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सूकरो पुल का एक और पिलर क्षतिग्रस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Tue, 13 Sep 2016 11:52 PM IST
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नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सूकरो नदी पर बने रेलवे पुल का दूसरा पिलर भी हुआ क्षतिग्रस्त।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में कोटद्वार ब्रांच लाइन पर ध्वस्त रेलवे पुल का एक और पिलर क्षतिग्रस्त हो गया। पिलर के क्षतिग्रस्त होने से रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है। 15 अक्टूबर से ब्रांच लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू कराने की रेलवे अधिकारियों की कोशिशों को झटका लग गया है।
नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर सूकरो नदी पर बने रेलवे पुल का एक पिलर 23 जुलाई 2016 को ध्वस्त हो गया था। रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता से हादसा टलने के बाद से ब्रांच लाइन पर रेलों का संचालन अब तक ठप है। निर्माण इकाई अभी नजीबाबाद दिशा से ध्वस्त हुए चौथे पिलर का निर्माण शुरू ही नहीं करा पाई थी। इस बीच मंगलवार तड़के नजीबाबाद दिशा से पहला पिलर सूकरो नदी के तेज उफान की भेंट चढ़ गया। इस घटना के बारे में मंगलवार की सुबह पांच बजे सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एडीईएन सीताराम ने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ रेलवे पुल क्षेत्र में पहुंचकर निरीक्षण किया। एडीईएन की सूचना पर प्रवर मंडल अभियंता पारितोष गौतम टीम के साथ मौके पर पहुंच जानकारी ली।
नहीं चेते रेलवे अधिकारी
सूकरो नदी में उफान आया तो रेल पुल के तीन और स्पान को खतरा बढ़ जाएगा। अमर उजाला ने 24 जुलाई के अंक में रेलवे को आगाह किया था। दो माह भी नहीं बीते कि एक और पिलर नदी में आए उफान की भेंट चढ़ गया। नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर 23 जुलाई से ठप रेल संचालन 15 अक्तूबर से शुरू करने का रेल प्रशासन का दावा अब असंभव हो गया है।
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कोटद्वार ब्रांच लाइन के रेल संचालन को सूकरो नदी के विकराल रूप ने अस्त-व्यस्त कर दिया है। 1860 मे निर्मित सूकरो नदी पर बने रेल पुल को पहला झटका नजीबाबाद दिशा से चौथे पिलर के ध्वस्त होने के साथ लगा।
हालांकि रेलकर्मी की सतर्कता से जनहानि के साथ रेल संपत्ति को बड़ा झटका नहीं लग पाया। मंगलवार तड़के नजीबाबाद दिशा से पहला पिलर भी नदी की उफान की भेंट चढ़ गया। हालांकि रेलवे ने इस पिलर को क्रेन के जरिये पुन: स्थापित कर मरम्मत की योजना बनाई है। यह योजना खतरे से खाली नहीं दिखाई देती।
अन्य दो पिलर भी किसी भी वक्त नदी के विकराल रूप की भेंट चढ़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि रेलवे के तकनीकी अधिकारी कितनी जल्दी नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन को सुरक्षित रेल संचालन दे सकेंगे।
रेल अफसर खतरे की ट्रेन चलाने के मूड में
कोटद्वार ब्रांच लाइन पर रेलवे पुल का एक और पिलर क्षतिग्रस्त होने से महकमे के अधिकारियों में अफरातफरी का आलम है। यात्रियों की जान जोखिम में है। तकनीकी अधिकारियों ने अब दूसरे क्षतिग्रस्त पिलर को क्रेन के जरिये सीधा कर खतरों की ट्रेन चलाने का मन बनाया है। इससे यात्रियों की की मुसीबतें काफी बढ़ गई है।
सूकरो नदी ने इस वर्ष जिस तरह से रेलवे पुल के नीचे खतरनाक कटान किया है, उससे रेल पुल के अन्य पिलर भी सुरक्षा की दृष्टि से खतरे के दायरे में आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन रेल संपत्ति और जनहानि को रोकने के लिए क्या नए सिरे से रेलवे पुल का निर्माण कराता है। या रेलवे पिलरों की मरम्मत के साथ उसके ऊपर से ट्रेन गुजारकर चुनौती भरा निर्णय लेता है। पहली बार सूकरो नदी पर बना रेलवे पुल का पिलर क्षतिग्रस्त होने पर बड़ौदा हाउस से लेकर मंडल तक के रेल अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। मुआयना करने वालों में जीएम रेलवे, प्रिंसिपल इंजीनियर, डीआरएम मुरादाबाद, प्रवर मंडल अभियंता मुरादाबाद सहित अनेक तकनीकी अधिकारी पुल की मजबूती को लेकर ध्वस्त पुल क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं।
