{"_id":"5b05b6884f1c1be5408b7519","slug":"41527101064-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो गांव के किसानों ने पेस्टीसाइट का प्रयोग किया बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो गांव के किसानों ने पेस्टीसाइट का प्रयोग किया बंद
Updated Thu, 24 May 2018 12:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो गांवों में बंद हुआ पेस्टीसाइड का प्रयोग
बिजनौर। अगर किसान जैविक खेती करें और किसी प्रदेश के राज्यपाल उनके गांव में आने का निमंत्रण स्वीकार करें, इससे बड़ी प्रेरणा जैविक खेती के लिए और क्या हो सकती है। गांव वीरूवाला और बिजौरी के किसानों ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य की प्रेरणा से जैविक खेती शुरू की है।
नजीबाबाद तहसील के गांव वीरूवाला के किसान सुरजीत सिंह पिछले साल किसानों के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुरुक्षेत्र गए थे। वहां हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य भी आए हुए थे। डॉ. देवव्रत आचार्य जैविक खेती करने और इसे बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। सुरजीत सिंह राज्यपाल के भाषण से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें अपने गांव आने के लिए निमंत्रण दिया। इस पर राज्यपाल ने कहा कि वे उनके गांव तभी आएंगे जब वे खुद और गांव के अन्य किसानों से जैविक खेती कराएं। जैविक खेती के लाभ के बारे में सुरजीत सिंह राज्यपाल से कार्यक्रम में सुन ही चुके थे और दो तीन सालों से जैविक खेती कर रहे थे।
वे गांव वापस आए और वीरूवाला, बिजौरी के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। गांव वाले भी जैविक खेती करने के लिए तैयार हो गए। जैविक खेती के संबंध में और ज्यादा जानने के लिए उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी से वार्ता की। पिछले साल गेहूं की फसल से जैविक खेती की शुरूआत की। गेहूं के बाद गन्ने की खेती भी जैविक विधि से शुरू की है, अब यहां किसानों ने खेतों में पेस्टीसाइट डालना बंद कर दिया है।
विज्ञापन
2500 रुपये क्विंटल बेचा जैविक गेहूं
सुरेंद्र सिंह के अलावा दोनों गांवों के किसान बलिहार सिंह, बिजेंद्र सिंह, जगदेव सिंह, मंजीत सिंह, सतविंदर सिंह, निर्मल सिंह, हरप्रीत सिंह, करमदीप कौर, गोविंद, अवतार सिंह आदि जैविक खेती कर रहे हैं। दोनों गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन में जैविक खेती की जा रही है। बाजार में गेहूं का मूल्य 1725 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि जैविक विधि से बोया गेहूं 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका है। किसानों ने गेहूं के बाद गन्ने की खेती में भी जैविक विधि को अपनाया है। ट्रैंच विधि से गन्ना बोकर उसमें प्याज, लहसुन बोए हैं। इन फसलों के बोने से फसलों में वैसे भी रोग कम आते हैं। खेतों में जैव उर्वरक का प्रयोग किया जा रहा है। जैविक खेती में पहले साल कम अनुभव के बाद भी सुरजीत सिंह के खेत में एक बीघा में दो क्विंटल से अधिक गेहूं निकला है। हालांकि जिले के बाकी किसानों के खेतों में यह औसत ज्यादा निकला है। सुरजीत सिंह के अनुसार अब उन्हें जैविक खेती की ज्यादा अनुभव हो गया है। अगले साल उनके खेत में भी उत्पादन बढ़ेगा। सुरजीत सिंह के अनुसार इस बार गेहूं की खेती में लागत कम होने व मूल्य कहीं ज्यादा मिलने से उनको फायदा ही हुआ है।
