{"_id":"5b9ff8dd867a557f5d4c39f7","slug":"71537210589-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोहर्रम की छठी तारीख पर कई जगह हुए मातमी आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहर्रम की छठी तारीख पर कई जगह हुए मातमी आयोजन
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
याद किया करबला के शहीदों को
मंडावली/नजीबाबाद। मोहर्रम की छठी तारीख पर जटपुराबौंडा, जोगीरम्पुरी और मेमन भनेड़ा में मजलिस और नोहाख्वानी के मातमी आयोजन किए गए। जुलूस भी बरामद किए गए।
मंडावली थाना क्षेत्र के गांव जटपुराबौंडा में शमीम अली के आवास पर मातमी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गजनफर अब्बास जैदी ने कहा कि करबला के शहीदों ने अपनी बेशकीमती कुर्बानी देकर क्रूर बादशाह यजीद के घमंड को तोड़ा। मातमी मजलिस के बाद जुलूस बरामद किया गया। इमामबाड़े पर जाकर जुलूस समाप्त हुआ।
उधर जोगीरम्पुरी में शिया समाज की ओर से फिरोज इरानी के मकान पर मातमी मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना आबिद मेहदी ने कहा कि करबला की जंग हमें दीन और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानियों की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए जो कुर्बानियां दीं वो हमारे लिए हमेशा-हमेशा सबक बनीं रहेंगी।
विज्ञापन
मजलिस के बाद नोहा और मर्सिया ख्वानी के साथ जुलूस बरामद किए गए। मोहर्रम अली, फिरोज इरानी, शेलअली के नेतृत्व में मर्सिया ख्वानी और वाजिद रजा, फिरोज हैदर, साजिद रजा, शोबी, अर्शी ने नोहाख्वानी में भाग लिया। उधर मेमन भनेड़ा में भी मातमी मजलिसों और जुलूस बरामद करने का सिलसिला जारी है।
विज्ञापन
मंडावली/नजीबाबाद। मोहर्रम की छठी तारीख पर जटपुराबौंडा, जोगीरम्पुरी और मेमन भनेड़ा में मजलिस और नोहाख्वानी के मातमी आयोजन किए गए। जुलूस भी बरामद किए गए।
मंडावली थाना क्षेत्र के गांव जटपुराबौंडा में शमीम अली के आवास पर मातमी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गजनफर अब्बास जैदी ने कहा कि करबला के शहीदों ने अपनी बेशकीमती कुर्बानी देकर क्रूर बादशाह यजीद के घमंड को तोड़ा। मातमी मजलिस के बाद जुलूस बरामद किया गया। इमामबाड़े पर जाकर जुलूस समाप्त हुआ।
विज्ञापन
उधर जोगीरम्पुरी में शिया समाज की ओर से फिरोज इरानी के मकान पर मातमी मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना आबिद मेहदी ने कहा कि करबला की जंग हमें दीन और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानियों की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए जो कुर्बानियां दीं वो हमारे लिए हमेशा-हमेशा सबक बनीं रहेंगी।
विज्ञापन
मजलिस के बाद नोहा और मर्सिया ख्वानी के साथ जुलूस बरामद किए गए। मोहर्रम अली, फिरोज इरानी, शेलअली के नेतृत्व में मर्सिया ख्वानी और वाजिद रजा, फिरोज हैदर, साजिद रजा, शोबी, अर्शी ने नोहाख्वानी में भाग लिया। उधर मेमन भनेड़ा में भी मातमी मजलिसों और जुलूस बरामद करने का सिलसिला जारी है।