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जिले की 60 फीसदी आबादी सस्ते गल्ले पर निर्भर
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जिले की 60 फीसदी आबादी सस्ते गल्ले पर निर्भर
बिजनौर। प्रदेश सरकार की जनसंख्या नीति की बात सब जगह हो रही है। आबादी को नियंत्रित रखने के लिए किए जा रहे प्रावधानों के कुछ लोग खिलाफ हैं तो कुछ साथ। जिला भी इससे अछूता नहीं है। खेती से संपन्न जिले की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी सरकार से सस्ते गल्ले से मिलने वाला अनाज खा रही है। जितने पंजीकरण सेवायोजन कार्यालय में हैं उसके मुकाबले दस प्रतिशत लोगों को भी रोजगार नहीं मिल रहा है। अगर जनसंख्या नीति लागू होती है तो आज नहीं तो 20 साल बाद भी स्थिति काफी बेहतर हो जाएगी।
जिले में खेती के साथ-साथ उद्योग धंधे भी काफी पनप रहे हैं। काफी लोग नौकरी भी करते हैं और व्यापार भी। गरीबी और अमीरी हर जगह होती है और जिला भी इससे अछूता नहीं है। जिले में काफी लोग आज भी दो जून की रोटी के लिए मेहनत कर रहे हैं और आर्थिक रूप से सरकार की कई योजनाओं पर आश्रित हैं। केंद्र सरकार की ओर से पात्र परिवारों को दो रुपये प्रति किलो गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो चावल सस्ते गल्ले की दुकानों से दिलाया जाता है।
एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में जिले की आबादी 40 लाख होगी, जबकि 26 लाख से अधिक लोग आज भी सरकार की ओर से सस्ते गल्ले पर मिलने वाला गेहूं और चावल पर ही निर्भर हैं। इन परिवारों का जीवन स्तर आज भी निम्न स्तर का है। समय के साथ आबादी बढ़ी, लेकिन इन परिवारों के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है। बेरोजगार भी लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि के अनुसार छोटे परिवार को अच्छी शिक्षा व अच्छा जीवन स्तर दिया जा सकता है। जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग देना सभी का दायित्व भी है।
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20 साल पहले थे केवल 15 पंजीकरण
सेवायोजन विभाग में पंजीकरण कराने वाले लोगों को रोजगार ढूंढने में मदद मिलती है। साल 1991 में सेवायोजन विभाग में केवल 15 पंजीकरण थे। अब इनकी संख्या 42 हजार से अधिक हो चुकी है और एक बार तो बेरोजगारी भत्ते के लिए विभाग में करीब एक लाख पंजीकरण हो चुके थे। जबकि रोजगार डेढ़ से दो हजार लोगों को ही मिल पाता है।
साल राशन कार्ड यूनिट
जनवरी 2018 561299 2608939
जनवरी 2019 591283 2521576
जनवरी 2020 622022 2657718
जनवरी 2021 595263 2588654
बेरोजगारी में पंजीकरण
साल पंजीकरण
2012 37684
2013 94975
2014 97470
2015 97752
2016 41296
2017 24500
2018 23579
2019 36302
2020 40540
2021 42665
(नोट : आंकड़े विभागों से लिए गए हैं।)
साल जिले की आबादी
1951 979406
1961 1184306
1971 1480734
1981 1927023
1991 2454521
2001 3131619
2011 3682713
2021 4000000
(नोट : 2021 की जनसंख्या अनुमानित और बाकी साल की जनगणना पर आधारित है।)
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बिजनौर। प्रदेश सरकार की जनसंख्या नीति की बात सब जगह हो रही है। आबादी को नियंत्रित रखने के लिए किए जा रहे प्रावधानों के कुछ लोग खिलाफ हैं तो कुछ साथ। जिला भी इससे अछूता नहीं है। खेती से संपन्न जिले की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी सरकार से सस्ते गल्ले से मिलने वाला अनाज खा रही है। जितने पंजीकरण सेवायोजन कार्यालय में हैं उसके मुकाबले दस प्रतिशत लोगों को भी रोजगार नहीं मिल रहा है। अगर जनसंख्या नीति लागू होती है तो आज नहीं तो 20 साल बाद भी स्थिति काफी बेहतर हो जाएगी।
जिले में खेती के साथ-साथ उद्योग धंधे भी काफी पनप रहे हैं। काफी लोग नौकरी भी करते हैं और व्यापार भी। गरीबी और अमीरी हर जगह होती है और जिला भी इससे अछूता नहीं है। जिले में काफी लोग आज भी दो जून की रोटी के लिए मेहनत कर रहे हैं और आर्थिक रूप से सरकार की कई योजनाओं पर आश्रित हैं। केंद्र सरकार की ओर से पात्र परिवारों को दो रुपये प्रति किलो गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो चावल सस्ते गल्ले की दुकानों से दिलाया जाता है।
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एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में जिले की आबादी 40 लाख होगी, जबकि 26 लाख से अधिक लोग आज भी सरकार की ओर से सस्ते गल्ले पर मिलने वाला गेहूं और चावल पर ही निर्भर हैं। इन परिवारों का जीवन स्तर आज भी निम्न स्तर का है। समय के साथ आबादी बढ़ी, लेकिन इन परिवारों के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है। बेरोजगार भी लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि के अनुसार छोटे परिवार को अच्छी शिक्षा व अच्छा जीवन स्तर दिया जा सकता है। जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग देना सभी का दायित्व भी है।
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20 साल पहले थे केवल 15 पंजीकरण
सेवायोजन विभाग में पंजीकरण कराने वाले लोगों को रोजगार ढूंढने में मदद मिलती है। साल 1991 में सेवायोजन विभाग में केवल 15 पंजीकरण थे। अब इनकी संख्या 42 हजार से अधिक हो चुकी है और एक बार तो बेरोजगारी भत्ते के लिए विभाग में करीब एक लाख पंजीकरण हो चुके थे। जबकि रोजगार डेढ़ से दो हजार लोगों को ही मिल पाता है।
साल राशन कार्ड यूनिट
जनवरी 2018 561299 2608939
जनवरी 2019 591283 2521576
जनवरी 2020 622022 2657718
जनवरी 2021 595263 2588654
बेरोजगारी में पंजीकरण
साल पंजीकरण
2012 37684
2013 94975
2014 97470
2015 97752
2016 41296
2017 24500
2018 23579
2019 36302
2020 40540
2021 42665
(नोट : आंकड़े विभागों से लिए गए हैं।)
साल जिले की आबादी
1951 979406
1961 1184306
1971 1480734
1981 1927023
1991 2454521
2001 3131619
2011 3682713
2021 4000000
(नोट : 2021 की जनसंख्या अनुमानित और बाकी साल की जनगणना पर आधारित है।)