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बैंकों के बाहर से नहीं छंटी भीड़
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 06 Feb 2017 11:37 PM IST
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अफजलगढ़ में सोमवार को बैंक के बाहर लगी खाताधारकों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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अफजलगढ़ में तीन माह बाद भी बैंकों में कैश की हालात नहीं सुधर पाई है। इनमें अभी भी ग्राहकों की लाइन बदस्तूर लगी हुई है। उपभोक्ता दो घंटे पहले ही बैंक खुलने के इंतजार में लाइनों में लगने शुरू हो जाते हैं। ग्राहकों ने डीएम से स्थिति में सुधार कराने की मांग उठाई है।
स्टेट बैंक, पीएनबी, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक के बाहर नोटबंदी के तीन माह बीत जाने के बाद भी भीड़ कम नहीं हो रही है। बैंक खुलते ही कैश लेने के लिए भीड़ उमड़ आती है। आए दिन बैंकों में धक्का-मुक्की और गाली-गलौज के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा शर्मिंदगी बैंक कर्मचारियों को उठानी पड़ रही है। महिलाएं भी उन्हें खरी-खोटी सुनाने में पीछे नहीं रहतीं। बैंककर्मी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते।
ग्राहक सर्वेश, बलराम, रामकरण सिंह, छोटे सिंह, विष्णु सिंह, राम सिंह, शबाना, रोशनी, सलमा, जिया, मैहसर, कमलेश, गीता, सरोज का कहना है कि तीन माह से वह बैंक में कैश लेने जाते हैं तो अधिकारी दो से पांच हजार रुपये देकर टरका देते हैं। इतने कैश में न तो ठीक से घर का खर्च चल पा रहा है और न ही लेनदेन निपट पा रहा है। उपभोक्ता असमंजस में हैं।
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उपभोक्ताओं का कहना है कि तीन माह बाद नगर का कोई एटीएम ठीक से नहीं चला। इन्हें एक-एक सप्ताह के अंतराल से चलाया जा रहा है। सोमवार को भी अधिकांश बैंकों के बाहर कैश के लिए भीड़ टूट पड़ी। बैंकों ने कैश के लिए लाइन लगवा दी। फिर भी तमाम ग्राहकों को कैश के बगैर लौटना पड़ा। इस संबंध में पूछने पर स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कैश न आने से परेशानी है।
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स्टेट बैंक, पीएनबी, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक के बाहर नोटबंदी के तीन माह बीत जाने के बाद भी भीड़ कम नहीं हो रही है। बैंक खुलते ही कैश लेने के लिए भीड़ उमड़ आती है। आए दिन बैंकों में धक्का-मुक्की और गाली-गलौज के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा शर्मिंदगी बैंक कर्मचारियों को उठानी पड़ रही है। महिलाएं भी उन्हें खरी-खोटी सुनाने में पीछे नहीं रहतीं। बैंककर्मी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते।
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ग्राहक सर्वेश, बलराम, रामकरण सिंह, छोटे सिंह, विष्णु सिंह, राम सिंह, शबाना, रोशनी, सलमा, जिया, मैहसर, कमलेश, गीता, सरोज का कहना है कि तीन माह से वह बैंक में कैश लेने जाते हैं तो अधिकारी दो से पांच हजार रुपये देकर टरका देते हैं। इतने कैश में न तो ठीक से घर का खर्च चल पा रहा है और न ही लेनदेन निपट पा रहा है। उपभोक्ता असमंजस में हैं।
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उपभोक्ताओं का कहना है कि तीन माह बाद नगर का कोई एटीएम ठीक से नहीं चला। इन्हें एक-एक सप्ताह के अंतराल से चलाया जा रहा है। सोमवार को भी अधिकांश बैंकों के बाहर कैश के लिए भीड़ टूट पड़ी। बैंकों ने कैश के लिए लाइन लगवा दी। फिर भी तमाम ग्राहकों को कैश के बगैर लौटना पड़ा। इस संबंध में पूछने पर स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कैश न आने से परेशानी है।