{"_id":"48-46003","slug":"Bijnor-46003-48","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हुई अस्पताल में पैसे लेने वाले की पहचान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं हुई अस्पताल में पैसे लेने वाले की पहचान
Bijnor
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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बिजनौर। जिला अस्पताल में आपरेशन के नाम पर पैसे लेने वाले कर्मचारी की पहचान नहीं हुई है। एसडीएम सदर ने पैसे देने का आरोप लगवाने वाले तीमारदार के सामने अस्पताल कर्मचारियों की परेड करवाई। पहचान न होने पर डीएम ने रिपोर्ट स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी को भेज दी है।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने 21 नवंबर को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस समय बेड नंबर-36 पर मरीज परमेश्वरी देवी भर्ती थी। हाल चाल पूछने पर परमेश्वरी देवी के बेटे नेपाल सिंह ने परमेश्वरी के आपरेशन के नाम पर अस्पताल की एक महिला स्टाफ पर 3600 रुपये लेने का आरोप लगाया था। स्वास्थ्य मंत्री ने डीएम डा. सारिका मोहन से मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। डीएम ने यह जांच एसडीएम सदर को सौंपी थी। जांच के दौरान एसडीएम ने पैसे देने का आरोप लगवाने वाले तीमारदार नेपाल सिंह के सामने सभी कर्मचारियों को खड़ा करके आरोपी कर्मचारी की शिनाख्त करने को कहा। नेपाल सिंह ने कहा कि आरोपी इन कर्मचारियों में कोई नहीं है। डीएम डा. सारिका मोहन ने मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी को भेज दी है।
तो क्या बाहरी लोग करते हैं दलाली!
तीमारदार नेपाल ने स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी के सामने अस्पताल कर्मी को रिश्वत देने का आरोप लगाया था। अब प्रशभन उठता है कि यदि पैसे लेने वाली महिला जिला अस्पताल स्टाफ की नहीं थी, तो बाहरी लोग भी जिला अस्पताल में दलाली कर रहे हैं। यदि जिला अस्पताल में बाहरी लोग आकर मरीजों से पैसे वसूलते है, तो यह और भी गंभीर मामला है। अस्पताल प्रशासन की मौजूदगी में कोई महिला मरीज के तीमारदार से पैसे वसूल कर चली जाती है।
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स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने 21 नवंबर को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस समय बेड नंबर-36 पर मरीज परमेश्वरी देवी भर्ती थी। हाल चाल पूछने पर परमेश्वरी देवी के बेटे नेपाल सिंह ने परमेश्वरी के आपरेशन के नाम पर अस्पताल की एक महिला स्टाफ पर 3600 रुपये लेने का आरोप लगाया था। स्वास्थ्य मंत्री ने डीएम डा. सारिका मोहन से मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। डीएम ने यह जांच एसडीएम सदर को सौंपी थी। जांच के दौरान एसडीएम ने पैसे देने का आरोप लगवाने वाले तीमारदार नेपाल सिंह के सामने सभी कर्मचारियों को खड़ा करके आरोपी कर्मचारी की शिनाख्त करने को कहा। नेपाल सिंह ने कहा कि आरोपी इन कर्मचारियों में कोई नहीं है। डीएम डा. सारिका मोहन ने मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी को भेज दी है।
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तो क्या बाहरी लोग करते हैं दलाली!
तीमारदार नेपाल ने स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी के सामने अस्पताल कर्मी को रिश्वत देने का आरोप लगाया था। अब प्रशभन उठता है कि यदि पैसे लेने वाली महिला जिला अस्पताल स्टाफ की नहीं थी, तो बाहरी लोग भी जिला अस्पताल में दलाली कर रहे हैं। यदि जिला अस्पताल में बाहरी लोग आकर मरीजों से पैसे वसूलते है, तो यह और भी गंभीर मामला है। अस्पताल प्रशासन की मौजूदगी में कोई महिला मरीज के तीमारदार से पैसे वसूल कर चली जाती है।
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