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डीएम के आदेश के बाद भी नहीं कराया जांच के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध
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टेंडर प्रक्रिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजनौर। नगर पंचायत बढ़ापुर में नियम के खिलाफ हुए मैन्युअल टेंडरों की जांच के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इस मामले में डीएम, एडीएम के आदेश भी ताक पर रख दिए गए। रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने के कारण शिकायतकर्ता को उसकी शिकायत वापस कर दी गई है।
बढ़ापुर के पूर्व चेयरमैन शराफत हुसैन ने डीएम से शिकायत कर मनमाने ढंग से बिना प्रसार वाले अखबारों में मैन्युअल विज्ञापन छपवाए थे। साथ ही निर्माण कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। इस मामले में डीएम ने एडीएम प्रशासन को पत्र लिखकर शीर्ष प्राथमिकता पर इसकी जांच कराने के आदेश दिए थे। इस मामले में जांच में एसडीएम ने पाया कि जिन अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराए गए वह उचित प्रतीत नहीं होता है। समाचार पत्र वृहत प्रचार प्रसार वाले नहीं हैं। बताया कि इस संबंध में अधिशासी अधिकारी द्वारा सहयोग नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद एडीएम प्रशासन ने अधिशासी अधिकारी को जांच में सहयोग देने के आदेश दिए।
जांच के लिए नियुक्त किए गए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सुधीर कुमार अग्रवाल ने एसडीएम को पत्र लिखकर बताया कि अधिशासी अधिकारी को जांच से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए लिखा गया था, लेकिन अधिशासी अधिकारी द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण जांच करना संभव नहीं है। इसलिए शिकायत वापस की जा रही है। पूर्व चेयरमैन शराफत हुसैन के अनुसार डीएम के आदेश पर अधिशासी अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध न कराना भ्रष्टाचार को उजागर करता है। अधिशासी अधिकारी आलोक वर्मा का कहना है कि उन्होंने 22 मार्च को ही चार्ज लिया है, मामले की जानकारी नहीं है।
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बढ़ापुर के पूर्व चेयरमैन शराफत हुसैन ने डीएम से शिकायत कर मनमाने ढंग से बिना प्रसार वाले अखबारों में मैन्युअल विज्ञापन छपवाए थे। साथ ही निर्माण कार्यों में धांधली का आरोप लगाया था। इस मामले में डीएम ने एडीएम प्रशासन को पत्र लिखकर शीर्ष प्राथमिकता पर इसकी जांच कराने के आदेश दिए थे। इस मामले में जांच में एसडीएम ने पाया कि जिन अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराए गए वह उचित प्रतीत नहीं होता है। समाचार पत्र वृहत प्रचार प्रसार वाले नहीं हैं। बताया कि इस संबंध में अधिशासी अधिकारी द्वारा सहयोग नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद एडीएम प्रशासन ने अधिशासी अधिकारी को जांच में सहयोग देने के आदेश दिए।
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जांच के लिए नियुक्त किए गए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सुधीर कुमार अग्रवाल ने एसडीएम को पत्र लिखकर बताया कि अधिशासी अधिकारी को जांच से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए लिखा गया था, लेकिन अधिशासी अधिकारी द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण जांच करना संभव नहीं है। इसलिए शिकायत वापस की जा रही है। पूर्व चेयरमैन शराफत हुसैन के अनुसार डीएम के आदेश पर अधिशासी अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध न कराना भ्रष्टाचार को उजागर करता है। अधिशासी अधिकारी आलोक वर्मा का कहना है कि उन्होंने 22 मार्च को ही चार्ज लिया है, मामले की जानकारी नहीं है।
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