Bijnor News: जॉन के सवाल का जवाब देगी बान, हां मैं अब भी बहती हूं...
प्रशासन ने बान को लेकर योजना बनाई तो बारह मास बहने वाली बान में फिर से जलधारा की उम्मीद का अंकुर फूटने लगा है।
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अमरोहा निवासी मशहूर शायर जॉन एलिया के इस शेर का वर्तमान में जबाव दें तो बान अब नहीं बहती, बल्कि नाला बन चुकी है। पर सबकुछ ठीक रहा और प्रशासन का अभियान परवान चढ़ा तो बान खुद कह उठेगी कि हां बान अब भी बह रही है।
असल में पांच दशक पहले तक बारह मास बहने वाली बान धीरे-धीरे गंदगी और अतिक्रमण भी भेंट चढ़ गई। नदी से यह नाले में सिमटकर रह गई। यह नदी बिजनौर से अमरोहा तक जाती थी और उस समय हजारों लोगों के पेयजल से लेकर सिंचाई तक काम आती थी। अब प्रशासन फिर से इसे पुनर्जीवित करने को योजना तैयार की है।
बान नदी की बात करें तो जिले में इसकी लंबाई करीब 103 किलोमीटर है। अभियान भी पहली बार नहीं है, वर्ष 2019 में बड़े स्तर पर अभियान चला और बंद हो गया, लेकिन बान के हालात नहीं सुधर सके। अब फिर से प्रशासन ने बान को लेकर योजना बनाई तो बारह मास बहने वाली बान में फिर से जलधारा की उम्मीद का अंकुर फूटने लगा है। बान नदी नजीबाबाद के पास से निकलकर किरतपुर, मोहम्मदपुर देवमल, नहटौर, नूरपुर ब्लाॅक से होते हुए अमरोहा जिले में प्रवेश करती है।
पिछले पांच सालों में हुए सर्वे में प्रशासन को बान नदी के दोनों ओर सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध कब्जे मिले। करीब चार साल पहले लाल झंडी लगाकर इन अवैध कब्जों को चिन्हित भी किया गया, लेकिन अभियान देखते ही देखते बंद हो गया। इस बार फिर से प्रशासन की ओर से बान नदी को पांच ब्लाॅक, 55 गांवों के क्षेत्र को 18 जोन में बांटा गया है। इसके अलावा श्रमदान के लिए सेक्टर भी बनाए जा रहे हैं, जिनकी संख्या सौ से ज्यादा होगी।
अविरल धारा को बनने थे चेकडैम, पर कुछ नहीं हुआ
बान नदी के जल की धारा नियमित करने के लिए चेकडैम बनाने के लिए कई बिंदु चिन्हित किए गए थे, ताकि बान नदी की धारा को अविरल बनाया जा सके। यह बान का दुर्भाग्य ही है कि अभियान के लिए लंबी चौड़ी योजना तो बनी, लेकिन परवान न चढ़ सकी। हालांकि इस बार प्रशासन की ओर से अभियान को अंतिम छोर तक ले जाने का दावा किया जा रहा है।
अतिक्रमण से संकरी हुई बान नदी
बान नदी पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया। यही कारण है कि कभी नदी के रूप में बहने वाली बान नदी आज नाले के रूप में सिमटकर रह गई है। कागजों की बात करें तो बान की चौड़ाई दस से 15 मीटर तक है, लेकिन मौके पर इस समय एक या दो मीटर तक भी सिमट चुकी है।
प्राकृतिक श्रोत थे बान नदी के पानी का श्रोत
नजीबाबाद के पास बान नदी का उद्गम माना जाता है, ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा यहां क्या था कि पांच दशक पहले यह 12 महीने बहती थी। इसका जबाव भी उसके आसपास की भागौलिक स्थिति में छिपा हुआ है। इस क्षेत्र में दो से तीन दशक पहले तक पानी के प्राकृतिक श्रोत फूटते थे। उद्गम स्थल के पास एक बड़ा तालाब भी था। इसमें भी प्राकृतिक श्रोत से पानी आने के कारण पानी बाहर आता और बान में चला था। आसपास का पानी भी इसी नदी से होता हुआ आगे बढ़ता था।
हम बान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। जल्द ही बान पर निरीक्षण किया जाएगा और उस पर काम शुरू कराया जाएगा। बान नदी में फिर से जलधारा वापिस लौटाने का लक्ष्य लिया गया है। ताकि यह अपने पुराने स्वरूप में लौट सके। उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर