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नाव से फिसली ट्रैक्टर-ट्राली गंगा में समाई

Bijnor Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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मंडावर। गंगा पार जाते समय नाव के ऊपर से फिसलकर एक ट्रैक्टर-ट्राली गंगा में समा गई। ट्रैक्टर पर बैठे किसान ने गंगा में कूदकर किसी तरह जान बचाई।
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राजा रामपुर गांव निवासी किसान अर्जुन सिंह शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे ट्रैक्टर-ट्राली नाव में रखकर गंगा पार ले जा रहा था। जैसे ही वह किनारे पहुंचे कि अचानक नाव ढांग से टकराने पर ट्रैक्टर ट्राली पीछे की तरफ खिसककर गंगा में गिर गई। ट्रैक्टर गंगा में गिरता देख किसान कूद गया और तैरकर किसी तरह बाहर निकला, जबकि ट्रैक्टर-ट्राली गंगा में ही समा गई। जहां ट्रैैक्टर ट्राली गिरी, पानी की गहराई 25 से 30 मीटर थी। नाव में सवार कई लोग भी गंगा में गिरे, लेकिन सभी सकुशल बाहर निकल आए। पीड़ित किसान ने अन्य ट्रैक्टरों की मदद से शाम के समय गंगा में गिरे ट्रैक्टर-ट्राली बाहर निकलवाई। गौरतलब हो कि तीन दिन पूर्व भी गंगा पर कच्चा पुल टूटने से एक ट्रैक्टर-ट्राली गंगा में गिर गई थी।
पेट की आग बुझाने को जान जोखिम में!
बिजनौर। पेट की आग बुझाने के लिए खादर क्षेत्र के किसान जान जोखिम में डाल रहे हैं। रोटी के निवाले के लिए हर रोज मौत का खेल कब तक चलेगा? आखिर प्रशासन कब तक किसानों की अग्निपरीक्षा लेता रहेगा? ये महज सवाल नहीं बल्कि खादर क्षेत्र के पचास हजार किसानों की पीड़ा है, जिसकी कराह हर रोज कभी लकड़ी के कच्चे पुल टूटने तो कभी नाव के पलटने के बाद मौत के तांडव में गंगा की लहरों के बीच सुनाई देती है, लेकिन दशकों से इस कराह से न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों का दिल पसीजा है।
गंगा की धारा लगातार बदल रही है। दर्जनों गांव गंगा के पानी के कारण अपना अस्तित्व खो चुके हैं। गांव को छोड़कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ा। इस उठापठक में राजारामपुर, डैबलगढ़, सीमला कला, चाहड़वाला समेत रावली तक हजारों किसानों के खेत उनके घर से दूर हो गए। गंगा की धारा गांव और खेत के बीच बाधा बनकर खड़ी हो गई है। किसानों को खेत पर पहुंचने के लिए या तो नाव का सहारा लेना पड़ता है या फिर बरसात बीतने के बाद गंगा में पानी कम होने के बाद बनाए गए लकड़ी के कच्चे पुल के जरिये खेत पर पहुंचते हैं। बुआई करने के बाद से ही किसानों को फसल लाने की चिंता सताने लगती है। दो वर्ष सीमला कला में लकड़ी के पुल पर गन्ने की ट्राली लाते समय बालक शुभम की मौत हो गई थी, इससे पूर्व व बाद में भी कई लोगों को गंगा में डूबकर जान गंवानी पड़ी। लंबे समय से खादर क्षेत्र के किसान मांग करते चले आ रहे हैं कि गंगा की धारा को शुक्रताल की ओर घुमाया जाए। इसके अतिरिक्त गंगा पर पीपे का अस्थाई पुल बनवाया जाए, लेकिन इन किसानों की मांग पर न तो प्रशासन ही गंभीर है और न ही जनप्रतिनिधि। जलीलपुर की तरह अगर सीमलाकला क्षेत्र व रावली में पीपे का पुल बनवाया जाए तो किसानों की समस्या का समाधान हो सकता है। किसान भी पीपे के पुल को बनाने में आने वाले खर्च में सहयोग करने का तैयार हैं। किसान अरविंद, रतन, मगन, दौलतराम, वीरेंद्र, नंदपाल आदि का कहना है कि उन्हें आस है एक दिन जरूर प्रशासन व जनप्रतिनिधि अपने किसानों की पीड़ा को समझेंगे और पीपे का पुल बनवाएंगे।
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