बिजनौर में प्रदेश के पर्यटन सर्किट में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व को जगह मिल गई है। अब प्रशासन ने इसी तर्ज पर जिले के ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन सर्किट में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। अमानगढ़ के बाद जिले के अन्य पर्यटक स्थलों के पास भी विकास कराया जाएगा।
Bijnor: यूपी के पर्यटन सर्किट में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व को मिली जगह, अन्य पर्यटक स्थलों पर कराया जाएगा विकास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कण्व ऋषि आश्रम: यह जगह ग्राम रावली के पास गंगा और मालन के संगम पर स्थित है। यहां पर वाटिका तैयार की गई है। इसके अलावा कण्व ऋषि सरोवर, प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र आदि खोले जा रहे हैं। राजा दुष्यंत और शकुंतला की इस प्रणय स्थली को भी पर्यटन सर्किट में जगह मिलेगी।
अमानगढ़ टाइकर रिजर्व: अमानगढ़ हाथियों और टाइगर के लिए जाना जाता है। यहां पर 27 से ज्यादा टाइगर और सौ से ज्यादा हाथी हैं। हाल ही में यहां पर्यटन भी शुरू हुआ है। इसके बहाने जिले के अन्य स्थलों से भी लोगों को परिचित कराया जाएगा।
पत्थरगढ़ का किला: नजीबाबाद में पत्थरगढ़ का किला, जिसे लोग सुल्ताना डाकू के किले के रूप से भी जानते हैं। यह ऐतिहासिक किला है, जिसे देखने आज भी लोग जाते हैं। यहां आने जाने के लिए व्यवस्थाएं होंगी तो यह भी बेहतर जगह साबित होगी।
पीलीडैम, हरेवली डैम, रैनी फॉरेस्ट: यह तीनों ही जगह सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के लिए जानी जाती हैं। यहां पर हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इन क्षेत्रों में भी पर्यटन सर्किट में शामिल किया जाएगा।
विदुरकुटी: दारानगर गंज के पास महात्मा विदुर का मंदिर और कुटी है। यहां पर मंदिर और वृद्धाश्रम, पुस्तकालय बना हुआ है। महाभारत काल में कौरवों का 56 भोग छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण यहां आ गए थे और महात्मा विदुर द्वारा बनाया बथुए का साग खाया था। यह ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल बिजनौर को अलग पहचान दिलाएगा। इसलिए यहां भी कई कार्य कराए जा रहे हैं।
पर्यटक स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बेहतर होगी : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि अमानगढ़ प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में पर्यटन के मानचित्र पर अलग पहचान बनाएगा। इसके अलावा जिले में अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। इसलिए पूरे पर्यटन सर्किट पर काम चल रहा है। इन जगहों को जोड़ने वाले मार्ग बेहतर होंगे। इनके आसपास के करीब 12 गांवों को इको टूरिज्म विलेज के रूप में भी विकसित किया जाएगा। जिलेभर का पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।