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विदेश में रहकर जगा रहे हिंदी की अलख
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आचार्य संदीप त्यागी।
- फोटो : BIJNOR
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विदेश में रहकर जगा रहे हिंदी की अलख
बिजनौर। विदेशों में भी हिंदी का डंका बज रहा है। चांदपुर तहसील के ग्राम सिसौना पिलाना निवासी अजय त्यागी गायन के साथ-साथ सनातन संस्कृति तो उनके भाई संदीप त्यागी योग के साथ अंग्रेजों को हिंदी और संस्कृत भाषा पढ़ा रहे हैं। दोनों भाई विदेश में रहकर हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
चांदपुर तहसील के गांव सिसौना पिलाना निवासी आचार्य संदीप और उनके भाई अजय त्यागी लगभग 22 वर्ष पूर्व कनाडा गए थे। वहां पर वे अब योग के साथ साथ हिंदी की पहचान बना चुके हैं। दोनों भाई एक से बढ़कर एक हैं। गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर हरिद्वार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार से योग एवं संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने वाले आचार्य संदीप ने योग में अपने कॅरियर की शुरुआत की, जबकि उनके भाई अजय त्यागी हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी में काव्य सृजन एवं लेखन कला में माहिर हैं।
इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भारतीय धर्म, दर्शन योग साहित्य एवं हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं। आचार्य संदीप ने बताया कि वे इस विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से कनाडा समेत दूसरे देशों के नागरिकों को भी हिंदी की शिक्षा दे रहे हैं। वहीं, उनके भाई पाठ्यक्रम में योग के साथ ही संस्कृत भाषा का ज्ञान, भेद, उप भेद, परंपराओं से आदि की विस्तारपूर्वक जानकारी देकर अंग्रेजों को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत के साथ साथ विदेशों में भी जितनी अधिक से अधिक देशों में हिंदी और संस्कृत का प्रचार-प्रसार हो उतना ही कम है। ये उनका प्रयास है कि दुनियाभर में हिंदी और संस्कृत को आगे बढ़ाएंगे।
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अंग्रेजों को सिखा रहे संस्कृत, हिंदी, गायन कला
आचार्य संदीप त्यागी ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से संस्कृत, हिंदी और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके विदेशियों को उनके बीच रहकर ही अपनी संस्कृति की ओर से आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजय त्यागी विदेशियों को हिंदी गायन कला तो वे योग और अन्य भारतीय विधाओं का अंग्रेजों को दीवाना बना रहे हैं।
दुनिया भर में आचार्य व पुरोहित तैयार करना है मकसद
आचार्य संदीप बताते हैं कि उन्हें अपने देश हिंदुस्तान से असीम प्रेम है। वे और उनके भाई विदेश में रहकर भी भारत माता का शीश गर्व से ऊंचा कर रहे हैं। उनका मकसद विदेेशों में योग और सनातन संस्कृति के साथ साथ हिंदी तथा संस्कृत का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है।
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बिजनौर। विदेशों में भी हिंदी का डंका बज रहा है। चांदपुर तहसील के ग्राम सिसौना पिलाना निवासी अजय त्यागी गायन के साथ-साथ सनातन संस्कृति तो उनके भाई संदीप त्यागी योग के साथ अंग्रेजों को हिंदी और संस्कृत भाषा पढ़ा रहे हैं। दोनों भाई विदेश में रहकर हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
चांदपुर तहसील के गांव सिसौना पिलाना निवासी आचार्य संदीप और उनके भाई अजय त्यागी लगभग 22 वर्ष पूर्व कनाडा गए थे। वहां पर वे अब योग के साथ साथ हिंदी की पहचान बना चुके हैं। दोनों भाई एक से बढ़कर एक हैं। गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर हरिद्वार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार से योग एवं संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने वाले आचार्य संदीप ने योग में अपने कॅरियर की शुरुआत की, जबकि उनके भाई अजय त्यागी हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी में काव्य सृजन एवं लेखन कला में माहिर हैं।
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इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भारतीय धर्म, दर्शन योग साहित्य एवं हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं। आचार्य संदीप ने बताया कि वे इस विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से कनाडा समेत दूसरे देशों के नागरिकों को भी हिंदी की शिक्षा दे रहे हैं। वहीं, उनके भाई पाठ्यक्रम में योग के साथ ही संस्कृत भाषा का ज्ञान, भेद, उप भेद, परंपराओं से आदि की विस्तारपूर्वक जानकारी देकर अंग्रेजों को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत के साथ साथ विदेशों में भी जितनी अधिक से अधिक देशों में हिंदी और संस्कृत का प्रचार-प्रसार हो उतना ही कम है। ये उनका प्रयास है कि दुनियाभर में हिंदी और संस्कृत को आगे बढ़ाएंगे।
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अंग्रेजों को सिखा रहे संस्कृत, हिंदी, गायन कला
आचार्य संदीप त्यागी ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से संस्कृत, हिंदी और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके विदेशियों को उनके बीच रहकर ही अपनी संस्कृति की ओर से आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजय त्यागी विदेशियों को हिंदी गायन कला तो वे योग और अन्य भारतीय विधाओं का अंग्रेजों को दीवाना बना रहे हैं।
दुनिया भर में आचार्य व पुरोहित तैयार करना है मकसद
आचार्य संदीप बताते हैं कि उन्हें अपने देश हिंदुस्तान से असीम प्रेम है। वे और उनके भाई विदेश में रहकर भी भारत माता का शीश गर्व से ऊंचा कर रहे हैं। उनका मकसद विदेेशों में योग और सनातन संस्कृति के साथ साथ हिंदी तथा संस्कृत का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है।

अजय त्यागी।- फोटो : BIJNOR