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बारिश से खो नदी का कटान बढ़ा
Updated Tue, 04 Sep 2018 12:32 AM IST
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बारिश से खो नदी का कटान बढ़ा
स्योहारा। लगातार हो रही बारिश के कारण खो नदी खेती की भूमि को काट रही है। गांव जोतहिम्मा के किसानों की 300 बीघा जमीन खो नदी में समा गई। नदी से हो रहे कटान के कारण ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का कटान इसी तरह चलता रहा तो ग्रामीण अपनी सारी कृषि भूमि से वंचित हो जाएंगे।
खो नदी गांव सद्दोबेरखा के पास से होकर जाती है। यहां गांव जोतहिम्मा के किसानों की कृषि भूमि है। खो नदी की धार 2007 से पहले गांव से दूर उत्तर की ओर बहती थी। 2007 में नदी के गांव के पास आ जाने से खेतों के कटान और बाढ़ की आशंका को देखते हुए कच्चा स्टड लगाया गया था। जब से ही हर वर्ष यहां कच्चा स्टड लगाया जाता है। इस बार पहाड़ों सहित क्षेत्र में हो रही लगातार वर्षा के कारण नदी ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया।
किसान दो माह से भी अधिक समय से यहां पक्का तटबंध बनाने की मांग करते चले आ रहे हैं। पक्का तटबंध न होने के कारण खो नदी द्वारा किए गए कटान से 48 से भी अधिक किसानों की 300 बीघा से भी अधिक खेती की भूमि, मय फसल के नदी के आगोश में समा गई गई है। जोतहिम्मा के सीताराम, राजेंद्र सिंह, चेतन सिंह, दौलत सिंह, सुनील कुमार, जगदीश, हरप्रशाद, जयपाल सिंह, सचिन, वीर सिंह, सुभाष, जयसिंह, नरेश, सुरेश, राजपाल, भूपेंद्र कुमार, गणेश, अमित, संजीव, जयवीर, शूरवीर, धर्मवीर, गोपाल, हरपाल, रमेश, अवधेश आदि की 300 बीघा से अधिक भूमि खो कटान के कारण नदी की भेंट चढ़ चुकी है। सीताराम, राजेन्द्र, योगेश, शौराज, मगन आदि का कहना है कि भूमि न होने से किसान कर्जदार होकर आत्महत्या करने को मजबूर होगा।। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राम बाबू का कहना है कि अभी नदी ने गांव को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। यदि खेतों की भूमि का कटान हो रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
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स्योहारा। लगातार हो रही बारिश के कारण खो नदी खेती की भूमि को काट रही है। गांव जोतहिम्मा के किसानों की 300 बीघा जमीन खो नदी में समा गई। नदी से हो रहे कटान के कारण ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का कटान इसी तरह चलता रहा तो ग्रामीण अपनी सारी कृषि भूमि से वंचित हो जाएंगे।
खो नदी गांव सद्दोबेरखा के पास से होकर जाती है। यहां गांव जोतहिम्मा के किसानों की कृषि भूमि है। खो नदी की धार 2007 से पहले गांव से दूर उत्तर की ओर बहती थी। 2007 में नदी के गांव के पास आ जाने से खेतों के कटान और बाढ़ की आशंका को देखते हुए कच्चा स्टड लगाया गया था। जब से ही हर वर्ष यहां कच्चा स्टड लगाया जाता है। इस बार पहाड़ों सहित क्षेत्र में हो रही लगातार वर्षा के कारण नदी ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया।
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किसान दो माह से भी अधिक समय से यहां पक्का तटबंध बनाने की मांग करते चले आ रहे हैं। पक्का तटबंध न होने के कारण खो नदी द्वारा किए गए कटान से 48 से भी अधिक किसानों की 300 बीघा से भी अधिक खेती की भूमि, मय फसल के नदी के आगोश में समा गई गई है। जोतहिम्मा के सीताराम, राजेंद्र सिंह, चेतन सिंह, दौलत सिंह, सुनील कुमार, जगदीश, हरप्रशाद, जयपाल सिंह, सचिन, वीर सिंह, सुभाष, जयसिंह, नरेश, सुरेश, राजपाल, भूपेंद्र कुमार, गणेश, अमित, संजीव, जयवीर, शूरवीर, धर्मवीर, गोपाल, हरपाल, रमेश, अवधेश आदि की 300 बीघा से अधिक भूमि खो कटान के कारण नदी की भेंट चढ़ चुकी है। सीताराम, राजेन्द्र, योगेश, शौराज, मगन आदि का कहना है कि भूमि न होने से किसान कर्जदार होकर आत्महत्या करने को मजबूर होगा।। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राम बाबू का कहना है कि अभी नदी ने गांव को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। यदि खेतों की भूमि का कटान हो रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
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