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नगर में आयोजित होगी विशाल सभा
Updated Mon, 14 Aug 2017 01:08 AM IST
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नजीबाबाद। धर्म दीर्घकालीन राजनीति और राजनीति अल्पकालीन धर्म के समान है। जरूरत है इससे ऊपर उठकर सोचने की, तभी धरती को स्वर्ग से सुंदर बनाया जा सकता है। वेब पत्रिका समालोचन के संपादक डॉ.अरुणदेव जायसवाल ने यह बात कही। वे जमीयत उलमा ए हिंद की ओर से आयोजित विशाल सभा में बोल रहे थे।
कासमियां इंटर कॉलेज में आयोजित सभा में डॉ.अरुणदेव ने कहा कि पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के लिए जरूरी है कि हम गैर-मजहबी लोगों से दोस्ती करें। उनकी भावनाओं को मान-सम्मान दें। जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मो.ईसा ने कहा कि इंसानियत को कायम रखने के लिए आज जरूरत है कि दिल में एकदूसरे के प्रति दर्द जगाएं। दूसरे का दुुख-दर्द अपना दुख-दर्द समझें। गुरुद्वारा नानकशाही श्री गुरु सिंह सभा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी उपकार सिंह ने कहा कि स्वर्ण मंदिर की बुनियाद साईं मियां मीर ने रखी थी। जो सांप्रदायिक सौहार्द के क्षेत्र की बहुत बड़ी मिसाल है।
ईसाई समाज के फादर डेविस ने विभिन्न धर्मों के लोगों से स्वार्थ से परमार्थ की ओर बढ़ने का आह्वान किया। दूसरे धर्म के लोगों के बारे में यह न सोचें कि इनसे हमें क्या मिलेगा, बल्कि सोचें कि मैं क्या दे सकता हूं। कारी शम्सुद्दीन चतुर्वेदी ने गीता और कुरान की पंक्तियों से झकझोरा। उन्होंने कहा कि दीन का काम उजड़ों को बसाना है। भगीरथ सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बाणी से सर्वधर्म संभाव का आह्वान किया।
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सभा की अध्यक्षता कर रहे मौलाना मो.असलम ने हिंदुस्तान की मिट्टी में सभी का खून शामिल होने की बात कहते हुए अपनी विविधता को अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया। इंजी. मुअज्जम खां ने कहा कि जिस तरह अलग-अलग रंगों के धागों के मिलने से खूबसूरत कपड़ा तैयार होता है, उसी तरह विभिन्न धर्मों के लोगों के घुलने-मिलने से खूबसूरत हिंदुस्तान नजर आएगा।
संयोजक मुफ्ती असरार अहमद एवं इकबाल हिंदुस्तानी के संचालन में हुई विशाल सभा में निवर्तमान चेयरमैन मुअज्जम खां, मुफ्ती अरशद, मौलाना लियाकत, मौलाना इम्तियाज, गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी प्रधान नरेंद्र सिंह, सचिव हरेंद्र सिंह, फादर शीबू थॉमस, मुफ्ती सज्जाद, रामपाल सिंह, रफीक अंसारी, हाजी फैसल सहित विभिन्न धर्मों के कई लोग मौजूद रहे।
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कासमियां इंटर कॉलेज में आयोजित सभा में डॉ.अरुणदेव ने कहा कि पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के लिए जरूरी है कि हम गैर-मजहबी लोगों से दोस्ती करें। उनकी भावनाओं को मान-सम्मान दें। जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मो.ईसा ने कहा कि इंसानियत को कायम रखने के लिए आज जरूरत है कि दिल में एकदूसरे के प्रति दर्द जगाएं। दूसरे का दुुख-दर्द अपना दुख-दर्द समझें। गुरुद्वारा नानकशाही श्री गुरु सिंह सभा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी उपकार सिंह ने कहा कि स्वर्ण मंदिर की बुनियाद साईं मियां मीर ने रखी थी। जो सांप्रदायिक सौहार्द के क्षेत्र की बहुत बड़ी मिसाल है।
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ईसाई समाज के फादर डेविस ने विभिन्न धर्मों के लोगों से स्वार्थ से परमार्थ की ओर बढ़ने का आह्वान किया। दूसरे धर्म के लोगों के बारे में यह न सोचें कि इनसे हमें क्या मिलेगा, बल्कि सोचें कि मैं क्या दे सकता हूं। कारी शम्सुद्दीन चतुर्वेदी ने गीता और कुरान की पंक्तियों से झकझोरा। उन्होंने कहा कि दीन का काम उजड़ों को बसाना है। भगीरथ सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बाणी से सर्वधर्म संभाव का आह्वान किया।
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सभा की अध्यक्षता कर रहे मौलाना मो.असलम ने हिंदुस्तान की मिट्टी में सभी का खून शामिल होने की बात कहते हुए अपनी विविधता को अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया। इंजी. मुअज्जम खां ने कहा कि जिस तरह अलग-अलग रंगों के धागों के मिलने से खूबसूरत कपड़ा तैयार होता है, उसी तरह विभिन्न धर्मों के लोगों के घुलने-मिलने से खूबसूरत हिंदुस्तान नजर आएगा।
संयोजक मुफ्ती असरार अहमद एवं इकबाल हिंदुस्तानी के संचालन में हुई विशाल सभा में निवर्तमान चेयरमैन मुअज्जम खां, मुफ्ती अरशद, मौलाना लियाकत, मौलाना इम्तियाज, गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी प्रधान नरेंद्र सिंह, सचिव हरेंद्र सिंह, फादर शीबू थॉमस, मुफ्ती सज्जाद, रामपाल सिंह, रफीक अंसारी, हाजी फैसल सहित विभिन्न धर्मों के कई लोग मौजूद रहे।