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बुखार तक की दवा से विहीन है जिला अस्पताल
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:54 AM IST
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बुखार तक की दवा से विहीन है जिला अस्पताल
बिजनौर। जिले में एक ओर जहां वायरल का कहर जारी है तो वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में सामान्य बुखार को कंट्रोल करने वाली दवा पैरासिटामोल तक भी उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को बाहर से दवा लाने को मजबूर हो रहा है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवाइयां मुहैया कराने का ढिंढौरा पीटने वाले स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल की ओर से आंखें मूंद ली हैं। यह इसी का नतीजा है कि सामान्य बुखार तक को नियंत्रित करने वाली पैरासिटामोल तक की टैबलेट भी जिला अस्पताल में नहीं है। सरकार की मंशा है कि लोगों सरकारी अस्पताल में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, लेकिन इसके अनुरूप लोगों को सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं मरीजों को दवाइयां तक भी बाहर से लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रतिदिन जिला अस्पताल में करीब 950 मरीज विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त होकर अपना इलाज कराने के लिए आते हैं, वहां के अधिकांश चिकित्सकों द्वारा दवाओं की पर्ची बाहर से लिखकर देते हैं। वर्तमान में अस्पताल में पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल, पेट दर्द की सिरप व टैबलेट, खांसी संबंधी आंखों के ड्रॉप और स्केबीज (संक्रमण से होने वाली खुजली की दवा) आदि सहित अन्य दवाओं का भारी टोटा है। सीएमएस सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में वास्तव में दवाइयों की कमी है। शॉर्टेज दवाइयों की सूची तैयार कर दवाएं खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मरीजों को जल्दी ही अस्पताल में दवाइयां मिलने लगेंगी।
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बिजनौर। जिले में एक ओर जहां वायरल का कहर जारी है तो वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में सामान्य बुखार को कंट्रोल करने वाली दवा पैरासिटामोल तक भी उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को बाहर से दवा लाने को मजबूर हो रहा है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवाइयां मुहैया कराने का ढिंढौरा पीटने वाले स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल की ओर से आंखें मूंद ली हैं। यह इसी का नतीजा है कि सामान्य बुखार तक को नियंत्रित करने वाली पैरासिटामोल तक की टैबलेट भी जिला अस्पताल में नहीं है। सरकार की मंशा है कि लोगों सरकारी अस्पताल में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, लेकिन इसके अनुरूप लोगों को सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं मरीजों को दवाइयां तक भी बाहर से लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रतिदिन जिला अस्पताल में करीब 950 मरीज विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त होकर अपना इलाज कराने के लिए आते हैं, वहां के अधिकांश चिकित्सकों द्वारा दवाओं की पर्ची बाहर से लिखकर देते हैं। वर्तमान में अस्पताल में पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल, पेट दर्द की सिरप व टैबलेट, खांसी संबंधी आंखों के ड्रॉप और स्केबीज (संक्रमण से होने वाली खुजली की दवा) आदि सहित अन्य दवाओं का भारी टोटा है। सीएमएस सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में वास्तव में दवाइयों की कमी है। शॉर्टेज दवाइयों की सूची तैयार कर दवाएं खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मरीजों को जल्दी ही अस्पताल में दवाइयां मिलने लगेंगी।
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