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यज्ञ के बाद मनेगी दुल्हैंडी
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यज्ञ के बाद मनेगी दुल्हैंडी
बिजनौर। होली पर गांव स्वाहेड़ी में वैदिक मंत्र गूंजते हैं। बुजुर्गों के साथ युवा भी यज्ञ में आहुति प्रदान करते हैं। इसके बाद ही रंग खेला जाता है। गांव के लोग शराब भी नहीं पीते हैं। गांव की रंग लगाने की परंपरा है माथे पर तिलक करना। पुराने लोगों के साथ युवा वर्ग भी इन संस्कारों को आत्मसात कर रहा है।
गांव स्वाहेड़ी के लोग पहले छोटी छोटी बातों पर ही आपस में लड़ते थे। गांव के युवा वर्ग भी लड़ाई झगड़ों में कूदने लगे थे। इसके बाद गांव के कुछ बुजुर्गों ने मिलकर गांव वालों को आर्य समाज से जोड़ा। हर त्यौहार पर यज्ञ कराने शुरू कराए। फरवरी में कई दिन चलने वाला यज्ञ शुरू किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और गांव में अब एकदम शांति है। होली पर गांव में सुबह से ही सामूहिक यज्ञ होता है। हर परिवार के लोग इस हवन में शामिल होते हैं। बुजुर्गों के साथ युवा वर्ग भी इस यज्ञ में हिस्सा लेता है।
यज्ञ में आहुति प्रदान करने के बाद सामूहिक भोज होता है। हवन में आहुति डालने वाला शराब को हाथ नहीं लगाता है। इसके बाद ही गांव में थोड़ी देर के लिए होली खेली जाती है और एक दूसरे के मस्तक पर तिलक लगाया जाता है। तीन दशक से यही परंपरा चली आ रही है। कोई हुड़दंग, शोर शराबा नहीं होता है। आर्य समाज से जुड़े विनोद कुमार, चरन सिंह, डा.विद्या सागर आर्य का कहना है कि गांव में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं करता है। गांव की परंपरा में अब वैदिक मंत्र समाहित हो चुके हैं।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया नारा
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश सबसे पहले गांव स्वाहेड़ी से ही दिया गया था। गांव में होने वाले यज्ञ में बेटियों को प्रमुख तौर से यज्ञमान बनाकर सम्मान दिया जाता है। बेटियों को बचाने और पढ़ाने की शपथ भी दिलाई जाती है।
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बिजनौर। होली पर गांव स्वाहेड़ी में वैदिक मंत्र गूंजते हैं। बुजुर्गों के साथ युवा भी यज्ञ में आहुति प्रदान करते हैं। इसके बाद ही रंग खेला जाता है। गांव के लोग शराब भी नहीं पीते हैं। गांव की रंग लगाने की परंपरा है माथे पर तिलक करना। पुराने लोगों के साथ युवा वर्ग भी इन संस्कारों को आत्मसात कर रहा है।
गांव स्वाहेड़ी के लोग पहले छोटी छोटी बातों पर ही आपस में लड़ते थे। गांव के युवा वर्ग भी लड़ाई झगड़ों में कूदने लगे थे। इसके बाद गांव के कुछ बुजुर्गों ने मिलकर गांव वालों को आर्य समाज से जोड़ा। हर त्यौहार पर यज्ञ कराने शुरू कराए। फरवरी में कई दिन चलने वाला यज्ञ शुरू किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और गांव में अब एकदम शांति है। होली पर गांव में सुबह से ही सामूहिक यज्ञ होता है। हर परिवार के लोग इस हवन में शामिल होते हैं। बुजुर्गों के साथ युवा वर्ग भी इस यज्ञ में हिस्सा लेता है।
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यज्ञ में आहुति प्रदान करने के बाद सामूहिक भोज होता है। हवन में आहुति डालने वाला शराब को हाथ नहीं लगाता है। इसके बाद ही गांव में थोड़ी देर के लिए होली खेली जाती है और एक दूसरे के मस्तक पर तिलक लगाया जाता है। तीन दशक से यही परंपरा चली आ रही है। कोई हुड़दंग, शोर शराबा नहीं होता है। आर्य समाज से जुड़े विनोद कुमार, चरन सिंह, डा.विद्या सागर आर्य का कहना है कि गांव में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं करता है। गांव की परंपरा में अब वैदिक मंत्र समाहित हो चुके हैं।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया नारा
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश सबसे पहले गांव स्वाहेड़ी से ही दिया गया था। गांव में होने वाले यज्ञ में बेटियों को प्रमुख तौर से यज्ञमान बनाकर सम्मान दिया जाता है। बेटियों को बचाने और पढ़ाने की शपथ भी दिलाई जाती है।