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बुखार आते ही हो जाएं सावधान
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बुखार आते ही हो जाएं सावधान, नहीं पड़ेगी ऑक्सीजन की जरूरत
बिजनौर। बुखार और कोविड-19 से मिलते-जुलते लक्षण दिखते ही मरीज सावधान हो जाएं। तुरंत ही अपने चिकित्सक से संपर्क कर दवा लेना शुरू कर दें तो ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत होने वाला इलाज काफी कारगर है।
यह कहना है पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला संयुक्त चिकित्सालय एल-2 विंग के नोडल अधिकारी डॉ. ज्ञानचंद का। उन्होंने कहा कि कोरोना के शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है। वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद है। निजी अस्पतालों ने भी सामान्य ओपीडी को पूर्णत: बंद कर रखा है। यहां सिर्फ खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। बुखार या खांसी की शुरुआत होते ही खासकर ग्रामीण इलाकों के लोग या तो इसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर नीम हकीमों के चंगुल में फंस जाते हैं। इसकी वजह से उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाता है और फेफड़ों में संक्रमण फैल जाता है।
डॉ. ज्ञानचंद का कहना है कि चिकित्सक की देखरेख में इलाज शुरू करने से अधिकतर लोग ठीक हो रहे हैं। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत होने वाला इलाज काफी कारगर है। उन्होंने बताया कि टीके से कोरोना से बचाव के लिए बहुत मजबूत सुरक्षा मिल रही है। संक्रमण टीका लगने के बाद भी हो सकता है, लेकिन ये जानलेवा नहीं हो पाएगा। इससे बचाव के चार तरीकों पर अमल करें। हमेशा मास्क लगाएं, दो गज की दूरी का पालन करें। साथ ही बार-बार किसी भी कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोएं अथवा सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहें, जिससे कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सके।
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बिजनौर। बुखार और कोविड-19 से मिलते-जुलते लक्षण दिखते ही मरीज सावधान हो जाएं। तुरंत ही अपने चिकित्सक से संपर्क कर दवा लेना शुरू कर दें तो ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत होने वाला इलाज काफी कारगर है।
यह कहना है पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला संयुक्त चिकित्सालय एल-2 विंग के नोडल अधिकारी डॉ. ज्ञानचंद का। उन्होंने कहा कि कोरोना के शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है। वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद है। निजी अस्पतालों ने भी सामान्य ओपीडी को पूर्णत: बंद कर रखा है। यहां सिर्फ खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। बुखार या खांसी की शुरुआत होते ही खासकर ग्रामीण इलाकों के लोग या तो इसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर नीम हकीमों के चंगुल में फंस जाते हैं। इसकी वजह से उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाता है और फेफड़ों में संक्रमण फैल जाता है।
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डॉ. ज्ञानचंद का कहना है कि चिकित्सक की देखरेख में इलाज शुरू करने से अधिकतर लोग ठीक हो रहे हैं। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत होने वाला इलाज काफी कारगर है। उन्होंने बताया कि टीके से कोरोना से बचाव के लिए बहुत मजबूत सुरक्षा मिल रही है। संक्रमण टीका लगने के बाद भी हो सकता है, लेकिन ये जानलेवा नहीं हो पाएगा। इससे बचाव के चार तरीकों पर अमल करें। हमेशा मास्क लगाएं, दो गज की दूरी का पालन करें। साथ ही बार-बार किसी भी कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोएं अथवा सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहें, जिससे कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सके।
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