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Bijnor News: अफजलगढ़ सिंचाई खंड के लेखाधिकारी तलब किए
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर को पश्चिमी यूपी में दूसरे सबसे बड़े खंड में गिना जाता है। मगर इस खंड पर अब गड़बड़झाले का दाग लग रहा है। दरअसल लेखाधिकारी ने अपने खंड में ही तैनात इंजीनियरों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कटान रोधी कार्य के बिलों में खनन सामग्री के फर्जी प्रपत्र होने की शिकायत कर डाली। इस मामले में मंगलवार को जांच अधिकारी के समझ लेखाधिकारी के बयान दर्ज किए जाएंगे।
लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल की ओर से दिए शिकायत पत्रों में अलग-अलग दो जांच चल रही हैं। अवैध खनन की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व के पास है जबकि फर्जी प्रपत्र लगाने की शिकायत की जांच सीडीओ कर रहे हैं। सीडीओ के समक्ष मंगलवार को लेखाधिकारी के बयान भी दर्ज होने हैं। बता दें कि नदियों और नालों में कराए जाने वाले कार्य के बिल अभियंता तैयार करते हैं जबकि उस पर लेखाधिकारी की संस्तुति भी जरूरी होती है।
बिलों को पास करने या नहीं करने को लेकर चल रहे मतभेदों की चिंगारी महीनों से सुलग रही थी, मगर तीन दिसंबर की शाम चिंगारी उस वक्त आग का रूप धारण कर लिया जब लेखाधिकारी और सहायक अभियंता के बीच मारपीट हो गई। मारपीट की यह घटना अधिशासी अभियंता के आवास पर हुई।
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हालांकि मारपीट के मामले में सहायक अभियंता प्रथम पवन कुमार ने एक जनवरी को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करा दी। रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि लेखाधिकारी ने ठेकेदारों से कमीशन दिलाने की बात कही, इनकार करने पर लेखाधिकारी ने उनके साथ मारपीट की। उधर, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने से पहले ही लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल से डीएम से बिलों में गड़बड़ी की शिकायत कर दी थी।
आरोप था कि कटान रोधी कार्य के बिलों में खनन सामग्री के फर्जी प्रपत्र लगाए गए हैं। इससे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को गुमराह ही नहीं किया गया बल्कि राजस्व की हानि भी पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि छह बिल बाढ़ रोधी कार्य के हैं जबकि पंद्रह बिल नाला सफाई आदि के हैं। वित्तीय अनियमितताओं के साथ साथ टेंडर मैनेज करने के भी आरोप हैं।
उधर, सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता लेखाधिकारी को हटाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल ने बताया कि वे इस मामले में मंगलवार को जांच अधिकारी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराएंगे।
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बिजनौर। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर को पश्चिमी यूपी में दूसरे सबसे बड़े खंड में गिना जाता है। मगर इस खंड पर अब गड़बड़झाले का दाग लग रहा है। दरअसल लेखाधिकारी ने अपने खंड में ही तैनात इंजीनियरों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कटान रोधी कार्य के बिलों में खनन सामग्री के फर्जी प्रपत्र होने की शिकायत कर डाली। इस मामले में मंगलवार को जांच अधिकारी के समझ लेखाधिकारी के बयान दर्ज किए जाएंगे।
लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल की ओर से दिए शिकायत पत्रों में अलग-अलग दो जांच चल रही हैं। अवैध खनन की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व के पास है जबकि फर्जी प्रपत्र लगाने की शिकायत की जांच सीडीओ कर रहे हैं। सीडीओ के समक्ष मंगलवार को लेखाधिकारी के बयान भी दर्ज होने हैं। बता दें कि नदियों और नालों में कराए जाने वाले कार्य के बिल अभियंता तैयार करते हैं जबकि उस पर लेखाधिकारी की संस्तुति भी जरूरी होती है।
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बिलों को पास करने या नहीं करने को लेकर चल रहे मतभेदों की चिंगारी महीनों से सुलग रही थी, मगर तीन दिसंबर की शाम चिंगारी उस वक्त आग का रूप धारण कर लिया जब लेखाधिकारी और सहायक अभियंता के बीच मारपीट हो गई। मारपीट की यह घटना अधिशासी अभियंता के आवास पर हुई।
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हालांकि मारपीट के मामले में सहायक अभियंता प्रथम पवन कुमार ने एक जनवरी को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज करा दी। रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि लेखाधिकारी ने ठेकेदारों से कमीशन दिलाने की बात कही, इनकार करने पर लेखाधिकारी ने उनके साथ मारपीट की। उधर, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने से पहले ही लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल से डीएम से बिलों में गड़बड़ी की शिकायत कर दी थी।
आरोप था कि कटान रोधी कार्य के बिलों में खनन सामग्री के फर्जी प्रपत्र लगाए गए हैं। इससे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को गुमराह ही नहीं किया गया बल्कि राजस्व की हानि भी पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि छह बिल बाढ़ रोधी कार्य के हैं जबकि पंद्रह बिल नाला सफाई आदि के हैं। वित्तीय अनियमितताओं के साथ साथ टेंडर मैनेज करने के भी आरोप हैं।
उधर, सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता लेखाधिकारी को हटाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। लेखाधिकारी उज्ज्वल कंसल ने बताया कि वे इस मामले में मंगलवार को जांच अधिकारी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराएंगे।