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गांगन, महोबा, सोता सहित 50 नदियां होंगी पुनर्जीवित
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50 rivers including Gangan, Mahoba, Sota will be revived
- फोटो : DHAMPUR
गांगन, महोबा, सोता सहित 50 नदियां होंगी पुनर्जीवित
सतीश शर्मा
धामपुर (बिजनौर)। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. विशाल कपूर ने बताया कि विलुप्त हो चुकी नदियों को फिर से उनके पूर्व के स्वरूप में लाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से महति योजना को चलाया जा रहा है। प्रदेेश में 20 जिलों की करीब 50 से अधिक नदियों का सर्वे हो रहा है। इनमें बिजनौर बिजनौर, अमरोहा, संभल जिलों की गांगन, महोबा व सोता नदी शामिल हैं। इन सभी नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। अब तक करीब दस जिलों की नदियों का सर्वे किया जा चुका है। सी-गंगा आईआईटी (फाउंडिंग) कानपुर के प्रभारी डॉ. विनोद तारे के निर्देशन में नदियों का जीपीएस सर्वे हो रहा है।
शुक्रवार को डॉ. विशाल कपूर ने बताया कि सर्वे से साफ जाहिर है कि नदियों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों ने खत्म कर दिया है। यही कारण है कि पहाड़ों पर अधिक बारिश होने से नदियों में भयंकर उफान आ जाता है। नदियां अपने स्वरूप में न बह कर सरपट खेतों और आबादी की ओर से रुख कर लेती हैं। जिससे धन जन की हानि की होने की प्रबल संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि लोगों को नदियों की स्वरूप से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि आसपास रहने वाले लोगों को नदियों की हिफाजत करनी चाहिए। यदि कोई नुकसान पहुंचाने का प्रयास करें तो उसे रोका जाए। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद मंडल में बिजनौर, अमरोहा, संभल जिलों की गांगन, महोबा व सोता नदी का सर्वे किया जा चुका है।
डीपीआर से होगा बजट का आकलन
विशेषज्ञों का कहना है कि डीपीआर से ही बजट का आकलन होगा। जिन जिलों में अब तक सर्वे हो चुका है। सर्वे रिपोर्ट को मनरेगा समन्वयकों को सौंपी गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जल्द डीपीआर तैयार करें। जिससे बजट का आकलन हो सकें। डीपीआर से ही पता लगेगा कि किस नदी में मनरेगा से नदियों को ऐतिहासिक स्वरूप में लाने के लिए कितना धन खर्च होगा। बिजनौर में सर्वे रिपोर्ट मनरेगा डीसी विजय प्रकाश यादव को सौंपी है।
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बिजनौर में 150 किमी लंबी है गांगन नदी
डॉ. विशाल कपूर का कहना है कि बिजनौर में गांगन नदी की लंबाई करीब 150 किलोमीटर है। नदी अतिक्रमण और अवैध कब्जों की चपेट में है। कई स्थानों पर गांगन नदी नाले के आकार में है। यह नदी पूूर्ण रूप से बरसाती नदी है। जो मुरादाबाद में रामगंगा नदी में जाकर समा जाती है। इस नदी से किसानों फसलों की सिंचाई करते हैं।
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सतीश शर्मा
धामपुर (बिजनौर)। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. विशाल कपूर ने बताया कि विलुप्त हो चुकी नदियों को फिर से उनके पूर्व के स्वरूप में लाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से महति योजना को चलाया जा रहा है। प्रदेेश में 20 जिलों की करीब 50 से अधिक नदियों का सर्वे हो रहा है। इनमें बिजनौर बिजनौर, अमरोहा, संभल जिलों की गांगन, महोबा व सोता नदी शामिल हैं। इन सभी नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। अब तक करीब दस जिलों की नदियों का सर्वे किया जा चुका है। सी-गंगा आईआईटी (फाउंडिंग) कानपुर के प्रभारी डॉ. विनोद तारे के निर्देशन में नदियों का जीपीएस सर्वे हो रहा है।
शुक्रवार को डॉ. विशाल कपूर ने बताया कि सर्वे से साफ जाहिर है कि नदियों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों ने खत्म कर दिया है। यही कारण है कि पहाड़ों पर अधिक बारिश होने से नदियों में भयंकर उफान आ जाता है। नदियां अपने स्वरूप में न बह कर सरपट खेतों और आबादी की ओर से रुख कर लेती हैं। जिससे धन जन की हानि की होने की प्रबल संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि लोगों को नदियों की स्वरूप से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि आसपास रहने वाले लोगों को नदियों की हिफाजत करनी चाहिए। यदि कोई नुकसान पहुंचाने का प्रयास करें तो उसे रोका जाए। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद मंडल में बिजनौर, अमरोहा, संभल जिलों की गांगन, महोबा व सोता नदी का सर्वे किया जा चुका है।
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डीपीआर से होगा बजट का आकलन
विशेषज्ञों का कहना है कि डीपीआर से ही बजट का आकलन होगा। जिन जिलों में अब तक सर्वे हो चुका है। सर्वे रिपोर्ट को मनरेगा समन्वयकों को सौंपी गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जल्द डीपीआर तैयार करें। जिससे बजट का आकलन हो सकें। डीपीआर से ही पता लगेगा कि किस नदी में मनरेगा से नदियों को ऐतिहासिक स्वरूप में लाने के लिए कितना धन खर्च होगा। बिजनौर में सर्वे रिपोर्ट मनरेगा डीसी विजय प्रकाश यादव को सौंपी है।
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बिजनौर में 150 किमी लंबी है गांगन नदी
डॉ. विशाल कपूर का कहना है कि बिजनौर में गांगन नदी की लंबाई करीब 150 किलोमीटर है। नदी अतिक्रमण और अवैध कब्जों की चपेट में है। कई स्थानों पर गांगन नदी नाले के आकार में है। यह नदी पूूर्ण रूप से बरसाती नदी है। जो मुरादाबाद में रामगंगा नदी में जाकर समा जाती है। इस नदी से किसानों फसलों की सिंचाई करते हैं।