{"_id":"5f6f8e558ebc3e9b8978ffca","slug":"after-a-long-time-the-farmers-mobilized-on-some-issue-bijnor-news-mrt5032692185","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसान संगठन एकजुट, किसानों की बढ़ी ताकत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसान संगठन एकजुट, किसानों की बढ़ी ताकत
विज्ञापन
बिजनौर। केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि अध्यादेशों को लेकर सारे कृषि संगठन लामबंद हो गए हैं। सब एक सुर में इन अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं। कृषि अध्यादेशों से किसानों को लेकर होने वाली राजनीति भी एक बार फिर से चमकने लगी है। किसान संगठनों के एक साथ लामबंद होने से किसानों की ताकत बढ़ गई है। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है कि किसानों ने केंद्र सरकार की किसी नीति के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया है।
जिले में किसान संगठन मजबूत स्थिति में हैं। भाकियू के अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, आजाद किसान यूनियन, भाकियू भानु, भाकियू अंबावता, भाकियू लोकशक्ति आदि का जिले में दबदबा है। सभी संगठन हमेशा किसानों के गन्ना भुगतान, किसानों को पेंशन दिलाने, बिजली की बढ़ी दर कम करने आदि को लेकर बयान और आंदोलन करते रहते हैं। स्थानीय मुद्दों को भी उठाते रहते हैं।
भाकियू के आंदोलनों की वजह से बिजनौर मिल को वर्तमान जगह से खत्म कर यहां कॉलोनी काटने का चड्ढ़ा ग्रुप का सपना पूरा नहीं हो सका तो खादर में भाकियू की वजह से ही पेंटून पुल की सौगात मिली। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने पैजनियां बिजलीघर में पांच एमवीए की जगह दस एमवीए का ट्रांसफार्मर लगवाया था, जिसमे सांसद, विधायक भी फेल हो गए थे। इसके अलावा बिजली के तीन फीडरों के सात फीडर कराए थे। इसमे 1.20 करोड़ रुपये लगे थे। इससे कई किसानों की लो वोल्टेज की समस्या खत्म हुुई। बाकी किसान संगठनों ने भी समय समय पर आंदोलन करके किसानों को गन्ना भुगतान दिलाया। पहले किसान संगठन स्थानीय समस्याओं पर ध्यान देते थे लेकिन अब किसान संगठन केंद्र की राजनीति पर भी नजर रख रहे हैं। कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कई संगठनों के एक ही दिन आंदोलन करने से किसान राजनीति चरम पर पहुंच गई है। अब तक सभी मुद्दों पर शांत बैठे विपक्षी भी इन अध्यादेशों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
किसान कहां बेचेेगा माल
आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के अनुसार पूंजीपति फसल का बिना बंदिश के स्टॉक करेगा। जब सरकार कोई माल खरीदेगी ही नहीं तो किसान माल कहां बेचेगा। किसान के पास स्टॉक की क्षमता नहीं है। इसके भविष्य में बहुत गंभीर परिणाम आएंगे। अनुबंध खेती में व्यापारी को अनुबंध में फसल के बिकने के समय फेरबदल का अधिकार दिया गया है। यह गलत है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम से अनाज गायब
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा के मुताबिक अध्यादेशों में अनाज, दलहन, तिलहन को आवश्यक वस्तु अधिनियम से अलग कर दिया गया है। न सरकार इन्हें खरीदेगी और न इनकी बिक्री पर नजर रखेगी। इससे किसान तबाह हो जाएगा।
किसानों से ऊपर रखे व्यापारी
भाकियू प्रवक्ता संदीप त्यागी के अनुसार कृषि अध्यादेशों में व्यापारियों को फसल स्टॉक की खुली छूट दी गई है। किसान को अध्यादेशों में पूंजीपतियों से नीचे रखा गया है। किसान के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी तक नहीं दी गई है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य चाहिए
भाकियू लोकशक्ति जिलाध्यक्ष वीर सिंह का कहना है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिकने की गारंटी नहीं दे रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के बिना कोई कानून किसान का फायदा नहीं कर सकता है।
मनमाने भंडारण से किसान को नुकसान
भाकियू अंबावता जिलाध्यक्ष विजय सिंह सहरावत का कहना है कि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री की गारंटी चाहिए। व्यापारी पहले मंडी में फसल में सब्जी स्टोर करेगा और फिर किसानों से आधे दाम पर फसल खरीदेगा।
नहीं हुआ शत प्रतिशत भुगतान
किसानों का पिछले पेराई सत्र का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। अब भी किसानों का 700 करोड़ रुपया चीनी मिलों पर बकाया है। बकाया भुगतान की किसान लगातार मांग कर रहे हैं। प्रशासन हर सप्ताह गन्ना भुुगतान की समीक्षा कर रहा है। किसान संगठन बकाया भुगतान ब्याज सहित दिलाने की मांग कर रहे हैं।
एक अक्तूबर से होगी धान की खरीद
