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रामलीला की अनुमति से खुश हो गए कलाकार
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रामलीला कलाकार धनीराम गुप्ता
- फोटो : BIJNOR
रामलीला की अनुमति से खुश हो गए कलाकार
बिजनौर। देश में रामलीला की समृद्ध परंपरा रही है। राम के आदर्शों और उनके जीवन के संघर्षों को दर्शाने वाली रामलीला के लिए योगी सरकार ने पहल करते हुए कोविड गाइडलाइन को दृष्टिगत रखते हुए रामलीला कराने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय से रामलीला प्रेमी बेहद खुश हैं। जनपद की पुरानी रामलीला में से एक शादीपुर की रामलीला गत 64 वर्षों से निरंतर मंचित की जा रही है।
शादीपुर की रामलीला में ग्रामीण कलाकार ही प्रतिभाग करते हैं। रामलीला कमेटी के मैनेजर ब्रज बहादुर सिंह बताते हैं कि गांव में रामलीला की पुरानी परंपरा रही है। 1940 के आसपास गांव के मामराज सिंह ने एक नाटक कंपनी स्थापित की थी, जिसमें जनपद भर के कलाकार शामिल रहते थे। नाटक कंपनी द्वारा सुल्ताना डाकू ,भक्त प्रहलाद, रामायण तथा महाभारत के प्रसंग मंचित किए जाते थे। सन 1957 में नाटक कंपनी समाप्त हो गई और क्षेत्र के कलाकारों के साथ रामलीला का मंचन ग्राम शादीपुर में होने लगा। रामलीला में परशुराम का चरित्र निभाने वाले बुजुर्ग धनीराम गुप्ता बताते हैं कि शादीपुर के अतिरिक्त बरूकी, सिकेडा ,गनोरा सहित कई गांव के कलाकार भाग लेते थे। धीरे-धीरे गांव के कलाकार ही रामलीला में प्रतिभाग करने लगे।
मुस्लिम भी करते हैं सहयोग
रामलीला में गांव के ही मोहम्मद आबिद उर्फ अल्लाह कट्टा साधु वेशधारी रावण तथा कुंभकर्ण का चरित्र निभाते हैं। वह लगभग 30 वर्षों से रामलीला कमेटी से जुड़े हैं। रामलीला कमेटी में लक्ष्मण का चरित्र निभाने वाले नवाब अली कादरी ने गायकी में पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनी पहचान बनाई थी। रामलीला में गत 40 वर्षों से भौंदा कादरी ढोलक बजाते हैं।
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छोटे रोल करने वाले कलाकारों की है कमी
रामलीला में राम का चरित्र निभाने वाले सचिन मौर्य बताते हैं कि वर्तमान में छोटे रोल करने वाले कलाकारों की भारी कमी है। ग्राम शादीपुर की रामलीला में रावण का चरित्र निभाने वाले अमर सिंह उर्फ बबलू की पूरे क्षेत्र में रावण के नाम से ही पहचान है। लोग उन्हें रावण महाराज कहकर ही बुलाते हैं। अमर सिंह बताते हैं कि उन्होंने रावण का चरित्र निभाते हुए गल्ल मूंछ रख ली थी जो आज उनकी पहचान बन गई है। रामलीला में भरत का चरित्र निभाने वाले निखिल भारद्वाज बताते हैं कि राम के वियोग में रोना उन्हें भगवान राम के समीप लाता है। रामलीला के डायरेक्टर विकास कुमार बताते हैं कि पिछले दस-पंद्रह वर्षों से रामलीला में अभिनय कर रहे कलाकारों का विकल्प तलाशना पड़ रहा है। रामलीला में शूर्पणखा तथा सुलोचना के महिला चरित्र निभाने वाले कलाकार कमल कश्यप बताते हैं कि आजकल रामलीला में महिला चरित्र निभाने के लिए कलाकार नहीं मिल पाते।
