजनीति की शुरुआत कर चुके हैं।

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Bijnor Lok Sabha: Has been MP from Mayawati to Meerakumar
मायावती और रामविलास पासवान का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दल अब चुनावी दंगल में अपने दांव चल रहे हैं। बात बिजनौर लोकसभा की करें तो यहां की राजनीतिक धरती बाहरी नेताओं के लिए काफी उपजाऊ साबित हुई है। मायावती हो या मीराकुमार या फिर रामविलास पासवान, ये सभी यहां से अपनी राजनीति की शुरुआत कर चुके हैं। इतना ही नहीं इनमें से कुछ नाम ऐसे भी रहे, जो राजनीति के उच्च शिखर तक भी पहुंचे हैं। वर्तमान में भाजपा से गठबंधन होने के बाद रालोद ने अपना प्रत्याशी चंदन चौहान को घोषित किया है।

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बिजनौर लोकसभा सीट पर 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस के नेमीशरण जैन को जीत हासिल हुई। उन्होंने निर्दलीय गोविंद सहाय को हराया। उस समय नेमीशरण जैन को 75,018 और गोविंद सहाय को 43,520 वोट मिले थे। इसके बाद 1957 के चुनाव में भी इंडियन नेशनल कांग्रेस के अब्दुल लतीफ ने भारतीय जनसंघ के भूदेव सिंह को हरा दिया। 1962 के लोकसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। निर्दलीय प्रकाशवीर शास्त्री ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के अब्दुल लतीफ को चुनाव में पराजित कर दिया।

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इसके बाद 1967 में लोकसभा चुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस को फिर से जीत मिली। इंडियन नेशनल कांग्रेस के स्वामी प्रसाद शास्त्री ने भारतीय जनसंघ के एसराम को हराया। 1971 के चुनाव में भी बिजनौर सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। इंडियन नेशनल कांग्रेस के स्वामी रामानंद शास्त्री ने भारतीय क्रांति दल के महीलाल को चुनाव में शिकस्त दी। 1974 के चुनाव में कांग्रेस के रामदयाल निर्विरोध सांसद चुने गए।

1977 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर राजनीतिक परिदृश्य बदलना शुरू हो गया। भारतीय लोकदल के महीपाल इस बार चुनाव जीत गए। उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के महीलाल को पराजित किया। 1980 में जनता पार्टी सेकुलर के मंगलराम प्रेमी विजयी घोषित हुए। उन्होंने जनता पार्टी के महीलाल को चुनाव हराया। 1984 के चुनाव में फिर से कांग्रेस ने कब्जा किया। इंडियन नेशनल कांग्रेस के गिरधारीलाल ने लोकदल प्रत्याशी मंगलराम प्रेमी को चुनाव में पटकनी दी।

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पहली बार तीसरे नंबर पर रहीं, फिर 1989 में सांसद बनीं मायावती
गिरधारी लाल के निधन के बाद 1985 में उपचुनाव हुआ। इसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस से मीरा कुमार चुनावी मैदान में उतरी और पहली बार सांसद बनीं। उन्होंने लोकदल प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को चुनाव हराया। बसपा सुप्रीमो मायावती निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं और वे तीसरे नंबर पर रहीं। 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में मायावती को जीत हासिल हुई और वह पहली बार बिजनौर सीट से सांसद बनीं। बसपा से चुनाव लड़ीं मायावती ने जनता दल के मंगलराम प्रेमी को हराया। इंडियन नेशनल कांग्रेस से चुनाव लड़ीं पूर्व सांसद गिरधारी लाल की पुत्री आशा चौधरी दूसरे नंबर पर रहीं। 1991 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने पहली बार कब्जा किया। भाजपा से चुनाव लड़े मंगलराम प्रेमी ने मायावती को चुनाव हरा दिया। इसके बाद मायावती बिजनौर से चुनाव नहीं लड़ीं।

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बदलते रहे बिजनौर में नेताओं के सितारे
1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का कब्जा रहा। भाजपा से मंगलराम प्रेमी चुनाव लड़ें और उन्होंने सपा के सतीश कुमार को चुनाव हरा दिया। 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर पहली बार सपा ने परचम लहराया। सपा की ओमवती ने भाजपा के मंगलराम प्रेमी को चुनाव हराया। 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के शीशराम रवि ने फिर से कब्जा कर लिया। शीशराम रवि ने सपा की ओमवती को हराया। 2004 में रालोद व सपा के गठबंधन में रालोद के मुंशीराम पाल ने पहली बार पार्टी को इस सीट पर जीत दिलाई। मुंशीराम पाल ने बसपा के घनश्याम चंद खरवाल को पराजित कर दिया।

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2009 में परिसीमन बदला और कामयाब हुए भाजपा-रालोद गठबंधन
बिजनौर लोकसभा का परिसीमन वर्ष 2009 में बदल गया। अब इस लोकसभा में बिजनौर, चांदपुर, पुरकाजी, मीरापुर, हस्तिनापुर विधानसभा सीट शामिल हो गई। नए परिसीमन के बाद हुए वर्ष 2009 के चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन हुआ। इस चुनाव में रालोद के संजय सिंह चौहान ने बसपा के शाहिद सिद्दीकी को चुनाव में हराया। 2014 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा ने फिर से बिजनौर सीट पर कब्जा जमाया। भाजपा के भारतेंद्र सिंह पहली बार सांसद बने। उन्होंने सपा के शाहनवाज राना को चुनाव में पटकनी दी। 2019 के चुनाव में यहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और बसपा से मूलक नागर ने विजय पताका फहराई। मलूक नागर ने भारेंद्र सिंह को इस चुनाव में हराया।

बिजनौर में अब तक कौन-कौन रहे सांसद
1951 - कांग्रेस से नेमीशरण जैन
1957 - कांग्रेस से अब्दुुल लतीफ
1962- निर्दलीय प्रकाशवीर शास्त्री
1967 -कांग्रेस से स्वामी रामानंद शास्त्री
1971 - कांग्रेस से स्वामीरामानंद शास्त्री
1974 - कांग्रेस से रामदयाल
1977 - जनता पार्टी के महिलाल
1980- जनता पार्टी एस से मंगलराम प्रेमी
1984 - कांग्रेस से गिरीधारीलाल
1985 - कांग्रेस से मीरा कुमार
1989 - बसपा से मायावती
1991- भाजपा से मंगलराम प्रेमी
1996 - भाजपा से मंगलराम प्रेमी
1998- सपा से ओमवती
1999 - भाजपा से शीशराम रवि
2004 - रालोद से मुंशीरामपाल
2009 -रालोद से संजय चौहान
2014 -भाजपा से भारतेंद्र सिंह
2019 - बसपा से मलूक नागर

कौनसा दल कितनी बार जीता
- 07 बार रहे कांग्रेस के सांसद
-04 बार रहे भाजपा के सांसद
-02 बार रहे जनता पार्टी के सांसद
-02 बार हरे रालोद के सांसद
-02 बार रहे बसपा के सांसद
-01 बार रहे सपा के सांसद
-01 बार निर्दलीय सांसद रहे

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