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Bijnor News: मुहर्रम का महीना शुरू होते मातमी मजलिसों का आगाज
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नजीबाबाद। मुहर्रम का चांद नजर आते ही वाक्याते कर्बला की सदाएं ताजा होने लगीं। शिया समाज के अजादारों ने काले वस्त्र धारण कर मातम का इजहार शुरू कर दिया। जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में या अली, मौला की सदाएं गूंजने लगीं।
जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मुहर्रम का महीना शुरू होते ही मातमी माहौल नजर आने लगा है। शिया समाज के लोगों ने इमामबाड़ों को सजाने के साथ मातमी आयोजनों का सिलसिला शुरू कर दिया है। मोहर्रम तक जगह-जगह मातमी मजलिसों के दौरान हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की दीन और इस्लाम को बचाने के लिए दी गई कुर्बानी को नम आंखों से याद किया जाएगा।
जोगीरम्पुरी के इमामबाड़ा दरबारे हुसैनी में मोहर्रम महीना शुरू होने पर आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना जलाल हैदर ने कहा कि रसूल के नवासे इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने परिवार और साथियों की शहादत से इंसान और इंसानियत को बचाया था। उन्होंने कहा कि कर्बला की जंग में दुनिया को जुल्म के आगे न झुकने का भी पैगाम दिया।
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जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मुहर्रम का महीना शुरू होते ही मातमी माहौल नजर आने लगा है। शिया समाज के लोगों ने इमामबाड़ों को सजाने के साथ मातमी आयोजनों का सिलसिला शुरू कर दिया है। मोहर्रम तक जगह-जगह मातमी मजलिसों के दौरान हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की दीन और इस्लाम को बचाने के लिए दी गई कुर्बानी को नम आंखों से याद किया जाएगा।
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जोगीरम्पुरी के इमामबाड़ा दरबारे हुसैनी में मोहर्रम महीना शुरू होने पर आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना जलाल हैदर ने कहा कि रसूल के नवासे इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने परिवार और साथियों की शहादत से इंसान और इंसानियत को बचाया था। उन्होंने कहा कि कर्बला की जंग में दुनिया को जुल्म के आगे न झुकने का भी पैगाम दिया।
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