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पांच करोड़ रुपये लैप्स
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:44 PM IST
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बिजनौर। वित्तीय वर्ष की अंतिम तारीख पर शनिवार को करीब आधी रात तक सरकारी कार्यालयों में काम होता रहा है। पूरे साल विभाग जिस बजट की मांग करते रहे वह वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद मिला। यह बजट लैप्स हो गया है। साथ ही कई विभागों के करोड़ों रुपये इस्तेमाल न होने के कारण शासन को लौटाने पड़े।
मार्च के आखिरी तीन दिन छुट्टी होने के बाद भी सरकारी कार्यालय खुले रहे। कार्यालयों में क्लोजिंग संबंधी काम होता रहा। शासन द्वारा क्लोजिंग संबंधी कोई भी कार्य आठ बजे तक खत्म करने के निर्देश दिए थे। आठ बजे के बाद कोई एंट्री नहीं होनी थी। बाद में कर्मचारियों को दो और घंटे का समय दिया गया। कई विभागों ने अनेक योजनाओं के लिए शासन से बजट मांग रखा था, लेकिन पूरे साल बजट नहीं मिला। कई विभागों को रात दस बजे के बाद बजट जारी किया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा परिषद, नगर पंचायतों, स्वास्थ्य विभाग को दस बजे के बाद करीब पांच करोड़ रुपये का बजट मिला। यह बजट लैप्स हो गया। इसके अलावा कई विभागों ने बजट पूरा खर्च न होने पर इसे लौटा दिया गया। इनमें पालिकाओं, उद्यान विभाग सहित निर्माण कार्यों से जुड़े कई विभागों का बजट था। कुल 15 करोड़ का बजट सरेंडर होने का अनुमान है। आमतौर पर पहले क्लोजिंग पर 31 मार्च को पूरी रात काम होता था। बैंकों में अगले दिन एक अप्रैल को भी क्लोजिंग का ही काम होता था, लेकिन इस बार क्लोजिंग का समय दस बजे निर्धारित किए जाने से कर्मचारियों को राहत मिली।
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मार्च के आखिरी तीन दिन छुट्टी होने के बाद भी सरकारी कार्यालय खुले रहे। कार्यालयों में क्लोजिंग संबंधी काम होता रहा। शासन द्वारा क्लोजिंग संबंधी कोई भी कार्य आठ बजे तक खत्म करने के निर्देश दिए थे। आठ बजे के बाद कोई एंट्री नहीं होनी थी। बाद में कर्मचारियों को दो और घंटे का समय दिया गया। कई विभागों ने अनेक योजनाओं के लिए शासन से बजट मांग रखा था, लेकिन पूरे साल बजट नहीं मिला। कई विभागों को रात दस बजे के बाद बजट जारी किया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा परिषद, नगर पंचायतों, स्वास्थ्य विभाग को दस बजे के बाद करीब पांच करोड़ रुपये का बजट मिला। यह बजट लैप्स हो गया। इसके अलावा कई विभागों ने बजट पूरा खर्च न होने पर इसे लौटा दिया गया। इनमें पालिकाओं, उद्यान विभाग सहित निर्माण कार्यों से जुड़े कई विभागों का बजट था। कुल 15 करोड़ का बजट सरेंडर होने का अनुमान है। आमतौर पर पहले क्लोजिंग पर 31 मार्च को पूरी रात काम होता था। बैंकों में अगले दिन एक अप्रैल को भी क्लोजिंग का ही काम होता था, लेकिन इस बार क्लोजिंग का समय दस बजे निर्धारित किए जाने से कर्मचारियों को राहत मिली।
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