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अमर उजाला अभियान - जहां सालभर रहता था पानी, वहां अब उगी है घास
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बिजनौर के कस्बा झालू के झारखंडी मंदिर के सूखे तालाब में उगी खरपतबार।
- फोटो : BIJNOR
अमर उजाला अभियान - जहां सालभर रहता था पानी, वहां अब उगी है घास
बिजनौर। प्राचीन झारखंडी मंदिर के तालाब अब सिर्फ बरसात में ही भर पाता है। गर्मी आते आते ही पानी सूख जाता है। सैकड़ों साल पुराने तालाब की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि 60 से 70 साल पहले तक यह तालाब साल भर पानी से लबालब रहता था। जिसमें लोग स्नान करते थे। अब तालाब सूख गया है और इसमें तमाम खरपतवार, आक के पौधे उग रहे हैं।
गांव खारी और धर्मपुरा के बीच भगवान शिव का प्राचीन झारखंडी मंदिर है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग एतिहासिक और स्वयंभू है। इसी मंदिर परिसर में करीब पांच बीघा में फैला हुआ तालाब अब पानी को तरस रहा है। बरसात बीत जाने के बाद से ही इसमें पानी सूखने लगता है। गर्मी आने पर तालाब रेतीली जमीन में तब्दील हो जाता है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हालांकि धर्मपुरा पंचायत ने नरेगा के तहत इसे कब्जा मुक्त कराते हुए खोदाई करवा दी थी। तालाब का जीर्णोद्धार तो हुआ लेकिन पानी भरने की व्यवस्था नहीं बन सकी। सिर्फ बरसात में ही कुछ पानी इकट्ठा हो पाता है।
तालाब में स्नान के बाद करते थे मंदिर में पूजा
मंदिर कमेटी के सूरज सिंह बताते हैं कि उनके बुजुर्ग इस तालाब का जिक्र किया करते थे। पूजा पाठ करने वाले लोग तालाब में स्नान करते थे। वहीं अंतिम संस्कार से लौटने वाले लोग भी इस तालाब में स्नान कर गांव में प्रवेश किया करते थे। कभी यह तालाब साल भर पानी से भरा रहता था। अब सिर्फ बरसात में ही कुछ पानी जमा हो पाता है। उन्होंने बताया कि उनकी याद में कभी इस तालाब में पानी साल भर तक नहीं भरा रहा।
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हम इस तालाब का निरीक्षण करेंगे। इसके जीर्णोद्धार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। - श्याम बहादुर सिंह, एएमए, जिला पंचायत
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बिजनौर। प्राचीन झारखंडी मंदिर के तालाब अब सिर्फ बरसात में ही भर पाता है। गर्मी आते आते ही पानी सूख जाता है। सैकड़ों साल पुराने तालाब की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि 60 से 70 साल पहले तक यह तालाब साल भर पानी से लबालब रहता था। जिसमें लोग स्नान करते थे। अब तालाब सूख गया है और इसमें तमाम खरपतवार, आक के पौधे उग रहे हैं।
गांव खारी और धर्मपुरा के बीच भगवान शिव का प्राचीन झारखंडी मंदिर है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग एतिहासिक और स्वयंभू है। इसी मंदिर परिसर में करीब पांच बीघा में फैला हुआ तालाब अब पानी को तरस रहा है। बरसात बीत जाने के बाद से ही इसमें पानी सूखने लगता है। गर्मी आने पर तालाब रेतीली जमीन में तब्दील हो जाता है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हालांकि धर्मपुरा पंचायत ने नरेगा के तहत इसे कब्जा मुक्त कराते हुए खोदाई करवा दी थी। तालाब का जीर्णोद्धार तो हुआ लेकिन पानी भरने की व्यवस्था नहीं बन सकी। सिर्फ बरसात में ही कुछ पानी इकट्ठा हो पाता है।
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तालाब में स्नान के बाद करते थे मंदिर में पूजा
मंदिर कमेटी के सूरज सिंह बताते हैं कि उनके बुजुर्ग इस तालाब का जिक्र किया करते थे। पूजा पाठ करने वाले लोग तालाब में स्नान करते थे। वहीं अंतिम संस्कार से लौटने वाले लोग भी इस तालाब में स्नान कर गांव में प्रवेश किया करते थे। कभी यह तालाब साल भर पानी से भरा रहता था। अब सिर्फ बरसात में ही कुछ पानी जमा हो पाता है। उन्होंने बताया कि उनकी याद में कभी इस तालाब में पानी साल भर तक नहीं भरा रहा।
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हम इस तालाब का निरीक्षण करेंगे। इसके जीर्णोद्धार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। - श्याम बहादुर सिंह, एएमए, जिला पंचायत