{"_id":"6957fa057b21ff87570453c3","slug":"bijnor-fake-doctor-was-treating-real-patients-in-the-medical-hospital-this-is-how-it-was-busted-2026-01-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Bijnor: मेडिकल अस्पताल में नकली डॉक्टर कर रहा था असली मरीजों का इलाज, ऐसे हुआ भंडाफोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor: मेडिकल अस्पताल में नकली डॉक्टर कर रहा था असली मरीजों का इलाज, ऐसे हुआ भंडाफोड़
Fri, 02 Jan 2026 10:32 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Fri, 02 Jan 2026 10:32 PM IST
सार
सहायक आचार्य डॉ. तुषार की कुर्सी पर बैठा फर्जी डॉक्टर मरीजों को देख रहा था। पुराने मरीज के पर्चे पर मुहर भी लगा रहा था। स्टाफ ने उससे पूछा तो वह मौका देखकर भाग गया।
विज्ञापन
फर्जी डॉक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक बार फिर मेडिकल अस्पताल चर्चाओं में है। अस्पताल में डॉ. तुषार की ओपीडी में नकली डॉक्टर असली मरीजों का इलाज करता मिला। अस्पताल के स्टाफ ने ओपीडी पहुंचकर जांच पड़ताल की तो हंगामा मच गया। मौका देख फर्जी डॉक्टर मौके से भाग गया।
विज्ञापन
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे फार्मासिस्ट राजेश रवि और अन्य स्टाफ कमरा नंबर 25 में पहुंचे। उन्होंने वहां एक अनजान व्यक्ति को मास्क लगाए डॉक्टर की कुर्सी पर बैठे देखा। वह मरीजों के पर्चे पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तुषार की मुहर लगाकर दवाई लिख रहा था। इस दौरान डॉक्टर मौजूद नहीं थे। एक चिकित्सक ने डॉ. तुषार को फोन कर पता किया। उन्होंने उसे अपना असिस्टेंट बताते हुए बीएएमएस चिकित्सक होने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस पूरे प्रकरण का स्टाफ ने वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। डॉ. राजीव रस्तोगी और अन्य स्टाफ ने फर्जी चिकित्सक से पूछताछ की। उसने खुद के डॉक्टर होने से इनकार किया। इसके बाद मौका पाकर वहां से भाग गया। बाद में डॉ. तुषार ने भी इस व्यक्ति को पहचानने से इनकार कर दिया। उधर मेडिकल अस्पताल में मरीजों के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ का पूरा मामला व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे मिली असली मुहर
अस्पताल स्टाफ का कहना है कि कई महीने से टीबी एवं छाती विशेषज्ञ डॉ. तुषार के मुहर वाले पर्चे पर 20-20 दवाइयां लिखी जा रही थीं। दो-दो महीने पुराने मरीजों को सीएसटी (कंटीन्यू सेम ट्रीटमेंट) दवाई लिखी जा रही थी। लगातार एक जैसी दवाई लिखी होने पर स्टाफ को संशय हुआ। जांच हुई तो मामले की पोल खुल गई।
अस्पताल स्टाफ का कहना है कि कई महीने से टीबी एवं छाती विशेषज्ञ डॉ. तुषार के मुहर वाले पर्चे पर 20-20 दवाइयां लिखी जा रही थीं। दो-दो महीने पुराने मरीजों को सीएसटी (कंटीन्यू सेम ट्रीटमेंट) दवाई लिखी जा रही थी। लगातार एक जैसी दवाई लिखी होने पर स्टाफ को संशय हुआ। जांच हुई तो मामले की पोल खुल गई।
उधर फर्जी डॉक्टर के पास डॉ. तुषार की असली मुहर कैसे आई, इसका जवाब कोई नहीं दे पाया। चीफ फार्मेसिस्ट राजेश रवि ने बताया कि कई माह से उनके पास पुराने मरीजों के ऐसे पर्चे पहुंच रहे थे, जिस पर सीएसटी यानी कंटीन्यू सेम ट्रीटमेंट लिखा होता था।
शुक्रवार को उन्हें इस पर शक हुआ तो वह कक्ष नंबर 25 में डॉक्टर से इस संबंध में बात करने गए। वहां डॉ. तुषार के स्थान कोई अनजान व्यक्ति दवा लिख रहा था। डॉ. तुषार ने उसका नाम पूछने पर दिनेश बताया। कुछ ही देर में स्वयं अस्पताल पहुंचने की बात कही। बाद में वह इसको पहचानने से इनकार करने लगे।
ये बोले
मुझे मामले की जानकारी नहीं थी। जिस समय की घटना है, हम इमरजेंसी में थे। वीडियो में जो डॉक्टर है, मैं उसे नहीं जानता। इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट आते रहते हैं। इसलिए, दिनेश नाम सुनने पर असिस्टेंट बताया।
- डॉ. तुषार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, टीबी एवं छाती रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल
- इस प्रकरण में कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी तथा नियमानुसार कार्यवाही होगी। संबंधित डॉक्टर ही बताएंगे कि उनकी मुहर के साथ अनजान व्यक्ति दवाई कैसे लिख रहा था।
- डॉ. बीआर त्यागी, सीएमएस मेडिकल अस्पताल
मुझे मामले की जानकारी नहीं थी। जिस समय की घटना है, हम इमरजेंसी में थे। वीडियो में जो डॉक्टर है, मैं उसे नहीं जानता। इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट आते रहते हैं। इसलिए, दिनेश नाम सुनने पर असिस्टेंट बताया।
- डॉ. तुषार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, टीबी एवं छाती रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल
- इस प्रकरण में कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी तथा नियमानुसार कार्यवाही होगी। संबंधित डॉक्टर ही बताएंगे कि उनकी मुहर के साथ अनजान व्यक्ति दवाई कैसे लिख रहा था।
- डॉ. बीआर त्यागी, सीएमएस मेडिकल अस्पताल