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गन्ना व चकबंदी अधिकारी रहे निशाने पर
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:04 AM IST
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बिजनौर। प्रशासन और भाकियू भानु की बैठक में गन्ना मिल व चकबंदी अधिकारी किसानों के निशाने पर रहे। भागूवाला क्षेत्र के किसानों ने हाथ उठाकर कहा कि वे किसी भी हालत में चकबंदी नहीं होने देंगे। शुगर मिलों का गंदा पानी आसपास के ग्रामवासियों को रोगी बना रहे हैं। आरोप लगाया कि बिजलीघरों पर तैनात जूनियर इंजीनियर छोटे-छोटे कामों के पैसे मांगते हैं।
भाकियू भानु के जिला अध्यक्ष विजय सिंह सहरावत का आरोप है कि प्रशासन को किसानों की शिकायतों को लेकर दर्जनों मांगपत्र दिए गए हैं। मांगपत्रों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारी शिकायतों को दबाकर बैठ जाते हैं। इस पर प्रशासन ने शुक्रवार को यूनियन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को शिकायतों के निपटारे के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए बुलाया था। बैठक में बिजली, गन्ना, चकबंदी, पशुपालन, सिंचाई आदि विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। किसान गन्ने की पर्ची नहीं मिलने को लेकर खफा था। किसानों का कहना था कि गेहूं की कटाई होने से पहले गन्ना समाप्त हो जाता था। पैदावार बढ़ गई है, लेकिन पेराई का कोई इंतजाम नहीं है। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि डीएम अटलकुमार राय ने बृहस्पतिवार को शुगर मिलों की बैठक बुलाकर कह दिया है कि जब तक खेतों में खड़े एक-एक गन्ने की पेराई हो जाने की पुष्टि नहीं हो जाती है, जिले की कोई शुगर मिल बंद नहीं होगी। आरोप लगाया कि चकबंदी किसानों के गले का फंदा बनी है। शिकायतों के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है। आवारा पशुओं, नहरों में फसलों की जरूरत के समय पानी नहीं आने आदि के मामले उठे। जिला अध्यक्ष ने 15 सूत्रीय मांगपत्र सीडीओ को दिया। एडीएम वित्त व राजस्व अवधेश कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़, डीसीओ ओपी सिंह, सीवीओ भूपेंद्र सिंह, चकबंदी अधिकारी मौजूद रहे।
नजीबाबाद शुगर मिल का गन्ना होगा डायवर्ट
सीडीओ ने किसानों को भरोसा दिया है कि नजीबाबाद शुगर मिल का गन्ना बरकातपुर, बूुदकी व बिलाई को डायवर्ट होगा। इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया है। नजीबाबाद शुगर मिल 25 मई तक चलेगा। सीडीओ ने माना कि सबसे अधिक शिकायत बरकातपुर शिकायत की है। प्रशासन गन्ना पेमेंट में पिछड़े बिलाई शुगर मिल पर निगाह रखे हैं। किसानों का आरोप है कि शुगर मिलों द्वारा सड़क के किनारे डाली गई मैली वाहनों के लिए दुर्घटना का कारण बनी है। शुगर मिलों का गंदा पानी जमीन के अंदर जा रहा है, इससे आसपास के गांवों के हैंडपंपों में दूषित पानी आने लगा है। दूषित पानी पीने से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
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कृत्रिम दूध की हो रही धड़ल्ले से बिक्री
किसानों का आरोप है कि जिले में यूरिया से बना कृत्रिम दूध बड़े पैमाने पर बिक रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध का सही रेट नहीं मिलने से डेयरी उद्योग बंद होने के कगार पर है। कामधेनु योजना में कर्ज वसूली के लिए समय सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष की जाए।
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भाकियू भानु के जिला अध्यक्ष विजय सिंह सहरावत का आरोप है कि प्रशासन को किसानों की शिकायतों को लेकर दर्जनों मांगपत्र दिए गए हैं। मांगपत्रों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारी शिकायतों को दबाकर बैठ जाते हैं। इस पर प्रशासन ने शुक्रवार को यूनियन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को शिकायतों के निपटारे के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए बुलाया था। बैठक में बिजली, गन्ना, चकबंदी, पशुपालन, सिंचाई आदि विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। किसान गन्ने की पर्ची नहीं मिलने को लेकर खफा था। किसानों का कहना था कि गेहूं की कटाई होने से पहले गन्ना समाप्त हो जाता था। पैदावार बढ़ गई है, लेकिन पेराई का कोई इंतजाम नहीं है। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि डीएम अटलकुमार राय ने बृहस्पतिवार को शुगर मिलों की बैठक बुलाकर कह दिया है कि जब तक खेतों में खड़े एक-एक गन्ने की पेराई हो जाने की पुष्टि नहीं हो जाती है, जिले की कोई शुगर मिल बंद नहीं होगी। आरोप लगाया कि चकबंदी किसानों के गले का फंदा बनी है। शिकायतों के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है। आवारा पशुओं, नहरों में फसलों की जरूरत के समय पानी नहीं आने आदि के मामले उठे। जिला अध्यक्ष ने 15 सूत्रीय मांगपत्र सीडीओ को दिया। एडीएम वित्त व राजस्व अवधेश कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़, डीसीओ ओपी सिंह, सीवीओ भूपेंद्र सिंह, चकबंदी अधिकारी मौजूद रहे।
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नजीबाबाद शुगर मिल का गन्ना होगा डायवर्ट
सीडीओ ने किसानों को भरोसा दिया है कि नजीबाबाद शुगर मिल का गन्ना बरकातपुर, बूुदकी व बिलाई को डायवर्ट होगा। इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया है। नजीबाबाद शुगर मिल 25 मई तक चलेगा। सीडीओ ने माना कि सबसे अधिक शिकायत बरकातपुर शिकायत की है। प्रशासन गन्ना पेमेंट में पिछड़े बिलाई शुगर मिल पर निगाह रखे हैं। किसानों का आरोप है कि शुगर मिलों द्वारा सड़क के किनारे डाली गई मैली वाहनों के लिए दुर्घटना का कारण बनी है। शुगर मिलों का गंदा पानी जमीन के अंदर जा रहा है, इससे आसपास के गांवों के हैंडपंपों में दूषित पानी आने लगा है। दूषित पानी पीने से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
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कृत्रिम दूध की हो रही धड़ल्ले से बिक्री
किसानों का आरोप है कि जिले में यूरिया से बना कृत्रिम दूध बड़े पैमाने पर बिक रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध का सही रेट नहीं मिलने से डेयरी उद्योग बंद होने के कगार पर है। कामधेनु योजना में कर्ज वसूली के लिए समय सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष की जाए।