विदेशों में भी जैविक खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। पेस्टीसाइट खेतों और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक हैं। किसानों द्वारा जैविक खेती को अपनाने का मतलब स्वस्थ जीवन को अपनाना है। किसान जैविक खेती की ओर अधिक से अधिक प्रेरित हों। इससे लागत कम होगी और उत्पादन बढे़गा - जेपी चौधरी, उपकृषि निदेशक।
विज्ञापन
बिजनौर। अगर किसान जैविक खेती करें और किसी प्रदेश के राज्यपाल उनके गांव में आने का निमंत्रण स्वीकार करें, इससे बड़ी प्रेरणा जैविक खेती के लिए और क्या हो सकती है। गांव वीरूवाला और बिजौरी के किसानों ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य की प्रेरणा से जैविक खेती शुरू की है।
नजीबाबाद तहसील के गांव वीरूवाला के किसान सुरजीत सिंह पिछले साल किसानों के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुरुक्षेत्र गए थे। वहां हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य भी आए हुए थे। डॉ. देवव्रत आचार्य जैविक खेती करने और इसे बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। सुरजीत सिंह राज्यपाल के भाषण से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें अपने गांव आने के लिए निमंत्रण दिया। इस पर राज्यपाल ने कहा कि वे उनके गांव तभी आएंगे जब वे खुद और गांव के अन्य किसानों से जैविक खेती कराएं। जैविक खेती के लाभ के बारे में सुरजीत सिंह राज्यपाल से कार्यक्रम में सुन ही चुके थे और दो तीन सालों से जैविक खेती कर रहे थे।
विज्ञापन
वे गांव वापस आए और वीरूवाला, बिजौरी के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। गांव वाले भी जैविक खेती करने के लिए तैयार हो गए। जैविक खेती के संबंध में और ज्यादा जानने के लिए उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी से वार्ता की। पिछले साल गेहूं की फसल से जैविक खेती की शुरूआत की। गेहूं के बाद गन्ने की खेती भी जैविक विधि से शुरू की है, अब यहां किसानों ने खेतों में पेस्टीसाइट डालना बंद कर दिया है।
विज्ञापन
2500 रुपये क्विंटल बेचा जैविक गेहूं
सुरेंद्र सिंह के अलावा दोनों गांवों के किसान बलिहार सिंह, बिजेंद्र सिंह, जगदेव सिंह, मंजीत सिंह, सतविंदर सिंह, निर्मल सिंह, हरप्रीत सिंह, करमदीप कौर, गोविंद, अवतार सिंह आदि जैविक खेती कर रहे हैं। दोनों गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन में जैविक खेती की जा रही है। बाजार में गेहूं का मूल्य 1725 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि जैविक विधि से बोया गेहूं 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका है। किसानों ने गेहूं के बाद गन्ने की खेती में भी जैविक विधि को अपनाया है। ट्रैंच विधि से गन्ना बोकर उसमें प्याज, लहसुन बोए हैं। इन फसलों के बोने से फसलों में वैसे भी रोग कम आते हैं। खेतों में जैव उर्वरक का प्रयोग किया जा रहा है। जैविक खेती में पहले साल कम अनुभव के बाद भी सुरजीत सिंह के खेत में एक बीघा में दो क्विंटल से अधिक गेहूं निकला है। हालांकि जिले के बाकी किसानों के खेतों में यह औसत ज्यादा निकला है। सुरजीत सिंह के अनुसार अब उन्हें जैविक खेती की ज्यादा अनुभव हो गया है। अगले साल उनके खेत में भी उत्पादन बढ़ेगा। सुरजीत सिंह के अनुसार इस बार गेहूं की खेती में लागत कम होने व मूल्य कहीं ज्यादा मिलने से उनको फायदा ही हुआ है।
विदेशों में भी जैविक खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। पेस्टीसाइट खेतों और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक हैं। किसानों द्वारा जैविक खेती को अपनाने का मतलब स्वस्थ जीवन को अपनाना है। किसान जैविक खेती की ओर अधिक से अधिक प्रेरित हों। इससे लागत कम होगी और उत्पादन बढे़गा - जेपी चौधरी, उपकृषि निदेशक।