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गेहूं कटाई के बाद बढ़ गए दमा के मरीज
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बिजनौर जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : BIJNOR
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गेहूं कटाई के बाद बढ़ गए दमा के मरीज
बिजनौर। जिलेभर में इस समय गेहूं कटाई की जा रही है। गेहूं कटाई के बाद भूसे के कण वातावरण में फैले हुए हैं, जिसके चलते जिन लोगों को भूसे से एलर्जी हैं। उन्हें खांसी और दमा की शिकायत हो रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज दमा के आ रहे हैं।
जिले में लगभग सभी जगह गेहूं कट गए है, लेकिन गेहूं कटने के बाद लोगों में दमा की परेशानी बढ़ गई है। भूसे के साथ अन्य कई प्रकार के पौधों के कण भी मिले होते हैं, जिसकी वजह से वह कण काम करते वक्त व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं, जिससे व्यक्ति को खांसी की समस्या बन रही है। इतना ही नहीं इसकी वजह से बलगम भी बन रहा है। इन दिनों में हर साल दमा के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है, जिसके चलते अब जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज दमा और खांसी का उपचार कराने आ रहे हैं। वहीं गेहूं कटाई से पहले जिला अस्पताल की ओपीडी में खांसी और दमा के आने वाले मरीजों की संख्या रोजाना करीब 10 थी। भूसे से हो रही एलर्जी से बचने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहे। इसके साथ ही मास्क लगाकर काम करें।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि गेहूं कटाई के बाद खांसी और दमा के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। क्योंकि जिन लोगों को भूसे से एलर्जी है, उन्हें दमा जैसी समस्या हो रही है। क्योंकि भूसे की वजह से कई प्रकार के कण वातावरण में मिले हुए हैं।
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बिजनौर। जिलेभर में इस समय गेहूं कटाई की जा रही है। गेहूं कटाई के बाद भूसे के कण वातावरण में फैले हुए हैं, जिसके चलते जिन लोगों को भूसे से एलर्जी हैं। उन्हें खांसी और दमा की शिकायत हो रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज दमा के आ रहे हैं।
जिले में लगभग सभी जगह गेहूं कट गए है, लेकिन गेहूं कटने के बाद लोगों में दमा की परेशानी बढ़ गई है। भूसे के साथ अन्य कई प्रकार के पौधों के कण भी मिले होते हैं, जिसकी वजह से वह कण काम करते वक्त व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं, जिससे व्यक्ति को खांसी की समस्या बन रही है। इतना ही नहीं इसकी वजह से बलगम भी बन रहा है। इन दिनों में हर साल दमा के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है, जिसके चलते अब जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 मरीज दमा और खांसी का उपचार कराने आ रहे हैं। वहीं गेहूं कटाई से पहले जिला अस्पताल की ओपीडी में खांसी और दमा के आने वाले मरीजों की संख्या रोजाना करीब 10 थी। भूसे से हो रही एलर्जी से बचने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहे। इसके साथ ही मास्क लगाकर काम करें।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि गेहूं कटाई के बाद खांसी और दमा के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। क्योंकि जिन लोगों को भूसे से एलर्जी है, उन्हें दमा जैसी समस्या हो रही है। क्योंकि भूसे की वजह से कई प्रकार के कण वातावरण में मिले हुए हैं।
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