पांच सितंबर को बड़ौदा हाउस दिल्ली से आए प्रिंसिपल इंजीनियर आरके अग्रवाल ने तकनीकी अधिकारियों के साथ सूकरो पुल का निरीक्षण किया था। उन्होंने निर्माण इकाई को ध्वस्त पिलर का शीघ्र निर्माण कराकर 15 अक्तूबर 2016 से रेलों का आवागमन पुन: शुरू कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन फिर दूसरा पिलर टूटने से उम्मीद पर पानी फिर गया।
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नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर सूकरो नदी पर बने रेलवे पुल का एक पिलर 23 जुलाई 2016 को ध्वस्त हो गया था। रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता से हादसा टलने के बाद से ब्रांच लाइन पर रेलों का संचालन अब तक ठप है। निर्माण इकाई अभी नजीबाबाद दिशा से ध्वस्त हुए चौथे पिलर का निर्माण शुरू ही नहीं करा पाई थी। इस बीच मंगलवार तड़के नजीबाबाद दिशा से पहला पिलर सूकरो नदी के तेज उफान की भेंट चढ़ गया। इस घटना के बारे में मंगलवार की सुबह पांच बजे सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एडीईएन सीताराम ने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ रेलवे पुल क्षेत्र में पहुंचकर निरीक्षण किया। एडीईएन की सूचना पर प्रवर मंडल अभियंता पारितोष गौतम टीम के साथ मौके पर पहुंच जानकारी ली।
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नहीं चेते रेलवे अधिकारी
सूकरो नदी में उफान आया तो रेल पुल के तीन और स्पान को खतरा बढ़ जाएगा। अमर उजाला ने 24 जुलाई के अंक में रेलवे को आगाह किया था। दो माह भी नहीं बीते कि एक और पिलर नदी में आए उफान की भेंट चढ़ गया। नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर 23 जुलाई से ठप रेल संचालन 15 अक्तूबर से शुरू करने का रेल प्रशासन का दावा अब असंभव हो गया है।
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कोटद्वार ब्रांच लाइन के रेल संचालन को सूकरो नदी के विकराल रूप ने अस्त-व्यस्त कर दिया है। 1860 मे निर्मित सूकरो नदी पर बने रेल पुल को पहला झटका नजीबाबाद दिशा से चौथे पिलर के ध्वस्त होने के साथ लगा।
हालांकि रेलकर्मी की सतर्कता से जनहानि के साथ रेल संपत्ति को बड़ा झटका नहीं लग पाया। मंगलवार तड़के नजीबाबाद दिशा से पहला पिलर भी नदी की उफान की भेंट चढ़ गया। हालांकि रेलवे ने इस पिलर को क्रेन के जरिये पुन: स्थापित कर मरम्मत की योजना बनाई है। यह योजना खतरे से खाली नहीं दिखाई देती।
अन्य दो पिलर भी किसी भी वक्त नदी के विकराल रूप की भेंट चढ़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि रेलवे के तकनीकी अधिकारी कितनी जल्दी नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन को सुरक्षित रेल संचालन दे सकेंगे।
रेल अफसर खतरे की ट्रेन चलाने के मूड में
कोटद्वार ब्रांच लाइन पर रेलवे पुल का एक और पिलर क्षतिग्रस्त होने से महकमे के अधिकारियों में अफरातफरी का आलम है। यात्रियों की जान जोखिम में है। तकनीकी अधिकारियों ने अब दूसरे क्षतिग्रस्त पिलर को क्रेन के जरिये सीधा कर खतरों की ट्रेन चलाने का मन बनाया है। इससे यात्रियों की की मुसीबतें काफी बढ़ गई है।
सूकरो नदी ने इस वर्ष जिस तरह से रेलवे पुल के नीचे खतरनाक कटान किया है, उससे रेल पुल के अन्य पिलर भी सुरक्षा की दृष्टि से खतरे के दायरे में आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन रेल संपत्ति और जनहानि को रोकने के लिए क्या नए सिरे से रेलवे पुल का निर्माण कराता है। या रेलवे पिलरों की मरम्मत के साथ उसके ऊपर से ट्रेन गुजारकर चुनौती भरा निर्णय लेता है। पहली बार सूकरो नदी पर बना रेलवे पुल का पिलर क्षतिग्रस्त होने पर बड़ौदा हाउस से लेकर मंडल तक के रेल अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। मुआयना करने वालों में जीएम रेलवे, प्रिंसिपल इंजीनियर, डीआरएम मुरादाबाद, प्रवर मंडल अभियंता मुरादाबाद सहित अनेक तकनीकी अधिकारी पुल की मजबूती को लेकर ध्वस्त पुल क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं।
पांच सितंबर को बड़ौदा हाउस दिल्ली से आए प्रिंसिपल इंजीनियर आरके अग्रवाल ने तकनीकी अधिकारियों के साथ सूकरो पुल का निरीक्षण किया था। उन्होंने निर्माण इकाई को ध्वस्त पिलर का शीघ्र निर्माण कराकर 15 अक्तूबर 2016 से रेलों का आवागमन पुन: शुरू कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन फिर दूसरा पिलर टूटने से उम्मीद पर पानी फिर गया।