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नगीना में हुआ 60 हजार बीघा जमीन का घोटाला
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नगीना में हुआ 60 हजार बीघा जमीन का घोटाला
बिजनौर। बिजनौर और चांदपुर तहसील में वन विभाग की जमीन गायब होने का मामला सामने आया है। जिले में इससे पहले भी नगीना में जमीन घोटाला सामने आ चुका हैं। नगीना तहसील के 12 गांवों के राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री होना पाया गया था। यह मामला शासन तक पहुंचा, टीम भी गठित हुई। इसके बाद बैनामों पर भी रोक लगी थी।
साल 2019 में नगीना तहसील में तेलीपाड़ा, राजपुर कोट आदि 12 गांवों की जमीनों के राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की शिकायत हुई थी। शुरुआती जांच हुई तो तहसील प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री होना पाया गया था। सामने आया था कि फसली वर्ष 1959 में कूट रचित एंट्री करते हुए एक रसूखदार के नाम जमीन कर दी गई थी। इसके बाद बैनामा दर बैनामा होते रहे और मामला उलझता गया। अभिलेखों में जिस आदेश का हवाला देते हुए खतौनी में नाम दर्ज किया गया, उक्त आदेश की कोई कॉपी भी नहीं मिली थी। सिर्फ एक लाइन लिखकर ही हजारों बीघा जमीन पर मालिकाना हक दे दिया गया। इतना ही नहीं नदी, रास्तों और झाड़ी जंगल की जमीनों को पर भी मालिकाना हक दिया गया। मामला शासन में पहुंचा तो चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज चुकी है। मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि इन जमीनों के बैनामों पर भी रोक लगानी पड़ी। अभी तक कुछ जगहों पर रोक लगी हुई है।
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बिजनौर। बिजनौर और चांदपुर तहसील में वन विभाग की जमीन गायब होने का मामला सामने आया है। जिले में इससे पहले भी नगीना में जमीन घोटाला सामने आ चुका हैं। नगीना तहसील के 12 गांवों के राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री होना पाया गया था। यह मामला शासन तक पहुंचा, टीम भी गठित हुई। इसके बाद बैनामों पर भी रोक लगी थी।
साल 2019 में नगीना तहसील में तेलीपाड़ा, राजपुर कोट आदि 12 गांवों की जमीनों के राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की शिकायत हुई थी। शुरुआती जांच हुई तो तहसील प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री होना पाया गया था। सामने आया था कि फसली वर्ष 1959 में कूट रचित एंट्री करते हुए एक रसूखदार के नाम जमीन कर दी गई थी। इसके बाद बैनामा दर बैनामा होते रहे और मामला उलझता गया। अभिलेखों में जिस आदेश का हवाला देते हुए खतौनी में नाम दर्ज किया गया, उक्त आदेश की कोई कॉपी भी नहीं मिली थी। सिर्फ एक लाइन लिखकर ही हजारों बीघा जमीन पर मालिकाना हक दे दिया गया। इतना ही नहीं नदी, रास्तों और झाड़ी जंगल की जमीनों को पर भी मालिकाना हक दिया गया। मामला शासन में पहुंचा तो चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज चुकी है। मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि इन जमीनों के बैनामों पर भी रोक लगानी पड़ी। अभी तक कुछ जगहों पर रोक लगी हुई है।
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