{"_id":"597645c24f1c1ba2228b482a","slug":"81500923330-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैंच विधि से शरदाकालीन गन्ना बोने वालों पर मेहरबानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैंच विधि से शरदाकालीन गन्ना बोने वालों पर मेहरबानी
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शरदकालीन गन्ना बोने वालों को मिलेगी प्राथमिकता
बिजनौर। ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोने वाले किसानों को गन्ना विभाग व मिल प्राथमिकता देंगे। इन किसानों के खेत में खड़े पौधे की पर्ची पैड़ी की पर्ची के साथ ही जारी होगी। किसान गन्ने का पौधा जल्दी काटकर फिर से उसमें सहफसली खेती कर सकेेंगे।
आमतौर पर गन्ना फरवरी में बोया जाता है, लेकिन ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोकर उत्पादन बढ़ाने में जिले के किसान मॉडल बन चुके हैं। गन्ना विभाग की इस पहल को किसानों ने बहुत तेजी से अपनाया है। शरदकालीन फसल में गन्ना अगस्त से सितंबर तक बोया जाता है। साल 2015 में जिले में करीब एक हजार हेक्टेअर जमीन में शरदकालीन गन्ना बोया गया था। किसान गन्ना बोते समय इसमें अन्य फसलों की भी खेती कर अतिरिक्त लाभ कमाया जाता है। अब तक शरदकालीन गन्ने की अगस्त से सितंबर तक बोई गई फसल करीब डेढ़ साल बाद फरवरी-मार्च में कटती थी। मिल पौधे की खरीद के लिए पर्ची फरवरी के बाद ही जारी करती हैं, लेकिन अब गन्ना बोने के एक ही साल बाद अक्तूबर में ही इन किसानों को पर्ची दी जाएगी। मिल भी अक्तूबर में चलाने की तैयारी है। इन खेतों के खाली होने पर किसान गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती कर सकेंगे। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, शरदकालीन गन्ने की पर्ची पेड़ी के साथ ही दिलाई जाएंगी।
विज्ञापन
बिजनौर। ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोने वाले किसानों को गन्ना विभाग व मिल प्राथमिकता देंगे। इन किसानों के खेत में खड़े पौधे की पर्ची पैड़ी की पर्ची के साथ ही जारी होगी। किसान गन्ने का पौधा जल्दी काटकर फिर से उसमें सहफसली खेती कर सकेेंगे।
आमतौर पर गन्ना फरवरी में बोया जाता है, लेकिन ट्रैंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोकर उत्पादन बढ़ाने में जिले के किसान मॉडल बन चुके हैं। गन्ना विभाग की इस पहल को किसानों ने बहुत तेजी से अपनाया है। शरदकालीन फसल में गन्ना अगस्त से सितंबर तक बोया जाता है। साल 2015 में जिले में करीब एक हजार हेक्टेअर जमीन में शरदकालीन गन्ना बोया गया था। किसान गन्ना बोते समय इसमें अन्य फसलों की भी खेती कर अतिरिक्त लाभ कमाया जाता है। अब तक शरदकालीन गन्ने की अगस्त से सितंबर तक बोई गई फसल करीब डेढ़ साल बाद फरवरी-मार्च में कटती थी। मिल पौधे की खरीद के लिए पर्ची फरवरी के बाद ही जारी करती हैं, लेकिन अब गन्ना बोने के एक ही साल बाद अक्तूबर में ही इन किसानों को पर्ची दी जाएगी। मिल भी अक्तूबर में चलाने की तैयारी है। इन खेतों के खाली होने पर किसान गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती कर सकेंगे। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, शरदकालीन गन्ने की पर्ची पेड़ी के साथ ही दिलाई जाएंगी।
विज्ञापन