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जो मनुष्य धरती को स्वर्ग बना रहे वह परमेश्वर की पवित्र आत्मा- बाबा फुलसंदे वाले
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:23 AM IST
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बिजनौर । एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा मंत्र के सतपुरुष बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि धरती स्वर्ग बने, सभी मनुष्य देवता। उन्होंने कहा कि धर्म का पालन करने से सफलता की प्राप्ति होती है जिससे पूरे विश्व में शांति बनी रहती है।
रविवार को बाबा फुलसंदे वाले बाबा ने काकरान वाटिका में सत्संग का आयोजन किया। सत्संग में उन्होंने कहा कि जो मनुष्य धरती को स्वर्ग बनाने में लगे है वह परमेश्वर की पवित्र आत्माएं है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर के भीतर पशु और देवता दोनों निवास करते है। पृथ्वी को स्वर्ग और नर्क बनाना मनुष्य के हाथ में है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर चिंतन की एक झील है। इसके तट पर अशुद्ध चिंतन की काली बकरियां घूमती हैं। वे सदा अतृप्त रहती है जो पाप से उत्पन्न वासनाओं की परछाईयों है। वह सारे जगत को अशांत करती है। पर उस झील में सुनहरे स्वर्ण कमल भी खिलते है, वह पुष्प शुभ चिंतन से पैदा होते है और इनमें ऋषि आत्माओं के विचार होते है। बाबा ने कहा कि बुराई से दूर रहना ही सद बुद्धि है। परमेश्वर में अटूट विश्वास रखना प्रज्ञा है। बाबा ने कुष्ट आश्रम में जाकर वहां रह रहे लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। सत्संग में देशराज सिंह, निपेद्र चौधरी, करन सिंह, नरेंद्र सिंह, सुरेश सिंह, अनिल, खेम सिंह, नरपाल सिंह, मलखान सिंह, शौनाथ सिंह और ओकार सिंह मौजूद रहे।
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रविवार को बाबा फुलसंदे वाले बाबा ने काकरान वाटिका में सत्संग का आयोजन किया। सत्संग में उन्होंने कहा कि जो मनुष्य धरती को स्वर्ग बनाने में लगे है वह परमेश्वर की पवित्र आत्माएं है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर के भीतर पशु और देवता दोनों निवास करते है। पृथ्वी को स्वर्ग और नर्क बनाना मनुष्य के हाथ में है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर चिंतन की एक झील है। इसके तट पर अशुद्ध चिंतन की काली बकरियां घूमती हैं। वे सदा अतृप्त रहती है जो पाप से उत्पन्न वासनाओं की परछाईयों है। वह सारे जगत को अशांत करती है। पर उस झील में सुनहरे स्वर्ण कमल भी खिलते है, वह पुष्प शुभ चिंतन से पैदा होते है और इनमें ऋषि आत्माओं के विचार होते है। बाबा ने कहा कि बुराई से दूर रहना ही सद बुद्धि है। परमेश्वर में अटूट विश्वास रखना प्रज्ञा है। बाबा ने कुष्ट आश्रम में जाकर वहां रह रहे लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। सत्संग में देशराज सिंह, निपेद्र चौधरी, करन सिंह, नरेंद्र सिंह, सुरेश सिंह, अनिल, खेम सिंह, नरपाल सिंह, मलखान सिंह, शौनाथ सिंह और ओकार सिंह मौजूद रहे।
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