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कई देशों की पद यात्रा करने क बाद जर्मन के थामस का अफजलगढ़ पहुंचने पर स्वागत
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पदयात्रा पर निकले थॉमस का अफजलगढ़ में स्वागत
अफजलगढ़। विश्व शांति पदयात्रा पर निकले जर्मन निवासी थॉमस मंगलवार शाम अफजलगढ़ पहुंचे। जर्मन से म्यांमार की पदयात्रा पर निकले जर्मन के शहर इंगे हेमवर्ग निवासी थामस (51) ने बताया कि वह विश्व शांति के लिए जर्मन से म्यांमार तक की पदयात्रा कर रहे हैं। वह 28 अप्रैल 2012 को विश्व शांति के लिए अपने शहर से रवाना हुए। जो टर्की, ईरान, अफगानिस्तान व अरब देशों की यात्रा कर चुके हैं। पाकिस्तान से भारत जाने के लिए वीजा न मिलने के कारण वह अफगानिस्तान से हवाई यात्रा कर भारत पहुंचे। भारत भ्रमण कर वह नेपाल पहुंचेंगे।
थामस जब अफजलगढ़ में पहुंचे तो उन्हें देखने वालों की भीड़ जमा हो गई। एक प्रश्न के जवाब में थॉमस ने बताया कि वह यात्रा के दौरान किसी भी घर का दरवाजा खटखटा कर भोजन प्राप्त कर लेते हैं। खर्च के लिए उन्होंने किसी से पैसा नहीं मांगा है, बल्कि काफी लोगों ने अपनी इच्छा से जो दान दिया उसी से वह अपना खर्च कर रहे हैं। सात वर्ष में उन्होंने लगभग चार हजार किमी पदयात्रा कर ली है। वह दो वर्ष में अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचेंगे। वहां से वह अपने शहर को वापस चले जाएंगे। अपने देश और शहर के लोगों से अनुभव साझा करेंगे।
भारत पहुंचने पर उन्होंने बताया कि यह यूरोप से भिन्न है। यहां के निवासियों, वातावरण, प्रकृति, संस्कृति और पशु पक्षियों की प्रशंसा की। कहा कि भारत में उन्हें बहुत अच्छा लगा। भारत को उन्होंने सभी देशों में सुंदर बताया। वह भारत को हमेशा याद रखेंगे। वह सिक्किम, भूटान आदि देशों में बुद्ध भगवान के स्थलों का भ्रमण करेेंगे। नगर के समाज सेवी अगम जैन और विपिन जैन ने उन्हें गुरुद्वारे में रात्रि विश्राम के लिए ठहराया। जहां से वह बुधवार सवेरे आठ बजे यात्रा के लिए रवाना हो गए। अगम जैन ने उन्हें भेंट स्वरूप नकदी, कपड़े, मोजे और दवाई भेंट की।
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अफजलगढ़। विश्व शांति पदयात्रा पर निकले जर्मन निवासी थॉमस मंगलवार शाम अफजलगढ़ पहुंचे। जर्मन से म्यांमार की पदयात्रा पर निकले जर्मन के शहर इंगे हेमवर्ग निवासी थामस (51) ने बताया कि वह विश्व शांति के लिए जर्मन से म्यांमार तक की पदयात्रा कर रहे हैं। वह 28 अप्रैल 2012 को विश्व शांति के लिए अपने शहर से रवाना हुए। जो टर्की, ईरान, अफगानिस्तान व अरब देशों की यात्रा कर चुके हैं। पाकिस्तान से भारत जाने के लिए वीजा न मिलने के कारण वह अफगानिस्तान से हवाई यात्रा कर भारत पहुंचे। भारत भ्रमण कर वह नेपाल पहुंचेंगे।
थामस जब अफजलगढ़ में पहुंचे तो उन्हें देखने वालों की भीड़ जमा हो गई। एक प्रश्न के जवाब में थॉमस ने बताया कि वह यात्रा के दौरान किसी भी घर का दरवाजा खटखटा कर भोजन प्राप्त कर लेते हैं। खर्च के लिए उन्होंने किसी से पैसा नहीं मांगा है, बल्कि काफी लोगों ने अपनी इच्छा से जो दान दिया उसी से वह अपना खर्च कर रहे हैं। सात वर्ष में उन्होंने लगभग चार हजार किमी पदयात्रा कर ली है। वह दो वर्ष में अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचेंगे। वहां से वह अपने शहर को वापस चले जाएंगे। अपने देश और शहर के लोगों से अनुभव साझा करेंगे।
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भारत पहुंचने पर उन्होंने बताया कि यह यूरोप से भिन्न है। यहां के निवासियों, वातावरण, प्रकृति, संस्कृति और पशु पक्षियों की प्रशंसा की। कहा कि भारत में उन्हें बहुत अच्छा लगा। भारत को उन्होंने सभी देशों में सुंदर बताया। वह भारत को हमेशा याद रखेंगे। वह सिक्किम, भूटान आदि देशों में बुद्ध भगवान के स्थलों का भ्रमण करेेंगे। नगर के समाज सेवी अगम जैन और विपिन जैन ने उन्हें गुरुद्वारे में रात्रि विश्राम के लिए ठहराया। जहां से वह बुधवार सवेरे आठ बजे यात्रा के लिए रवाना हो गए। अगम जैन ने उन्हें भेंट स्वरूप नकदी, कपड़े, मोजे और दवाई भेंट की।
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