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Bijnor News: सिर पर रखी अंगारों से भरी कढ़ाई, मासूम की सांसें लौटकर नहीं आईं
Fri, 11 Jul 2025 11:44 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 11 Jul 2025 11:44 PM IST
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स्योहारा क्षेत्र के गांव चंचलपुर सांप के काटने के बाद में बच्चे राघव का झाड़फूक से इलाज कराते प
स्योहारा। घर में मोबाइल फोन देख रहे गांव चंचलपुर निवासी राघव (7) पुत्र प्रदीप कुमार को सांप ने डस लिया। परिजन पहले उसे झाड़फूंक करने वाले के पास ले गए और बाद में सीएचसी में दाखिल कराया। यहां से हायर सेंटर रेफर किया गया तो फिर झाड़फूंक करने वालों के पास लेकर चले गए, जहां उसके सिर पर अंगारों से भरी कढ़ाई रखी गई लेकिन बालक की मौत हो गई।
राघव को बृहस्पतिवार की दोपहर 1:30 बजे सांप ने डस लिया। परिजन उसे पहले ग्राम सरकड़ा में एक झाड़फूंक करने वाले के पास ले गए। आराम न होता देख लगभग तीन बजे स्योहारा सीएचसी लाए। यहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उसके बाद परिजन उसे जिला अस्पताल न ले जाकर हरेवली व ठाकुरद्वारा के गांव फसियापुर ले गए। वहां से भी आराम न मिलने पर रात आठ बजे घर ले आए।
पुत्र के जीवित होने की आस में फिर एक बार परिजन मुरादाबाद के गांव पाकबाड़ा ले गए, लेकिन सांस न आता देख रात में 12 बजे लौट आए। परिजनों के पास कोई उम्मीद नहीं बची थी। इसी बीच किसी ने गांव सरकड़ा में होने वाली झाड़फूंक के बारे में बताया। उम्मीद कर शुक्रवार सुबह आठ बजे परिजन उसे वहां ले गए। वहां स्थित मंदिर के पुजारी ने अनुष्ठान शुरू किया। अंगारों से भरी कढ़ाई बालक सिर पर कपड़ा बांधकर रखी, ताकि शरीर में गर्मी लौट सके।
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करीब तीन घंटे तक चली झाड़फूंक, मंत्र जाप और अनुष्ठान के बाद भी मासूम की सांसें नहीं लौट सकीं। पल्स मशीन से बार-बार जांच की गई, लेकिन शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। इस दौरान मां रो-रोकर भगवान से बेटे की जान की भीख मांगती रही। यह मंजर देख मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। दोपहर 11 बजे जब किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली तो अनुष्ठान रोक दिया गया और शव को गमगीन माहौल में घर ले जाया गया। बालक का पिता प्रदीप मजदूरी करता है। उसके तीन पुत्रों में राघव दूसरे नंबर का था। दोपहर को करीब 3:30 बजे रामगंगा घाट पर शव का जल प्रवाह कर दिया गया।
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राघव को बृहस्पतिवार की दोपहर 1:30 बजे सांप ने डस लिया। परिजन उसे पहले ग्राम सरकड़ा में एक झाड़फूंक करने वाले के पास ले गए। आराम न होता देख लगभग तीन बजे स्योहारा सीएचसी लाए। यहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उसके बाद परिजन उसे जिला अस्पताल न ले जाकर हरेवली व ठाकुरद्वारा के गांव फसियापुर ले गए। वहां से भी आराम न मिलने पर रात आठ बजे घर ले आए।
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पुत्र के जीवित होने की आस में फिर एक बार परिजन मुरादाबाद के गांव पाकबाड़ा ले गए, लेकिन सांस न आता देख रात में 12 बजे लौट आए। परिजनों के पास कोई उम्मीद नहीं बची थी। इसी बीच किसी ने गांव सरकड़ा में होने वाली झाड़फूंक के बारे में बताया। उम्मीद कर शुक्रवार सुबह आठ बजे परिजन उसे वहां ले गए। वहां स्थित मंदिर के पुजारी ने अनुष्ठान शुरू किया। अंगारों से भरी कढ़ाई बालक सिर पर कपड़ा बांधकर रखी, ताकि शरीर में गर्मी लौट सके।
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करीब तीन घंटे तक चली झाड़फूंक, मंत्र जाप और अनुष्ठान के बाद भी मासूम की सांसें नहीं लौट सकीं। पल्स मशीन से बार-बार जांच की गई, लेकिन शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। इस दौरान मां रो-रोकर भगवान से बेटे की जान की भीख मांगती रही। यह मंजर देख मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। दोपहर 11 बजे जब किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली तो अनुष्ठान रोक दिया गया और शव को गमगीन माहौल में घर ले जाया गया। बालक का पिता प्रदीप मजदूरी करता है। उसके तीन पुत्रों में राघव दूसरे नंबर का था। दोपहर को करीब 3:30 बजे रामगंगा घाट पर शव का जल प्रवाह कर दिया गया।