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विद्मुत निगम ने शुरू की एमआरआई व्यवस्था
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:52 AM IST
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विद्युत निगम ने शुरू की एमआरआई व्यवस्था
बिजनौर। जिले मे 10 किलोवाट या उससे अधिक विद्युत भार वाले उपभोक्ताओं पर निगाह रखने की एम आरआई अर्थात मीटर रीडर इंस्टरयुमेंट व्यवस्था लागू हो गई है । जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया है। अधीक्षण अभियंता सीपी सिंह के अनुसार शासन बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त है। इसके लिए द्विस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है ।
विद्युत निगम 10 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले उपभोक्ताओं पर निगाह रखे है । इसके लिए एम आर आई व्यवस्था लागू की गई है। पूरी व्यवस्था कंप्यूटीराइज है। यदि 10 किलोवाट या उससे अधिक भार वाले उपभोक्ता का बिल कम आता है तो एक्सीएन टेस्टिंग की टीम जांच करती है। गड़बड़ी मिलने पर आंकलन करके बिल वसूला जाता है। मीटर मे सप्लाई नहीं जाने पर कमी पकड़ में आ जाती है। जिले में डिविजन वार टीम निगाह रख रही हैं। डिविजन वार बिलों के विश्लेषण का काम चल रहा है। यदि कोई बिजली चोरी का मामला आता है तो उसकी भी जांच होती है।
लखनऊ से हो रही है मानीटरिंग
बिजनौर। अधीक्षण अभियंता के अनुसार जिला स्तर पर भी एमआरआई व्यवस्था आकलन में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती।निगम के लखनऊ हेडक्वार्टर से इसकी मानीटरिंग होती है। वर्तमान मे बिल की आनलाइन व्यवस्था है। बिल अपलोड होने पर मुख्यालय कमी पकड़ लेता है। जिले मे स्मार्ट मीटर लगाने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है । कंपनी का प्रतिनिधि उनसे मिला है।
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बिजनौर। जिले मे 10 किलोवाट या उससे अधिक विद्युत भार वाले उपभोक्ताओं पर निगाह रखने की एम आरआई अर्थात मीटर रीडर इंस्टरयुमेंट व्यवस्था लागू हो गई है । जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया है। अधीक्षण अभियंता सीपी सिंह के अनुसार शासन बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त है। इसके लिए द्विस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है ।
विद्युत निगम 10 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले उपभोक्ताओं पर निगाह रखे है । इसके लिए एम आर आई व्यवस्था लागू की गई है। पूरी व्यवस्था कंप्यूटीराइज है। यदि 10 किलोवाट या उससे अधिक भार वाले उपभोक्ता का बिल कम आता है तो एक्सीएन टेस्टिंग की टीम जांच करती है। गड़बड़ी मिलने पर आंकलन करके बिल वसूला जाता है। मीटर मे सप्लाई नहीं जाने पर कमी पकड़ में आ जाती है। जिले में डिविजन वार टीम निगाह रख रही हैं। डिविजन वार बिलों के विश्लेषण का काम चल रहा है। यदि कोई बिजली चोरी का मामला आता है तो उसकी भी जांच होती है।
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लखनऊ से हो रही है मानीटरिंग
बिजनौर। अधीक्षण अभियंता के अनुसार जिला स्तर पर भी एमआरआई व्यवस्था आकलन में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती।निगम के लखनऊ हेडक्वार्टर से इसकी मानीटरिंग होती है। वर्तमान मे बिल की आनलाइन व्यवस्था है। बिल अपलोड होने पर मुख्यालय कमी पकड़ लेता है। जिले मे स्मार्ट मीटर लगाने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है । कंपनी का प्रतिनिधि उनसे मिला है।
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