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कार्बेट से कम नहीं बिजनौर की अमानगढ़ रैंज
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अमानगढ़ टूरिज्म जोन।
- फोटो : BIJNOR
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कार्बेट से कम नहीं बिजनौर की अमानगढ़ रैंज
बिजनौर। प्रकृति एवं वन्य प्राणियों में रुचि रखने वाले लोग कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान जाते हैं। लेकिन बिजनौर का अमानगढ़ भी कार्बेट से कम नहीं है। वहां भीड़ बहुत है। कार्बेट जाने वालों को रिजर्वेशन कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है, लेकिन बिजनौर में ऐसा कुछ नहीं है। आप कार्बेट घूमने जाने के इच्छुक हैं तो बिजनौर आएं। बिजनौर बहुत शांत जिला है। यहां दूर तक फैली हरियाली मिलेगी। इसके अलावा पक्षी, हिरन, खरगोश देखने के लिए मिलेंगे।
यहां शहर कम हैं गांव ज्यादा। शहर भी हैं तो गांव जैसे सबकी आबादी प्राय: एक लाख के आसपास है। शहर हैं तो छोटे, वह भी गांव जैसे। जनपद में पांच तहसील मुख्यालय हैं। एक तरह से देहात ही कहो। कार्बेट उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से मिलकर बना है। बिजनौर का अमानगढ़ वन कार्बेट में आता था। यह कार्बेट का बफर जोन था। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अलग हुए। संपत्ति के बंटवारे में कार्बेट का बफर जोन अमानगढ़ वापस बिजनौर केे मिल गया। कई बार उत्तर प्रदेश सरकार की घोषणाएं आईं कि इसे मिनी कार्बेट के रूप में विकसित किया जाएगा। किंतु कुछ हुआ नहीं।
कार्बेट से अलग हुआ वन अमानगढ़ नाम से जाना जाता है। यहां डाक बंगले में दो वीआईपी सूट हैं। जनपद के दौरे पर आए प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी यहां प्राय: जाते हैं। यहां की प्रकृति का अवलोकन करते हैं। सरकारी स्तर पर तो इसको पर्यटन स्थल के रूप में कुछ नहीं मिला, लेकिन यहां पिछले दिनों आए प्रभागीय निदेशक के प्रवीण राव ने इसे पर्यटन के लिए खोल दिया। 95 स्क्वायर किलो मीटर में फैले इस वन में वह सब वन्य प्राणी मिल जाते हैं जो कार्बेट में हैं। क्योंकि लोगों को इसकी जानकारी नहीं, इसलिए यहां रिजर्वेशन का कोई ज्यादा झंझट नहीं है। बिजनौर एवं उत्तराखंड की सीमा को कंडी रोड निर्धारित करती है। इस मार्ग का आधा भाग बिजनौर में है तो आधा कार्बेट में है।
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इस मार्ग से कुछ फर्लांग के फासले पर कार्बेट का प्रसिद्ध झिरना डाक बंगला है। कंडी रोड पर कार्बेट में आए सैलानी प्राय: घूमते मिल जाते हैं। कालागढ़ से कुछ दूर एक होटल भी बन गया है। बिजनौर जनपद बहुत सस्ता है। यहां 1500 रुपये प्रतिदिन के आसपास होटल में एसी कमरा मिल जाता है। बिजनौर के अमानगढ़ घूमने आने का लाभ यह भी है कि यहां कालागढ़ डैम भी है। कालागढ़ डैम एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का डैम है। यहां बिजली घर भी है, जो देखने योग्य जगह है।
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बिजनौर। प्रकृति एवं वन्य प्राणियों में रुचि रखने वाले लोग कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान जाते हैं। लेकिन बिजनौर का अमानगढ़ भी कार्बेट से कम नहीं है। वहां भीड़ बहुत है। कार्बेट जाने वालों को रिजर्वेशन कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है, लेकिन बिजनौर में ऐसा कुछ नहीं है। आप कार्बेट घूमने जाने के इच्छुक हैं तो बिजनौर आएं। बिजनौर बहुत शांत जिला है। यहां दूर तक फैली हरियाली मिलेगी। इसके अलावा पक्षी, हिरन, खरगोश देखने के लिए मिलेंगे।
यहां शहर कम हैं गांव ज्यादा। शहर भी हैं तो गांव जैसे सबकी आबादी प्राय: एक लाख के आसपास है। शहर हैं तो छोटे, वह भी गांव जैसे। जनपद में पांच तहसील मुख्यालय हैं। एक तरह से देहात ही कहो। कार्बेट उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से मिलकर बना है। बिजनौर का अमानगढ़ वन कार्बेट में आता था। यह कार्बेट का बफर जोन था। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अलग हुए। संपत्ति के बंटवारे में कार्बेट का बफर जोन अमानगढ़ वापस बिजनौर केे मिल गया। कई बार उत्तर प्रदेश सरकार की घोषणाएं आईं कि इसे मिनी कार्बेट के रूप में विकसित किया जाएगा। किंतु कुछ हुआ नहीं।
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कार्बेट से अलग हुआ वन अमानगढ़ नाम से जाना जाता है। यहां डाक बंगले में दो वीआईपी सूट हैं। जनपद के दौरे पर आए प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी यहां प्राय: जाते हैं। यहां की प्रकृति का अवलोकन करते हैं। सरकारी स्तर पर तो इसको पर्यटन स्थल के रूप में कुछ नहीं मिला, लेकिन यहां पिछले दिनों आए प्रभागीय निदेशक के प्रवीण राव ने इसे पर्यटन के लिए खोल दिया। 95 स्क्वायर किलो मीटर में फैले इस वन में वह सब वन्य प्राणी मिल जाते हैं जो कार्बेट में हैं। क्योंकि लोगों को इसकी जानकारी नहीं, इसलिए यहां रिजर्वेशन का कोई ज्यादा झंझट नहीं है। बिजनौर एवं उत्तराखंड की सीमा को कंडी रोड निर्धारित करती है। इस मार्ग का आधा भाग बिजनौर में है तो आधा कार्बेट में है।
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इस मार्ग से कुछ फर्लांग के फासले पर कार्बेट का प्रसिद्ध झिरना डाक बंगला है। कंडी रोड पर कार्बेट में आए सैलानी प्राय: घूमते मिल जाते हैं। कालागढ़ से कुछ दूर एक होटल भी बन गया है। बिजनौर जनपद बहुत सस्ता है। यहां 1500 रुपये प्रतिदिन के आसपास होटल में एसी कमरा मिल जाता है। बिजनौर के अमानगढ़ घूमने आने का लाभ यह भी है कि यहां कालागढ़ डैम भी है। कालागढ़ डैम एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का डैम है। यहां बिजली घर भी है, जो देखने योग्य जगह है।