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बैंकों पर ही लोगों का कट रहा दिन
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:16 AM IST
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बिजनौर में बैंकों में 500 और एक हजार रुपये के नोट जमा करने व कैश लेने के लिए उपभोक्ताओं की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नोट जमा करने के लिए अभी भी बैंकों में लाइन लग रही है। उपभोक्ताओं के पास दूसरे नोट आने पर अब बाजार की स्थिति बदलने लगी है और बाजार में ग्राहक दिखाई दे रहे हैं।
एक सप्ताह में नगदी निकालने की सीमा 20 हजार से बढ़ाकर 24 हजार करने के बाद पहले रुपये निकाल चुके उपभोक्ता फिर से बैंकों में आ रहे हैं। जिन बैंकों में कैश है, वहां भी उपभोक्ताओं के नोट नहीं बदले जा रहे हैं। जिला सहकारी बैंक में दो दिन बाद भी कैश नहीं आया है। वहां पर 500 व एक हजार के नोट जमा न होने व कैश खत्म होने से कर्मचारियों के अलावा कोई दिखाई नहीं दिया। बुधवार को एचडीएफसी बैंक में भी कैश खत्म होने से काउंटर और एटीएम मशीन से उपभोक्ताओं को रुपये नहीं मिले। एसबीआई की मुख्य शाखा की एटीएम मशीन से भी बुधवार को पूरा दिन नोट मिले। एक दो जगह जहां पर कैश बदला भी गया, वहां पर उपभोक्ताओं की उंगली पर स्याही नहीं लगाई गई है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि अभी उपभोक्ताओं की उंगली पर लगाने वाली स्याही नहीं मिली है। यह स्याही भी आरबीआई से ही मिलने की बात कही जा रही है। वहीं नोट खत्म होने के बाद खराब हुए बाजार के हालात अब सामान्य होने लगे हैं। उपभोक्ता अपनी जरूरत के सामान के लिए रुपये खर्च कर रही है। हालांकि अभी ज्वैलरी, गाड़ी, बाइक आदि महंगे सामान खरीदने की ओर उपभोक्ता ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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एक सप्ताह में नगदी निकालने की सीमा 20 हजार से बढ़ाकर 24 हजार करने के बाद पहले रुपये निकाल चुके उपभोक्ता फिर से बैंकों में आ रहे हैं। जिन बैंकों में कैश है, वहां भी उपभोक्ताओं के नोट नहीं बदले जा रहे हैं। जिला सहकारी बैंक में दो दिन बाद भी कैश नहीं आया है। वहां पर 500 व एक हजार के नोट जमा न होने व कैश खत्म होने से कर्मचारियों के अलावा कोई दिखाई नहीं दिया। बुधवार को एचडीएफसी बैंक में भी कैश खत्म होने से काउंटर और एटीएम मशीन से उपभोक्ताओं को रुपये नहीं मिले। एसबीआई की मुख्य शाखा की एटीएम मशीन से भी बुधवार को पूरा दिन नोट मिले। एक दो जगह जहां पर कैश बदला भी गया, वहां पर उपभोक्ताओं की उंगली पर स्याही नहीं लगाई गई है। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि अभी उपभोक्ताओं की उंगली पर लगाने वाली स्याही नहीं मिली है। यह स्याही भी आरबीआई से ही मिलने की बात कही जा रही है। वहीं नोट खत्म होने के बाद खराब हुए बाजार के हालात अब सामान्य होने लगे हैं। उपभोक्ता अपनी जरूरत के सामान के लिए रुपये खर्च कर रही है। हालांकि अभी ज्वैलरी, गाड़ी, बाइक आदि महंगे सामान खरीदने की ओर उपभोक्ता ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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