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Bijnor News: आंवले के कारोबार ने घोली जीवन में मिठास
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सतीश शर्मा
धामपुर। ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं रोजगार के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर रही हैं। गांव तीवड़ी के कृष्ण समूह की महिलाओं ने तीन साल पहले आंवला मुरब्बा, आंवला कैंडी और अन्य उत्पादों का कारोबार शुरू किया था। अब निरंतर विकास की उड़ान भर रहा है। छह लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर हो रहा है। महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है।
ब्लॉक क्षेत्र में मिशन अंतर्गत करीब 1743 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। करीब 19,500 से अधिक महिलाएं समूहों में शामिल होकर रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। गांव तीवड़ी में कृष्ण स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तीन साल पहले आंवला कैंडी, मुरब्बा, अचार आदि उत्पादों को तैयार कर बाजार में उतारा था। समूह सदस्य शिखा राजपूत, सोनम, समला, वर्षा रानी, उमा देवी, बाला देवी, सोनी, पंचाक्षरी, भाग्य देवी आदि का कहना है कि जब काम शुरू किया था तब आर्थिक स्थिति सामान्य थी। पांच हजार से कारोबार चालू किया था। डर था कि काम चलेगा या नहीं। उन्होंने मिशन से 1.10 लाख रुपये का लोन लिया। प्रशिक्षण के बाद मेहनत की तो कारोबार को विकास के पंख लग गए। अब समूह छह लाख रुपये से अधिक का वार्षिक टर्नओवर कर रहा है। पहले समूह में 13 महिलाएं शामिल थीं, जो अब बढ़कर 25 हो गई हैं।
ब्लॉक की ब्लॉक मिशन प्रबंधक सानुमति चौहान का कहना है कि उनके ब्लॉक में सभी समूह बेहतर ढंग से कार्य कर रहे हैं।
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धामपुर। ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं रोजगार के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर रही हैं। गांव तीवड़ी के कृष्ण समूह की महिलाओं ने तीन साल पहले आंवला मुरब्बा, आंवला कैंडी और अन्य उत्पादों का कारोबार शुरू किया था। अब निरंतर विकास की उड़ान भर रहा है। छह लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर हो रहा है। महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है।
ब्लॉक क्षेत्र में मिशन अंतर्गत करीब 1743 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। करीब 19,500 से अधिक महिलाएं समूहों में शामिल होकर रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। गांव तीवड़ी में कृष्ण स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तीन साल पहले आंवला कैंडी, मुरब्बा, अचार आदि उत्पादों को तैयार कर बाजार में उतारा था। समूह सदस्य शिखा राजपूत, सोनम, समला, वर्षा रानी, उमा देवी, बाला देवी, सोनी, पंचाक्षरी, भाग्य देवी आदि का कहना है कि जब काम शुरू किया था तब आर्थिक स्थिति सामान्य थी। पांच हजार से कारोबार चालू किया था। डर था कि काम चलेगा या नहीं। उन्होंने मिशन से 1.10 लाख रुपये का लोन लिया। प्रशिक्षण के बाद मेहनत की तो कारोबार को विकास के पंख लग गए। अब समूह छह लाख रुपये से अधिक का वार्षिक टर्नओवर कर रहा है। पहले समूह में 13 महिलाएं शामिल थीं, जो अब बढ़कर 25 हो गई हैं।
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ब्लॉक की ब्लॉक मिशन प्रबंधक सानुमति चौहान का कहना है कि उनके ब्लॉक में सभी समूह बेहतर ढंग से कार्य कर रहे हैं।