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बिजनौर। देश में रामलीला की समृद्ध परंपरा रही है। राम के आदर्शों और उनके जीवन के संघर्षों को दर्शाने वाली रामलीला के लिए योगी सरकार ने पहल करते हुए कोविड गाइडलाइन को दृष्टिगत रखते हुए रामलीला कराने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय से रामलीला प्रेमी बेहद खुश हैं। जनपद की पुरानी रामलीला में से एक शादीपुर की रामलीला गत 64 वर्षों से निरंतर मंचित की जा रही है।
शादीपुर की रामलीला में ग्रामीण कलाकार ही प्रतिभाग करते हैं। रामलीला कमेटी के मैनेजर ब्रज बहादुर सिंह बताते हैं कि गांव में रामलीला की पुरानी परंपरा रही है। 1940 के आसपास गांव के मामराज सिंह ने एक नाटक कंपनी स्थापित की थी, जिसमें जनपद भर के कलाकार शामिल रहते थे। नाटक कंपनी द्वारा सुल्ताना डाकू ,भक्त प्रहलाद, रामायण तथा महाभारत के प्रसंग मंचित किए जाते थे। सन 1957 में नाटक कंपनी समाप्त हो गई और क्षेत्र के कलाकारों के साथ रामलीला का मंचन ग्राम शादीपुर में होने लगा। रामलीला में परशुराम का चरित्र निभाने वाले बुजुर्ग धनीराम गुप्ता बताते हैं कि शादीपुर के अतिरिक्त बरूकी, सिकेडा ,गनोरा सहित कई गांव के कलाकार भाग लेते थे। धीरे-धीरे गांव के कलाकार ही रामलीला में प्रतिभाग करने लगे।
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मुस्लिम भी करते हैं सहयोग
रामलीला में गांव के ही मोहम्मद आबिद उर्फ अल्लाह कट्टा साधु वेशधारी रावण तथा कुंभकर्ण का चरित्र निभाते हैं। वह लगभग 30 वर्षों से रामलीला कमेटी से जुड़े हैं। रामलीला कमेटी में लक्ष्मण का चरित्र निभाने वाले नवाब अली कादरी ने गायकी में पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनी पहचान बनाई थी। रामलीला में गत 40 वर्षों से भौंदा कादरी ढोलक बजाते हैं।
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छोटे रोल करने वाले कलाकारों की है कमी
रामलीला में राम का चरित्र निभाने वाले सचिन मौर्य बताते हैं कि वर्तमान में छोटे रोल करने वाले कलाकारों की भारी कमी है। ग्राम शादीपुर की रामलीला में रावण का चरित्र निभाने वाले अमर सिंह उर्फ बबलू की पूरे क्षेत्र में रावण के नाम से ही पहचान है। लोग उन्हें रावण महाराज कहकर ही बुलाते हैं। अमर सिंह बताते हैं कि उन्होंने रावण का चरित्र निभाते हुए गल्ल मूंछ रख ली थी जो आज उनकी पहचान बन गई है। रामलीला में भरत का चरित्र निभाने वाले निखिल भारद्वाज बताते हैं कि राम के वियोग में रोना उन्हें भगवान राम के समीप लाता है। रामलीला के डायरेक्टर विकास कुमार बताते हैं कि पिछले दस-पंद्रह वर्षों से रामलीला में अभिनय कर रहे कलाकारों का विकल्प तलाशना पड़ रहा है। रामलीला में शूर्पणखा तथा सुलोचना के महिला चरित्र निभाने वाले कलाकार कमल कश्यप बताते हैं कि आजकल रामलीला में महिला चरित्र निभाने के लिए कलाकार नहीं मिल पाते।

रामलीला कलाकार बृज बहादुर सिंह।- फोटो : BIJNOR

रामलीला कलाकार कमल कश्यप।- फोटो : BIJNOR

रामलीला कलाकार अमर सिंह।- फोटो : BIJNOR

रामलीला कलाकार विकास कुमार।- फोटो : BIJNOR

रामलीला कलाकार सचिन मौर्य।- फोटो : BIJNOR

रामलीला कलाकार निखिल भारद्वाज।- फोटो : BIJNOR