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नौ लाख क्विंटल रॉ शुगर होगी निर्यात, तीन मिलों को मिले ऑर्डर

Tue, 22 Jan 2019 12:09 AM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर Published by: Deepak Sharma Updated Tue, 22 Jan 2019 12:09 AM IST
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9 lakh quintals of raw sugar will be exported, orders for three mills
मिल द्वारा बनाई गई रॉ शुगर। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में जिले में चीनी मिल पहली बार रॉ शुगर बना रही हैं। यह चीनी विदेशों को निर्यात की जाएगी। केंद्र सरकार ने फिलहाल जिले की चीनी मिलों को नौ लाख क्विंटल से अधिक चीनी बनाने का आर्डर दिया है। जिले की तीन चीनी मिल रॉ शुगर बनाएंगी। विदेशों में इस रॉ शुगर को खाने लायक चीनी में फिर से तब्दील किया जाएगा। विदेशों में चीनी जाने से स्थानीय बाजार में चीनी की निर्भरता कम होगी और चीनी के दामों में सुधार आएगा।
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गन्ने की बंपर पैदावार से चीनी के दाम धड़ाम चल रहे हैं। चीनी के दामों में कुछ खास इजाफा नहीं हुआ है। वर्तमान में चीनी के दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। पिछले साल का भी चीनी का स्टॉक चीनी मिलों के पास है। जीवन की भरमार को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात करने का फैसला किया गया है। जिले से भी चीनी को निर्यात करने के आदेश दिए गए हैं। चीनी निर्यात करने के लिए जिले की तीन चीनी मिलों बिजनौर, धामपुर व अफजलगढ़ को चुना गया है। यहां रॉ शुगर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। धामपुर चीनी मिल 6.30 लाख, अफजलगढ़ चीनी मिल 1.63 लाख व बिजनौर चीनी मिल एक लाख क्विंटल रॉ शुगर बनाएगी। यह चीनी विदेशों को बेची जाएगी। चीनी बाहर जाने से स्थानीय बाजार में चीनी की निर्भरता और उपलब्धता दोनों कम होगी और चीनी के दामों में उछाल आ सकता है।
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ऐसे बनती है रॉ शुगर
गन्ने के रस को अनेक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद गंधक से साफ कर चीनी के दाने में बदल दिया जाता है। यह चीनी सफेद रंग की होती है। रॉ शुगर में गंधक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह चीनी पीले रंग की होती है। विदेशों को दोनों तरह की चीनी भेजी जा सकती है, लेकिन विदेशी चीनी को रिफाइनरी में गलाकर फिर से बड़े दाने वाली चीनी बनाते हैं। ऐसे में जो चीनी मिल पीली चीनी भेजते हैं तो उनकी लागत कम आती है।
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दाम से कम मिल रही कीमत
एक क्विंटल चीनी बनाने में 3500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक     का खर्च आता है। चीनी मिल मालिक चीनी का दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल मांगते हैं, लेकिन बाजार में चीनी की बहुतायत को देखते हुए चीनी के दामों में उछाल नहीं आ रहा है। बिजनौर मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह के अनुसार मिल में रॉ शुगर बनाई जा रही है।     गुजरात   होते हुए यह चीनी विदेश जाएगी। जिला गन्ना अधिकारी  चीनी को बाजार उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।  जिले में रॉ शुगर के निर्यात का बड़ा आर्डर मिला है। आगे भी इस तरह के आर्डर मिल सकते हैं।

गन्ना पर्ची वितरण को पेपर लैस करने की तैयारी
बिजनौर में गन्ना पर्ची प्रणाली को पेपर लैस करने के लिए अभियान शुरू हो गया है। किसान बिना पर्ची के केवल मोबाइल में आए एसएमएस के आधार पर ही गन्ना तुलवाएंगे। इसके लिए हर समिति से पांच-पांच गांवों को चयनित किया जा रहा है।

किसान चीनी मिलों को गन्ना पर्ची मिलने के बाद गन्ना आपूर्ति करते हैं। लेकिन कई बार गन्ना पर्ची गन्ना डलने से पहले ही फट जाती है या फिर खो जाती है। ऐसी दशा में वह पर्ची खराब हो जाती है और किसान का गन्ना भी नहीं डल पाता है। चालू पेराई सत्र में पर्ची के साथ-साथ किसानों को मोबाइल पर एसएमएस के जरिये भी पर्ची भेजने की व्यवस्था की गई। इससे पर्ची न होने पर भी एसएमएस दिखाकर किसान तौल करा सकते हैं। इस व्यवस्था को जल्दी ही पेपर लैस करने की तैयारी की जा रही है। सभी नौ समितियों में पांच-पांच गांवों को इसके लिए चिह्नित किया गया है। इन गांवों में केवल एसएमएस दिखाकर ही तौल की जाएगी। कागज की गन्ना पर्ची जारी नहीं होगी। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार इस पेपर लैस व्यवस्था से किसानों को लाभ होगा। किसान एसएमएस दिखाकर गन्ना तुलवाने की आदत डालें। एसएमएस प्राप्त करने के लिए किसान अपने मोबाइल का इनबॉक्स खाली करते रहें।
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