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बासमती के नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:18 PM IST
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बिजनौर में प्रशासन ने बासमती चावल में दाना नहीं पड़ने से हुए नुकसान की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में प्रभावित किसानों को कृषि विभाग की किसी योजना से लाभ दिलाने की संस्तुति की गई है।
किसानों ने कृषि विभाग से बीज खरीदकर बासमती धान पीबी 06 की बुवाई की थी। भाकियू के महासचिव दिगंबर सिंह के मुताबिक जिले के करीब 25000 बीघा रकबे में बासमती धान बोया गया। धान में दाना नहीं पड़ा। इसको लेकर किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय पर तालाबंदी की थी।
सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के हस्तक्षेप पर जांच कमेटी बनी। कमेटी ने खेतों पर पहुंचकर क्राप कटिंग कराई। कृषि उपनिदेशक जसपाल के मुताबिक जांच में किसानों का नुकसान होने की बात सामने आई है। डीएम के माध्यम से जांच रिपोर्ट कृषि विभाग को भेज दी गई है। प्रभावित किसानों को कृषि विभाग की किसी योजना से लाभ दिलाने की संस्तुति की गई है।
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कृषि उपनिदेशक के अनुसार जिले में बासमती धान में दाना नहीं पड़ने से कितना नुकसान हुआ है इसका आंकलन अलग से होगा। इसके लिए राजस्व विभाग की टीम गांव गांव जाकर नुकसान का सर्वे करेगी। राजस्व विभाग नुकसान की रिपोर्ट डायरेक्टर स्टेटिक्स को भेजेगा। वहां से नुकसान का भुगतान करने के लिए बीमा कंपनी को निर्देश किया जाएगा।
बीमा कंपनी की आेर से उन्हीं किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा, जिन्होंने धान की फसल का बीमा करा रखा है।
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किसानों ने कृषि विभाग से बीज खरीदकर बासमती धान पीबी 06 की बुवाई की थी। भाकियू के महासचिव दिगंबर सिंह के मुताबिक जिले के करीब 25000 बीघा रकबे में बासमती धान बोया गया। धान में दाना नहीं पड़ा। इसको लेकर किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय पर तालाबंदी की थी।
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सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के हस्तक्षेप पर जांच कमेटी बनी। कमेटी ने खेतों पर पहुंचकर क्राप कटिंग कराई। कृषि उपनिदेशक जसपाल के मुताबिक जांच में किसानों का नुकसान होने की बात सामने आई है। डीएम के माध्यम से जांच रिपोर्ट कृषि विभाग को भेज दी गई है। प्रभावित किसानों को कृषि विभाग की किसी योजना से लाभ दिलाने की संस्तुति की गई है।
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कृषि उपनिदेशक के अनुसार जिले में बासमती धान में दाना नहीं पड़ने से कितना नुकसान हुआ है इसका आंकलन अलग से होगा। इसके लिए राजस्व विभाग की टीम गांव गांव जाकर नुकसान का सर्वे करेगी। राजस्व विभाग नुकसान की रिपोर्ट डायरेक्टर स्टेटिक्स को भेजेगा। वहां से नुकसान का भुगतान करने के लिए बीमा कंपनी को निर्देश किया जाएगा।
बीमा कंपनी की आेर से उन्हीं किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा, जिन्होंने धान की फसल का बीमा करा रखा है।