{"_id":"5c19403fbdec2256ea194f9d","slug":"81545158719-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को गन्ना विभाग ने पीछे किया।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को गन्ना विभाग ने पीछे किया।
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नहीं आ रहीं मानसून गन्ने की पर्चियां
नूरपुर। गन्ना विभाग ने वर्तमान पेराई सत्र में पिछले वर्ष अक्टूबर में बोए गए गन्ने की पर्चियां जारी करने में खेल कर दिया। पहले जारी हुए पर्ची कलेंडरों में अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को दो पक्षों में लगाया गया था, लेकिन बीच सत्र में कलेंडर में बदलाव कर पर्चियों को पांच पक्षों में कर दिया गया। पर्चियों को हटाए जाने से किसानों का सवा साल पहले बोया गया अगैती मानसून गन्ना खेतों में खड़ा है।
गन्ना मिलों द्वारा पिछले कई वर्षों से अक्टूबर माह में गन्ना बुवाई पर काफी जोर दिया जा रहा था। मिलों की ओर से मानसून गन्ना बुवाई पर जैविक खाद देने के अलावा पर्चियां देने में भी प्राथमिकता दी जाती थी। अगैती मानसून गन्ने की सभी पर्ची मिलों द्वारा मिल शुरू होते ही पहले पक्ष में जारी कर दी जाती थीं। इस वर्ष शासन द्वारा पर्चियां जारी करने काम मिल से लेकर गन्ना समितियों को सौंप दिया है। गन्ना सर्वे व सट्टा निर्धारण का काम भी समिति के कर्मचारियों द्वारा किया गया है। गन्ना समिति द्वारा भी अगैती मानसून गन्ने की खरीद के लिए अलग से पर्चियां जारी की जा रही हैं, लेकिन गन्ना विभाग ने एक सप्ताह पूर्व पर्चियां जारी करने में खेल कर दिया। पहले जहां अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को दो पक्षों में लगाया गया था, वहीं अब कलेंडरों में बदलाव कर पर्चियों को पांच पक्षों में कर दिया गया है। पर्चियां हटाए जाने से मानसून गन्ने की बुवाई करने वाले किसान परेशान हैं। मलखान सिंह, सतीश कुमार, सुरेंद्र सिंह अमरीश कुमार, चौधरी शेर सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने सवा साल पूर्व गन्ने की बुवाई की थी। समय से पर्ची न मिलने के कारण उनके खेत खाली नहीं हो रहे हैं। गन्ना कटाई में देरी होने से न तो उसमें गेहूं की फसल होगी और न ही गन्ने की पेड़ी फूटेगी।
मानसून गन्ने की बुवाई से किसानों का होगा मोह भंग
अगैती मानसून गन्ने की पर्चियां समय से न मिलने से किसानों का इसकी बुवाई से मोह भंग हो सकता है। मानसून गन्ने की बुवाई से किसानों और मिलों दोनों को ही फायदा है। किसान जहां अक्तूबर में गन्ने की बुवाई के साथ सरसों, आलू, मसूर आदि की सहफसली खेती करते हैं, वहीं अक्टूबर में बोए गए गन्ने में रिकवरी अधिक निकलने से मिलों को भी फायदा होता है। वर्तमान पेराई सत्र में मानसून गन्ने की पर्चियां समय से न मिलने के कारण किसान परेशान हैं। अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों के पहले दो पक्षों में लगाया गया था। इसमें बदलाव मंडल स्तर पर किया गया है। इस संबंध में अधिकारियों से बात की जाएगी - एस एन दीक्षित सचिव गन्ना समिति नूरपुर।
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नूरपुर। गन्ना विभाग ने वर्तमान पेराई सत्र में पिछले वर्ष अक्टूबर में बोए गए गन्ने की पर्चियां जारी करने में खेल कर दिया। पहले जारी हुए पर्ची कलेंडरों में अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को दो पक्षों में लगाया गया था, लेकिन बीच सत्र में कलेंडर में बदलाव कर पर्चियों को पांच पक्षों में कर दिया गया। पर्चियों को हटाए जाने से किसानों का सवा साल पहले बोया गया अगैती मानसून गन्ना खेतों में खड़ा है।
गन्ना मिलों द्वारा पिछले कई वर्षों से अक्टूबर माह में गन्ना बुवाई पर काफी जोर दिया जा रहा था। मिलों की ओर से मानसून गन्ना बुवाई पर जैविक खाद देने के अलावा पर्चियां देने में भी प्राथमिकता दी जाती थी। अगैती मानसून गन्ने की सभी पर्ची मिलों द्वारा मिल शुरू होते ही पहले पक्ष में जारी कर दी जाती थीं। इस वर्ष शासन द्वारा पर्चियां जारी करने काम मिल से लेकर गन्ना समितियों को सौंप दिया है। गन्ना सर्वे व सट्टा निर्धारण का काम भी समिति के कर्मचारियों द्वारा किया गया है। गन्ना समिति द्वारा भी अगैती मानसून गन्ने की खरीद के लिए अलग से पर्चियां जारी की जा रही हैं, लेकिन गन्ना विभाग ने एक सप्ताह पूर्व पर्चियां जारी करने में खेल कर दिया। पहले जहां अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों को दो पक्षों में लगाया गया था, वहीं अब कलेंडरों में बदलाव कर पर्चियों को पांच पक्षों में कर दिया गया है। पर्चियां हटाए जाने से मानसून गन्ने की बुवाई करने वाले किसान परेशान हैं। मलखान सिंह, सतीश कुमार, सुरेंद्र सिंह अमरीश कुमार, चौधरी शेर सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने सवा साल पूर्व गन्ने की बुवाई की थी। समय से पर्ची न मिलने के कारण उनके खेत खाली नहीं हो रहे हैं। गन्ना कटाई में देरी होने से न तो उसमें गेहूं की फसल होगी और न ही गन्ने की पेड़ी फूटेगी।
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मानसून गन्ने की बुवाई से किसानों का होगा मोह भंग
अगैती मानसून गन्ने की पर्चियां समय से न मिलने से किसानों का इसकी बुवाई से मोह भंग हो सकता है। मानसून गन्ने की बुवाई से किसानों और मिलों दोनों को ही फायदा है। किसान जहां अक्तूबर में गन्ने की बुवाई के साथ सरसों, आलू, मसूर आदि की सहफसली खेती करते हैं, वहीं अक्टूबर में बोए गए गन्ने में रिकवरी अधिक निकलने से मिलों को भी फायदा होता है। वर्तमान पेराई सत्र में मानसून गन्ने की पर्चियां समय से न मिलने के कारण किसान परेशान हैं। अगैती मानसून गन्ने की पर्चियों के पहले दो पक्षों में लगाया गया था। इसमें बदलाव मंडल स्तर पर किया गया है। इस संबंध में अधिकारियों से बात की जाएगी - एस एन दीक्षित सचिव गन्ना समिति नूरपुर।
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