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अमर उजाला अभियान : मित्रसेन की जोहड़ी में इतना भरा कीचड़, खिल गए कमल

Thu, 12 May 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 11:48 PM IST
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Amar Ujala Campaign: So much mud filled in Mitrasen's johri, lotus blossomed
चांदपुर के झारखंडी मंदिर का तालाब। - फोटो : BIJNOR
अमर उजाला अभियान : मित्रसेन की जोहड़ी में इतना भरा कीचड़, खिल गए कमल
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बिजनौर। जिले में तालाबों की नजरअंदाजी इस कदर हुई कि कई पौराणिक तालाब की हालात बदतर हो गई। धीरे-धीरे गंदगी, पानी से तालाब अपना अस्तित्व ही खोने लगे। चांदपुर के पास बाबा झारखंड शिवमंदिर के सामने बने मित्रसेन के तालाब का हाल खराब है। तालाब में गंदा पानी और कीचड़ इतना भरा कि अब पूरे तालाब में कमल खिलते नजर आते हैं। तालाब के बीच में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु के मंदिर तक पहुंचने के लिए ऊंचा रास्ता बनाया गया है।
चांदपुर से करीब दो किलोमीटर दूर स्याऊ-छाछरी मार्ग पर स्थित बाबा झारखंड शिव मंदिर प्राचीन है। इसका इतिहास काफी 500 साल पुराना बताया जाता है, इसी मंदिर के सामने मित्रसेन तालाब इससे भी पुराना है। साल में दो बार सावन की शिवरात्रि और फाल्गुन की महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु हरिद्वार से कांवड़ में इस मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। प्रत्येक सोमवार को मंदिर पर मेला जैसा माहौल बन जाता है। मंदिर परिसर में करीब 32 बीघा झील के बीच में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु लक्ष्मी मंदिर है। श्री हनुमान मंदिर, मां दुर्गा मंदिर, सरभंग बाबा की समाधि, शिव परिवार मंदिर, मोनीबाबा की समाधि, यज्ञ शाला, शनि देवता मंदिर, गायत्री माता मंदिर, विशाल पीपल देवता वृक्ष, वट देवता वृक्ष मौजूद हैं। तालाब की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे इसमें गंदा पानी जाने लगा और यह पवित्र तालाब कीचड़ से अट गया। हालांकि कई दशकों से इस कीचड़ में कमल खिलते हैं।
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राजा मित्रसेन से जोड़कर देखते हैं तालाब का नाम
बाबा झारखंड मंदिर के सामने स्थित तालाब को पूरे क्षेत्र में मित्रसेन की जोहड़ी कहकर पुकारा जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि राजा मित्रसेन के नाम पर इस तालाब का नाम है। हालांकि इसे लेकर कोई पुष्ट दस्तावेज किसी के पास नहीं है। इस तालाब से आधा किलोमीटर दूर गांव सैंदवार स्थित है। कहा जाता है कि महाभारत काल में यह हस्तिनापुर राज्य की सैनिक छावनी हुआ करता था। वहीं पर द्रोणाचार्य का आश्रम भी था। जहां कौरव और पांडवों ने सैन्य शिक्षा हासिल की थी।
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इस तालाब का जल्द निरीक्षण किया जाएगा। इसी सप्ताह ऐसे पौराणिक तालाबों को चिह्नित कर कार्ययोजना बनाई जाएगी - श्याम बहादुर शर्मा, एएमए, जिला पंचायत
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