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बरसात की तरह विद्यार्थियों पर बरसे नंबर
Updated Wed, 30 May 2018 12:52 AM IST
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बिजनौर। सीबीएसई में पहली बार विद्यार्थियों को कक्षा दस में नंबर दिए गए हैं। अब तक विद्यार्थियों को सीजीपीए के आधार पर रैंक दी जाती थी। सीजीपीए 10 सर्वोत्तम रैंक होती थी। लेकिन नंबर सिस्टम लागू होते ही विद्यार्थियों पर नंबरों की बरसात हुई है।
विद्यार्थी अच्छे से अच्छे नंबर पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। पहले सीबीएसई में कक्षा 12 के लिए तो परीक्षाफल में नंबरों के आधार पर परीक्षाफल घोषित होता था, लेकिन कक्षा दस में रैंक दी जाती थी। कक्षा दस में सीजीपीए(कुमुलेटिव ग्रेड प्वॉइंट एव्रेज) के आधार पर रैंक दी जाती थी। अधिकतम रैंक सीजीपीए 10 तक होती थी। एक सीजीपीए में 9.5 प्रतिशत अंक तक होते थे। यानि अगर किसी को सीपीपीए 9.2 मिली होती तो इसका मतलब होता कि विद्यार्थी को 87.4 प्रतिशत अंक मिले हैं। सीजीपीए 10 रैंक के आधार पर माना जाता था कि विद्यार्थी को अधिकतम अंक मिले हैं जो 95 प्रतिशत तक के आसपास हैं। लेकिन नंबर की व्यवस्था शुरू होते ही नंबरों की बरसात विद्यार्थियों पर हुई है। जिले की बेटी रिमझिम अग्रवाल ने तो 500 में से 499 अंक प्राप्त कर बोर्ड ही टॉप कर दिया है। विद्यार्थियों का भी कहना है कि बोर्ड में ग्रेड के बजाए नंबर ही मिलने चाहिए। यह विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक है।
अजीत चौधरी
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विद्यार्थी अच्छे से अच्छे नंबर पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। पहले सीबीएसई में कक्षा 12 के लिए तो परीक्षाफल में नंबरों के आधार पर परीक्षाफल घोषित होता था, लेकिन कक्षा दस में रैंक दी जाती थी। कक्षा दस में सीजीपीए(कुमुलेटिव ग्रेड प्वॉइंट एव्रेज) के आधार पर रैंक दी जाती थी। अधिकतम रैंक सीजीपीए 10 तक होती थी। एक सीजीपीए में 9.5 प्रतिशत अंक तक होते थे। यानि अगर किसी को सीपीपीए 9.2 मिली होती तो इसका मतलब होता कि विद्यार्थी को 87.4 प्रतिशत अंक मिले हैं। सीजीपीए 10 रैंक के आधार पर माना जाता था कि विद्यार्थी को अधिकतम अंक मिले हैं जो 95 प्रतिशत तक के आसपास हैं। लेकिन नंबर की व्यवस्था शुरू होते ही नंबरों की बरसात विद्यार्थियों पर हुई है। जिले की बेटी रिमझिम अग्रवाल ने तो 500 में से 499 अंक प्राप्त कर बोर्ड ही टॉप कर दिया है। विद्यार्थियों का भी कहना है कि बोर्ड में ग्रेड के बजाए नंबर ही मिलने चाहिए। यह विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक है।
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अजीत चौधरी