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मिलाें की लेटलतीफी ने बिगाड़ा गणित
Bijnor
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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बिजनौर। चीनी मिलाें की लेट लतीफी ने गन्ना किसानों का गणित बिगाड़ दिया है। माना जा रहा है कि इस बार मिलों में पेराई सत्र देरी से शुरू होने से जिले में गेहूं की पछेती प्रजाति में करीब बीस प्रतिशत का इजाफा होगा। वहीं गन्ने की पछेती प्रजाति की बुआई लटकने की भ्ाी आश्ांका है।
बिजनौर जिले में तीन लाख से भी अधिक गन्ना किसान हैं। इनमें ज्यादातर किसान एक हेक्टेयर से कम जोत के हैं। जिले में गन्ने और गेहूं की फसल अधिक होती है। गन्ने की कटाई के बाद गेहूं की बुआई होती है और गेहूं कटने के बाद गन्ने की पछेती प्रजाति भी काफी मात्रा में बोई जाती है। मिलों का पेराई सत्र लगातार लेट हो रहा है। पहले जहां अक्तूबर में मिल चल जाती थी, वहीं अब मिलों का संचालन नवंबर के अंत में हो रहा है। मिल लेट चलने के कारण गन्ने के खेत खाली नहीं हो पा रहे हैं। कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं की अगेती प्रजाति 15 से 25 नवंबर के बीच बोई जाती है। जिले में गत वर्ष 1.20 लाख हेक्टेयर गेहूं का रकबा था। इसमें 60 प्रतिशत अगेती प्रजाति की बुआई हुई और 40 प्रतिशत पछेती की बुवाई हुई। शुगर मिल न चलने के कारण इस बार गेहूं की पछेती प्रजाति में बीस प्रतिशत की बढ़ोतरी होने के आसार हैं। जिले में धान की फसल से खाली हुई जमीन 50 हजार हेक्टेयर में अगेती प्रजाति के गेहूं की बुआई होगी। गन्ने के खेत में अगेती प्रजाति की बुआई इस बार कम होगी।
गेहूं की पछेती प्रजाति का आंकड़ा बढ़ने से गन्ने की पछेती बुआई भी प्रभावित होगी। गेहूं कटाई के बाद जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गन्ने की पछेती प्रजाति की बुआई होती है। गेहूं की अगेती प्रजाति फसल दस से बीस अप्रैल तक पक जाती है, जबकि पछेती मई तक तैयार होती है। मई में गन्ने की बुआई नहीं हो सकती है। नतीजा आगामी सत्र में गन्ने का रकबा भी प्रभावित होगा और धान का बढ़ेगा।
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उधर, उप कृषि निदेशक जसपाल भी मानते हैं कि मिलों के लेट चलने से गेहूं की अगेती प्रजाति का रकबा प्रभावित होगा और गेहूं पछेती प्रजाति का
अनुपात बढ़ेगा।
गन्ने के जमाव के लिए 15-28 डिग्री तापमान उचित माना जाता है, इससे कम या ज्यादा तापमान में गन्ना का जमाव ठीक नहीं होता । मई माह गन्ना बुवाई के लिए उचित नहीं है।
वीरेंद्र नाथ
वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक
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बिजनौर जिले में तीन लाख से भी अधिक गन्ना किसान हैं। इनमें ज्यादातर किसान एक हेक्टेयर से कम जोत के हैं। जिले में गन्ने और गेहूं की फसल अधिक होती है। गन्ने की कटाई के बाद गेहूं की बुआई होती है और गेहूं कटने के बाद गन्ने की पछेती प्रजाति भी काफी मात्रा में बोई जाती है। मिलों का पेराई सत्र लगातार लेट हो रहा है। पहले जहां अक्तूबर में मिल चल जाती थी, वहीं अब मिलों का संचालन नवंबर के अंत में हो रहा है। मिल लेट चलने के कारण गन्ने के खेत खाली नहीं हो पा रहे हैं। कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं की अगेती प्रजाति 15 से 25 नवंबर के बीच बोई जाती है। जिले में गत वर्ष 1.20 लाख हेक्टेयर गेहूं का रकबा था। इसमें 60 प्रतिशत अगेती प्रजाति की बुआई हुई और 40 प्रतिशत पछेती की बुवाई हुई। शुगर मिल न चलने के कारण इस बार गेहूं की पछेती प्रजाति में बीस प्रतिशत की बढ़ोतरी होने के आसार हैं। जिले में धान की फसल से खाली हुई जमीन 50 हजार हेक्टेयर में अगेती प्रजाति के गेहूं की बुआई होगी। गन्ने के खेत में अगेती प्रजाति की बुआई इस बार कम होगी।
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गेहूं की पछेती प्रजाति का आंकड़ा बढ़ने से गन्ने की पछेती बुआई भी प्रभावित होगी। गेहूं कटाई के बाद जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गन्ने की पछेती प्रजाति की बुआई होती है। गेहूं की अगेती प्रजाति फसल दस से बीस अप्रैल तक पक जाती है, जबकि पछेती मई तक तैयार होती है। मई में गन्ने की बुआई नहीं हो सकती है। नतीजा आगामी सत्र में गन्ने का रकबा भी प्रभावित होगा और धान का बढ़ेगा।
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उधर, उप कृषि निदेशक जसपाल भी मानते हैं कि मिलों के लेट चलने से गेहूं की अगेती प्रजाति का रकबा प्रभावित होगा और गेहूं पछेती प्रजाति का
अनुपात बढ़ेगा।
गन्ने के जमाव के लिए 15-28 डिग्री तापमान उचित माना जाता है, इससे कम या ज्यादा तापमान में गन्ना का जमाव ठीक नहीं होता । मई माह गन्ना बुवाई के लिए उचित नहीं है।
वीरेंद्र नाथ
वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक