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बेटियों की पढ़ाई में मदद करेंगे मिनी बैंक
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:57 PM IST
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तंगहाली में बेटियों की पढ़ाई नहीं छूटेगी
बिजनौर। अब रुपयों की कमी की वजह से बेटियों की पढ़ाई बीच में ही नहीं रुकेगी। बेटियों को पढ़ाने में मदद के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से मिनी बैंक बनाए जाएंगे। ये बैंक संभ्रांत नागरिकों से रुपये एकत्र करेंगे और बेटियों को उधार में रुपये देंगे। इस रुपये को वापस करने की किश्त दस रुपये प्रतिदिन की दर से तय की जाएगी। सबसे पहले सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी के गोद लिए गए गांवों में यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इस ट्रायल के सफल होने पर जिले के 3236 आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब इतने ही मिनी बैंक बनाए जाएंगे।
अज्ञानता के अंधकार को शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है। शत-प्रतिशत शिक्षा दर लाने के लिए शासन की ओर से अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। कई बच्चे किन्हीं कारणों से आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं, उन्हें भी शिक्षा से जोड़ने के लिए चिह्नित किया जा रहा है। बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हालांकि अक्सर आर्थिक परिस्थितियां बेटियों की पढ़ाई के आड़े आ ही जाती हैं। बेटियों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी पहल की गई है। जिले में 3236 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां से बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए व स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम करने के लिए अधिकारी इन केंद्रों को गोद लेते हैं व किशोरी मंच का गठन किया गया है। अब इन किशोरी मंच के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिनी बैंक बनाए जाएंगे। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी ने गांव मोड़ा व सरकथल सानी को गोद ले रखा है। यहां पर सीडीओ, डीपीओ दीप्ति भार्गव व बाकी गांव वालों ने किशोरी मंच के माध्यम से बने मिनी बैंक में रुपये भी एकत्र कर लिए हैं। दोनों अधिकारियों ने मिनी बैंकों की शुरूआत अपनी जेब से रुपये देकर की है। किशोरी मंच की सदस्यों ने भी इसमें आर्थिक सहयोग दिया है। इन गांवों में मिनी बैंकों के सफल संचालन के बाद बाकी आंगनबाड़ी केंद्रों में भी मिनी बैंक बनाए जाएंगे। संभ्रांत नागरिकों व समाजसेवियों की भी इसमें मदद ली जाएगी।
ये हो सकेंगे काम
स्कूल फीस, ट्यूशन फीस, स्कूल आने जाने के किराए, कोर्स, प्रोजेक्ट की फीस आदि के लिए मिनी बैंक से रुपये उधार दिए जाएंगे। अगर किशोरी सिलाई कढ़ाई आदि सीखना चाहती है तो उसमें भी सहयोग किया जाएगा।
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सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार बेटियों की पढ़ाई जारी रखने की जिम्मेदारी केवल परिवार पर ही नहीं बल्कि समाज पर भी होनी चाहिए। मिनी बैंक बेटियों की पढ़ाई जारी रखवाने में मदद करेंगे, सभी जिलेवासी इनमें सहयोग करें।
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बिजनौर। अब रुपयों की कमी की वजह से बेटियों की पढ़ाई बीच में ही नहीं रुकेगी। बेटियों को पढ़ाने में मदद के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से मिनी बैंक बनाए जाएंगे। ये बैंक संभ्रांत नागरिकों से रुपये एकत्र करेंगे और बेटियों को उधार में रुपये देंगे। इस रुपये को वापस करने की किश्त दस रुपये प्रतिदिन की दर से तय की जाएगी। सबसे पहले सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी के गोद लिए गए गांवों में यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इस ट्रायल के सफल होने पर जिले के 3236 आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब इतने ही मिनी बैंक बनाए जाएंगे।
अज्ञानता के अंधकार को शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है। शत-प्रतिशत शिक्षा दर लाने के लिए शासन की ओर से अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। कई बच्चे किन्हीं कारणों से आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं, उन्हें भी शिक्षा से जोड़ने के लिए चिह्नित किया जा रहा है। बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हालांकि अक्सर आर्थिक परिस्थितियां बेटियों की पढ़ाई के आड़े आ ही जाती हैं। बेटियों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी पहल की गई है। जिले में 3236 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां से बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए व स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम करने के लिए अधिकारी इन केंद्रों को गोद लेते हैं व किशोरी मंच का गठन किया गया है। अब इन किशोरी मंच के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिनी बैंक बनाए जाएंगे। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी ने गांव मोड़ा व सरकथल सानी को गोद ले रखा है। यहां पर सीडीओ, डीपीओ दीप्ति भार्गव व बाकी गांव वालों ने किशोरी मंच के माध्यम से बने मिनी बैंक में रुपये भी एकत्र कर लिए हैं। दोनों अधिकारियों ने मिनी बैंकों की शुरूआत अपनी जेब से रुपये देकर की है। किशोरी मंच की सदस्यों ने भी इसमें आर्थिक सहयोग दिया है। इन गांवों में मिनी बैंकों के सफल संचालन के बाद बाकी आंगनबाड़ी केंद्रों में भी मिनी बैंक बनाए जाएंगे। संभ्रांत नागरिकों व समाजसेवियों की भी इसमें मदद ली जाएगी।
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ये हो सकेंगे काम
स्कूल फीस, ट्यूशन फीस, स्कूल आने जाने के किराए, कोर्स, प्रोजेक्ट की फीस आदि के लिए मिनी बैंक से रुपये उधार दिए जाएंगे। अगर किशोरी सिलाई कढ़ाई आदि सीखना चाहती है तो उसमें भी सहयोग किया जाएगा।
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सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार बेटियों की पढ़ाई जारी रखने की जिम्मेदारी केवल परिवार पर ही नहीं बल्कि समाज पर भी होनी चाहिए। मिनी बैंक बेटियों की पढ़ाई जारी रखवाने में मदद करेंगे, सभी जिलेवासी इनमें सहयोग करें।