{"_id":"5a3aacd14f1c1b1f168b46db","slug":"91513794769-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फाइल छह को निरस्त कर इसको लगा लें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फाइल छह को निरस्त कर इसको लगा लें
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। सोमवार रात महिला जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान पांच बच्चों की मौत उनकी मां की प्रसव पीड़ा के दौरान नहीं हुई। बच्चों की मौत जन्म लेने के एक या दो घंटे बाद हुई। जिन पांच बच्चों की मौत हुई, उनमें से चार बच्चों की मां के प्रसव डा. रुमाना ने कराए थे। बच्चों की जन्म लेने के बाद स्टाफ की लापरवाही की वजह से मौत हुई या अन्य किसी वजह से सवाल बना हुआ है।
महिला जिला अस्पताल में मात्र 14 घंटे के अंदर पांच नवजात की मौत से विभाग में खलबली मची गई है। बच्चों की मौत को लेकर चिकित्सक व स्टाफ जांच के दायरे में आ गए हैं। महिला जिला अस्पताल में महिलाओं का प्रसव चिकित्सक के द्वारा कराया जाता है। प्रसव के बाद बच्चों को नहलाकर उनके परिजनों को दे दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को जिन बच्चों की मौत हुई, वे सभी स्वस्थ पैदा हुए थे। उन्हें उनके माता-पिता को दे दिया गया था। बच्चों को माता-पिता को देने के बाद ही उनकी मौत हुई। यह भी नहीं माना जा सकता है कि पांचों बच्चे जन्म के तुरंत बाद ही किसी रोग से ग्रसित हो गए। मृतक बच्चों के परिजनों ने अप्रशिक्षित स्टाफ पर प्रसव कराने का आरोप लगाया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रसव के दौरान स्टाफ ने कोई ऐसी गंभीर गलती कर दी जो इन बच्चों की मौत हो गई। जिन पांच नवजात बच्चों की मौत हुई, उनमें से चार गर्भवती महिलाओं का प्रसव डा. रूमाना ने कराया था, जबकि एक महिला का प्रसव सीएमएस डा.आभा वर्मा ने स्वयं कराया था। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चों की मौत हुई है। पीएचसी व सीएचसी पर भी नवजात बच्चों की मौत के मामले सामने आते रहते हैं। मंगलवार को महिला जिला अस्पताल में मृतक नवजात के परिजनों ने अप्रशिक्षित स्टाफ से प्रसव कराने व रुपये मांगने का आरोप लगाया था।
सीएमएस डा.आभा वर्मा ने बताया कि पांच मरने वाले बच्चों में से चार बच्चों की मां की डिलीवरी डा.रूमाना ने कराई थी। सोमवार की दोपहर दो बजे से मंगलवार की सुबह आठ बजे तक डा.रूमाना ही ड्यूटी पर थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला जिला अस्पताल में मात्र 14 घंटे के अंदर पांच नवजात की मौत से विभाग में खलबली मची गई है। बच्चों की मौत को लेकर चिकित्सक व स्टाफ जांच के दायरे में आ गए हैं। महिला जिला अस्पताल में महिलाओं का प्रसव चिकित्सक के द्वारा कराया जाता है। प्रसव के बाद बच्चों को नहलाकर उनके परिजनों को दे दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को जिन बच्चों की मौत हुई, वे सभी स्वस्थ पैदा हुए थे। उन्हें उनके माता-पिता को दे दिया गया था। बच्चों को माता-पिता को देने के बाद ही उनकी मौत हुई। यह भी नहीं माना जा सकता है कि पांचों बच्चे जन्म के तुरंत बाद ही किसी रोग से ग्रसित हो गए। मृतक बच्चों के परिजनों ने अप्रशिक्षित स्टाफ पर प्रसव कराने का आरोप लगाया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रसव के दौरान स्टाफ ने कोई ऐसी गंभीर गलती कर दी जो इन बच्चों की मौत हो गई। जिन पांच नवजात बच्चों की मौत हुई, उनमें से चार गर्भवती महिलाओं का प्रसव डा. रूमाना ने कराया था, जबकि एक महिला का प्रसव सीएमएस डा.आभा वर्मा ने स्वयं कराया था। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चों की मौत हुई है। पीएचसी व सीएचसी पर भी नवजात बच्चों की मौत के मामले सामने आते रहते हैं। मंगलवार को महिला जिला अस्पताल में मृतक नवजात के परिजनों ने अप्रशिक्षित स्टाफ से प्रसव कराने व रुपये मांगने का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
सीएमएस डा.आभा वर्मा ने बताया कि पांच मरने वाले बच्चों में से चार बच्चों की मां की डिलीवरी डा.रूमाना ने कराई थी। सोमवार की दोपहर दो बजे से मंगलवार की सुबह आठ बजे तक डा.रूमाना ही ड्यूटी पर थी।
विज्ञापन