अब प्रशासन धान की खरीद के लिए तैयारी शुरू करने की बात कर रहा है। एक अक्तूबर से क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू हो जाएगी। हालांकि अभी धान की फसल काफी समय मेें पककर कटेगी।
किसानों की मांग सही
भारतीय किसान संघ जिलाध्यक्ष धर्मपाल सिंह का कहना है कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की मांग एकदम सही है। पूंजीपतियों द्वारा फसलों के स्टॉक की एक सीमा तो होनी ही चाहिए।
विज्ञापन
जिले में किसान संगठन मजबूत स्थिति में हैं। भाकियू के अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, आजाद किसान यूनियन, भाकियू भानु, भाकियू अंबावता, भाकियू लोकशक्ति आदि का जिले में दबदबा है। सभी संगठन हमेशा किसानों के गन्ना भुगतान, किसानों को पेंशन दिलाने, बिजली की बढ़ी दर कम करने आदि को लेकर बयान और आंदोलन करते रहते हैं। स्थानीय मुद्दों को भी उठाते रहते हैं।
विज्ञापन
भाकियू के आंदोलनों की वजह से बिजनौर मिल को वर्तमान जगह से खत्म कर यहां कॉलोनी काटने का चड्ढ़ा ग्रुप का सपना पूरा नहीं हो सका तो खादर में भाकियू की वजह से ही पेंटून पुल की सौगात मिली। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने पैजनियां बिजलीघर में पांच एमवीए की जगह दस एमवीए का ट्रांसफार्मर लगवाया था, जिसमे सांसद, विधायक भी फेल हो गए थे। इसके अलावा बिजली के तीन फीडरों के सात फीडर कराए थे। इसमे 1.20 करोड़ रुपये लगे थे। इससे कई किसानों की लो वोल्टेज की समस्या खत्म हुुई। बाकी किसान संगठनों ने भी समय समय पर आंदोलन करके किसानों को गन्ना भुगतान दिलाया। पहले किसान संगठन स्थानीय समस्याओं पर ध्यान देते थे लेकिन अब किसान संगठन केंद्र की राजनीति पर भी नजर रख रहे हैं। कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कई संगठनों के एक ही दिन आंदोलन करने से किसान राजनीति चरम पर पहुंच गई है। अब तक सभी मुद्दों पर शांत बैठे विपक्षी भी इन अध्यादेशों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
किसान कहां बेचेेगा माल
आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के अनुसार पूंजीपति फसल का बिना बंदिश के स्टॉक करेगा। जब सरकार कोई माल खरीदेगी ही नहीं तो किसान माल कहां बेचेगा। किसान के पास स्टॉक की क्षमता नहीं है। इसके भविष्य में बहुत गंभीर परिणाम आएंगे। अनुबंध खेती में व्यापारी को अनुबंध में फसल के बिकने के समय फेरबदल का अधिकार दिया गया है। यह गलत है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम से अनाज गायब
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा के मुताबिक अध्यादेशों में अनाज, दलहन, तिलहन को आवश्यक वस्तु अधिनियम से अलग कर दिया गया है। न सरकार इन्हें खरीदेगी और न इनकी बिक्री पर नजर रखेगी। इससे किसान तबाह हो जाएगा।
किसानों से ऊपर रखे व्यापारी
भाकियू प्रवक्ता संदीप त्यागी के अनुसार कृषि अध्यादेशों में व्यापारियों को फसल स्टॉक की खुली छूट दी गई है। किसान को अध्यादेशों में पूंजीपतियों से नीचे रखा गया है। किसान के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी तक नहीं दी गई है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य चाहिए
भाकियू लोकशक्ति जिलाध्यक्ष वीर सिंह का कहना है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिकने की गारंटी नहीं दे रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के बिना कोई कानून किसान का फायदा नहीं कर सकता है।
मनमाने भंडारण से किसान को नुकसान
भाकियू अंबावता जिलाध्यक्ष विजय सिंह सहरावत का कहना है कि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री की गारंटी चाहिए। व्यापारी पहले मंडी में फसल में सब्जी स्टोर करेगा और फिर किसानों से आधे दाम पर फसल खरीदेगा।
नहीं हुआ शत प्रतिशत भुगतान
किसानों का पिछले पेराई सत्र का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। अब भी किसानों का 700 करोड़ रुपया चीनी मिलों पर बकाया है। बकाया भुगतान की किसान लगातार मांग कर रहे हैं। प्रशासन हर सप्ताह गन्ना भुुगतान की समीक्षा कर रहा है। किसान संगठन बकाया भुगतान ब्याज सहित दिलाने की मांग कर रहे हैं।
एक अक्तूबर से होगी धान की खरीद
अब प्रशासन धान की खरीद के लिए तैयारी शुरू करने की बात कर रहा है। एक अक्तूबर से क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू हो जाएगी। हालांकि अभी धान की फसल काफी समय मेें पककर कटेगी।
किसानों की मांग सही
भारतीय किसान संघ जिलाध्यक्ष धर्मपाल सिंह का कहना है कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की मांग एकदम सही है। पूंजीपतियों द्वारा फसलों के स्टॉक की एक सीमा तो होनी ही चाहिए।