{"_id":"5b8ae58642c79210c7581cc7","slug":"71535829382-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनपद में साल में 300 लोग मरते हैं टीबी रोग से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनपद में साल में 300 लोग मरते हैं टीबी रोग से
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में हर साल 300 लोग मरते हैं टीबी से : डीटीओ
बिजनौर। भारत में हर साल टीबी से करीब 28 लाख लोगों की मौत हो जाती है। उत्तर प्रदेश में मरने वालों की संख्या एक लाख के आसपास होती है, जबकि जिले में प्रतिवर्ष करीब 300 लोग काल के गाल में समा जाते हैं। यह बात जिला क्षय रोग अधिकारी डा. बीएस रावत ने कही।
एक सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला क्षय रोग अधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो टीबी से मरने वालों की श्रेणी में भारत नंबर वन पर है। इस जानलेवा बीमारी से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। जागरूकता और दवा नहीं लेने के अभाव में ही ज्यादातर लोगों की जान जाती है। भारत सरकार टीबी पर सबसे ज्यादा खर्च करती है। इसके बावजूद अधिकांश लोग इस रोग को गंभीरता से नहंीं लेते हैं। औसतन प्रति रोगी सरकार कितना खर्च करती है? के सवाल पर उन्होंने बताया कि सामान्य स्थिति में प्रतिवर्ष करीब 24 हजार रुपये खर्च होते हैं। कहा कि सामान्य रोगी का 11 महीने और गंभीर रोगी को 27 महीने तक डॉट्स के माध्यम से इलाज किया जाता है। यदि मरीज लगातार इलाज करता है तो उसके पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना रहती है। कहा कि जिले में करीब 3276 मरीज इलाज पर हैं। 12 लैब के माध्यम से रोगियों की जांच की जा रही है। उन्होंने सभी जनपद वासियों से खोजी टीम का सहयोग करने की अपील की है।
इस अवसर पर सीएमओ राकेश मित्तल, डीएमओ ब्रजभूषण सिंह, एसीएमओ महेंद्र सिंह, पीआर नायर, प्रवीण कुमार, नितिन श्रीवास्तव, नकुल कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
बिजनौर। भारत में हर साल टीबी से करीब 28 लाख लोगों की मौत हो जाती है। उत्तर प्रदेश में मरने वालों की संख्या एक लाख के आसपास होती है, जबकि जिले में प्रतिवर्ष करीब 300 लोग काल के गाल में समा जाते हैं। यह बात जिला क्षय रोग अधिकारी डा. बीएस रावत ने कही।
एक सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला क्षय रोग अधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो टीबी से मरने वालों की श्रेणी में भारत नंबर वन पर है। इस जानलेवा बीमारी से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। जागरूकता और दवा नहीं लेने के अभाव में ही ज्यादातर लोगों की जान जाती है। भारत सरकार टीबी पर सबसे ज्यादा खर्च करती है। इसके बावजूद अधिकांश लोग इस रोग को गंभीरता से नहंीं लेते हैं। औसतन प्रति रोगी सरकार कितना खर्च करती है? के सवाल पर उन्होंने बताया कि सामान्य स्थिति में प्रतिवर्ष करीब 24 हजार रुपये खर्च होते हैं। कहा कि सामान्य रोगी का 11 महीने और गंभीर रोगी को 27 महीने तक डॉट्स के माध्यम से इलाज किया जाता है। यदि मरीज लगातार इलाज करता है तो उसके पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना रहती है। कहा कि जिले में करीब 3276 मरीज इलाज पर हैं। 12 लैब के माध्यम से रोगियों की जांच की जा रही है। उन्होंने सभी जनपद वासियों से खोजी टीम का सहयोग करने की अपील की है।
विज्ञापन
इस अवसर पर सीएमओ राकेश मित्तल, डीएमओ ब्रजभूषण सिंह, एसीएमओ महेंद्र सिंह, पीआर नायर, प्रवीण कुमार, नितिन श्रीवास्तव, नकुल कुमार आदि मौजूद रहे।