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सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों मे शिक्षकों के हजारो पद खाली
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सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 550 पद खाली
बिजनौर। जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद वर्षों से खाली हैं। विद्यालय प्रबंधकीय व्यवस्था में अल्पकालीन शिक्षक रखकर काम चला रहे हैं।
जिले में 73 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। विद्यालयों में शिक्षकों के 1464 पद सृजित हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनुसार वर्तमान में 916 शिक्षक कार्यरत हैं। इन विद्यालयों में प्रवक्ता के 83 तथा सहायक अध्यापक के 465 पद खाली हैं। कार्यालय के अनुसार सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों मे शिक्षकों की नियुक्ति के लिए माध्यमिक शिक्षक चयन आयोग गठित है। शासन ने 1996 में तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की थी। वर्ष 2000 के बाद कोई नियुक्ति नहीं हुई। शिक्षकों की नियुक्ति बंद होने के बाद विद्यालय अल्पकालीन शिक्षक रखकर काम चला रहे हैं। कोर्ट ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लिया। जिन विद्यालयों की प्रबंध समितियों ने पाबंदी के बाद भी शिक्षकों की नियुक्ति कर ली है, उन्हें रद्द कर दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हटाए गए शिक्षकों को वेटेज दिया जाए। नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा हो।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभूतपूर्व
बिजनौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2000 के बाद प्रबंध समिति द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षको की नियुक्ति रद्द किए जाने का फैसले को अभूतपूर्व माना जा रहा है। जिला विद्यालय कार्यालय के अनुसार जिले में 1996 में तदर्थ शिक्षक रखे गए थे। शासन ने सभी को नियमित कर दिया है। बताया कि वर्ष 2000 के बाद कोई तदर्थ नियुक्ति नहीं हुई है। साथ ही जिले के किसी विद्यालय में वर्ष 2000 के बाद प्रबंध समिति द्वारा किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है।
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बिजनौर। जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद वर्षों से खाली हैं। विद्यालय प्रबंधकीय व्यवस्था में अल्पकालीन शिक्षक रखकर काम चला रहे हैं।
जिले में 73 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। विद्यालयों में शिक्षकों के 1464 पद सृजित हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनुसार वर्तमान में 916 शिक्षक कार्यरत हैं। इन विद्यालयों में प्रवक्ता के 83 तथा सहायक अध्यापक के 465 पद खाली हैं। कार्यालय के अनुसार सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों मे शिक्षकों की नियुक्ति के लिए माध्यमिक शिक्षक चयन आयोग गठित है। शासन ने 1996 में तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की थी। वर्ष 2000 के बाद कोई नियुक्ति नहीं हुई। शिक्षकों की नियुक्ति बंद होने के बाद विद्यालय अल्पकालीन शिक्षक रखकर काम चला रहे हैं। कोर्ट ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लिया। जिन विद्यालयों की प्रबंध समितियों ने पाबंदी के बाद भी शिक्षकों की नियुक्ति कर ली है, उन्हें रद्द कर दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हटाए गए शिक्षकों को वेटेज दिया जाए। नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा हो।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभूतपूर्व
बिजनौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2000 के बाद प्रबंध समिति द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षको की नियुक्ति रद्द किए जाने का फैसले को अभूतपूर्व माना जा रहा है। जिला विद्यालय कार्यालय के अनुसार जिले में 1996 में तदर्थ शिक्षक रखे गए थे। शासन ने सभी को नियमित कर दिया है। बताया कि वर्ष 2000 के बाद कोई तदर्थ नियुक्ति नहीं हुई है। साथ ही जिले के किसी विद्यालय में वर्ष 2000 के बाद प्रबंध समिति द्वारा किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है।
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