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नागरिकता मिली पर जमीन का मालिकाना हक नहीं

Fri, 28 Feb 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Feb 2020 11:51 PM IST
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73 years passed, no land ownership
73 साल बीते, नहीं मिला जमीन का मालिकाना हक
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अफजलगढ़ (बिजनौर)। पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भगाए गए सैकड़ों शरणार्थी परिवारों को नागरिकता तो मिल गई, लेकिन घर और बंजर भूमि पर खेती करने के बावजूद जमीन का मालिकाना हक 73 साल बाद भी नहीं मिल सका। इस अधिकार से वह आज भी वंचित हैं। सरकारी दफ्तरों की चौखट पर एड़ी रगड़ रगड़कर थक चुके हैं, लेकिन नियम कायदों की दुहाई देने वाला सिस्टम इनकी मदद नहीं कर सका। अब भाजपा विधायक सुशांत सिंह ने जमीन का हक दिलाने के लिए यह मुद्दा सीएम के समक्ष उठाया है और 203 विधायकों का समर्थन भी प्राप्त किया है।
यह सभी परिवार अफजलगढ़ क्षेत्र में रहते हैं। खेती के लिए इन्होंने बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। दिन रात मेहनत कर रुपया जोड़कर मकान बनाए। इस बीच उन्हें भारतीय नागरिकता मिली और मतदाता भी बन गए। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट भी डालते आ रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नेता इनके दरवाजे पर दस्तक देकर वोट मांगते हैं, जमीन का मालिकाना हक दिलाने का वादा भी करते हैं, लेकिन फिर सब भूल जाते हैं। यही वजह है कि 73 साल बाद भी इन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला।
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- मुहिम बनाने में जुटे भाजपा विधायक
भाजपा विधायक सुशांत सिंह ने इन शरणार्थी परिवारों का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया है। इस मुहिम को 203 विधायकों का समर्थन भी उन्हें मिल गया है। विधायक सुशांत सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। मांग की गई है कि 1947 के बंटवारे और पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता मिल गई है तो, जमीन का मालिकाना हक भी दिलाया जाए। विधायक सुशांत सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया है कि उक्त शरणार्थी आजीविका के लिए खेती करते आ रहे हैं। इतने बड़े अंतराल के बाद भी इन लोगों को उस भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। मुख्यमंत्री ने समस्या समाधान का भरोसा दिया है।
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- बंद हो गया था गन्ना सट्टा
शरणार्थी परिवारों के लोग गन्ने की खेती भी कर रहे हैं। इन किसानों को चीनी मिलें जमीन नाम न होने के बाद भी गन्ना पर्ची जारी करतीं थी। जमीन की खतौनी न देने के कारण दो साल पूर्व इनके सट्टे बंद कर दिए गए थे। बाद में किसान यूनियन के आंदोलन और प्रशासनिक अफसरों के दखल से सट्टे फिर से शुरू किए गए।

- इन गांवों में रहते हैं शरणार्थी
जनपद के गांव मदपुरी, चंपतपुरचकला, भोगपुर, प्रेमपुरी, कुआखेड़ा, चकफेरी, रसूलाबाद, हरवेली, हरेवला, खिजघरपुर, नवाबपुर, कटारमल और शाहनगर तथा कुराली आदि में शरणार्थी परिवार बसे हैं। सरकार द्वारा दी गई जमीन पर खेती करते हैं और अपने मकान भी बना रखे हैं। लेकिन अभिलेखों में जमीन के मालिक नहीं हैं।
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